BCCI की 95वीं AGM में पुरुष सीनियर चयन समिति के नए प्रमुख की नियुक्ति पर चर्चा हुई, लेकिन बैठक के बाद किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई। अंतिम निर्णय का अधिकार बोर्ड पदाधिकारियों को दिया गया है।
मुंबई: भारतीय क्रिकेट टीम की पुरुष सीनियर चयन समिति के प्रमुख अजित अगरकर के भविष्य को लेकर चल रही अटकलों के बीच दो पूर्व भारतीय क्रिकेटरों के नाम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दोनों को अगरकर के बाद पुरुष सीनियर चयन समिति की जिम्मेदारी संभालने वाले संभावित उम्मीदवारों के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अभी नए चीफ सेलेक्टर की नियुक्ति को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। शुक्रवार, 18 सितंबर को मुंबई में हुई बोर्ड की 95वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) के बाद BCCI उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने बताया कि बोर्ड के पदाधिकारियों को पुरुष सीनियर चयन समिति के भविष्य पर फैसला लेने का अधिकार दिया गया है।
अगरकर का कार्यकाल अक्टूबर की शुरुआत में समाप्त होने वाला है। पिछले कुछ दिनों से उनके कार्यकाल के विस्तार को लेकर लगातार चर्चा चल रही थी। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि अगरकर को अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप तक जिम्मेदारी में बनाए रखने पर विचार किया जा रहा था, जबकि दूसरी रिपोर्टों के मुताबिक बोर्ड के एक वर्ग में उनके कार्यकाल को आगे नहीं बढ़ाने को लेकर सहमति बन रही थी।
AGM के बाद भी अंतिम फैसला बाकी
BCCI की 95वीं AGM शुक्रवार को मुंबई स्थित बोर्ड मुख्यालय में हुई। बैठक के एजेंडे में पुरुष सीनियर चयन समिति के नए प्रमुख की नियुक्ति भी शामिल थी। हालांकि बैठक के बाद यह स्पष्ट हुआ कि तत्काल किसी नए व्यक्ति की नियुक्ति की घोषणा नहीं की गई।
BCCI उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला के मुताबिक, बोर्ड ने अपने पदाधिकारियों को चयन समिति के भविष्य और अगरकर की स्थिति पर निर्णय लेने का अधिकार दिया है।
पार्थिव पटेल के नाम को लेकर चर्चा तेज
पूर्व भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज पार्थिव पटेल पिछले कुछ समय से संभावित चयन समिति प्रमुख के तौर पर चर्चा में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उनका नाम पिछले करीब छह महीने से BCCI के भीतर संभावित उत्तराधिकारी के रूप में चर्चा में रहा है। बोर्ड के महत्वपूर्ण लोगों के बीच अगरकर के बाद की स्थिति को लेकर विचार-विमर्श के दौरान पार्थिव का नाम मजबूत दावेदार के रूप में सामने आया।

पार्थिव के पक्ष में सबसे बड़ा तथ्य उनका अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट अनुभव है। उन्होंने भारत के लिए 25 टेस्ट, 38 वनडे और दो टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। वह कम उम्र में भारतीय टेस्ट टीम में पदार्पण करने वाले विकेटकीपरों में शामिल रहे हैं। BCCI के रिकॉर्ड के मुताबिक, उन्होंने अपने प्रथम श्रेणी करियर में 194 मैच खेले और 11,240 रन बनाए। उनके नाम 27 प्रथम श्रेणी शतक और 62 अर्धशतक हैं।
उनके अंतरराष्ट्रीय करियर में टेस्ट क्रिकेट में 934 रन और वनडे में 736 रन शामिल हैं। विकेटकीपिंग में भी उनका लंबा अनुभव रहा है। यही अनुभव चयन समिति की भूमिका के लिए उनके नाम को चर्चा में रखने का एक प्रमुख आधार माना जा रहा है।
गुजरात को रणजी ट्रॉफी जिताने में थी अहम भूमिका
पार्थिव पटेल के क्रिकेट करियर का एक उल्लेखनीय अध्याय गुजरात की रणजी ट्रॉफी जीत से जुड़ा है। 2016-17 रणजी ट्रॉफी फाइनल में उन्होंने शतक लगाया था और गुजरात को पहली बार इस प्रतिष्ठित घरेलू प्रतियोगिता का खिताब जीतने में मदद की थी। BCCI के अनुसार, उनके प्रथम श्रेणी करियर में विकेटकीपिंग के दौरान 486 कैच और 77 स्टंपिंग भी दर्ज हैं।

दिसंबर 2020 में पार्थिव ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा की थी। इसके बाद उन्होंने क्रिकेट से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में काम जारी रखा। आईपीएल और घरेलू क्रिकेट के अनुभव के साथ-साथ उन्होंने कमेंट्री और क्रिकेट विश्लेषण से भी खुद को जोड़े रखा।
यही वजह है कि चयन समिति की भूमिका के संदर्भ में उनके नाम को सिर्फ उनके अंतरराष्ट्रीय अनुभव से नहीं, बल्कि घरेलू क्रिकेट की समझ और खिलाड़ियों के लंबे समय तक आकलन के अनुभव से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रज्ञान ओझा भी प्रमुख दावेदार
पार्थिव पटेल के साथ पूर्व भारतीय बाएं हाथ के स्पिनर प्रज्ञान ओझा का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पार्थिव और ओझा को अगरकर के संभावित उत्तराधिकारियों में सबसे आगे माना जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि प्रज्ञान ओझा पहले से ही BCCI की पुरुष सीनियर चयन समिति का हिस्सा हैं। ऐसे में अगर उन्हें अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलती है तो वह चयन प्रक्रिया की मौजूदा कार्यप्रणाली और टीम के खिलाड़ियों से परिचित व्यक्ति के तौर पर भूमिका संभाल सकते हैं।

कुछ रिपोर्टों में यह भी संभावना जताई गई है कि नए स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति में समय लगने की स्थिति में ओझा को अंतरिम जिम्मेदारी दी जा सकती है।
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अगरकर के कार्यकाल पर क्यों उठे सवाल
अगरकर के भविष्य को लेकर चर्चा के बीच भारतीय क्रिकेट में रोहित शर्मा के वनडे भविष्य का मुद्दा भी सामने आया। हाल में रोहित को वेस्टइंडीज के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया। इससे पहले ऐसी रिपोर्टें थीं कि चयनकर्ता 2027 वनडे विश्व कप के लिए रोहित की जगह भविष्य की टीम तैयार करने पर विचार कर रहे थे।
रोहित ने इंग्लैंड के खिलाफ पिछली वनडे सीरीज के अंतिम मुकाबले में 138 रन की पारी खेली थी। इसके बाद उनके भविष्य को लेकर चर्चा का रुख बदला। BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि रोहित तब तक टीम में बने रह सकते हैं, जब तक चयनकर्ता उन्हें अपनी योजनाओं में शामिल रखते हैं।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अगरकर के संभावित कार्यकाल समाप्त होने और रोहित शर्मा के चयन को सीधे तौर पर एक-दूसरे का कारण बताने की आधिकारिक पुष्टि BCCI ने नहीं की है। इस संबंध में मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
गैरमौजूदगी भी बनी चर्चा का विषय
सितंबर की शुरुआत में BCCI की एक समीक्षा बैठक हुई थी, जिसमें अगरकर शामिल नहीं हुए थे। उनकी गैरमौजूदगी के बाद उनके भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने उस समय कहा था कि अगरकर शहर से बाहर थे और जिस स्थान पर वह मौजूद थे वहां इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं थी, इसलिए वह ऑनलाइन भी बैठक में शामिल नहीं हो सके।
उस समय BCCI ने यह स्पष्ट किया था कि बैठक में अगरकर के पद या चयन समिति में बदलाव पर कोई चर्चा नहीं हुई थी। बैठक का मुख्य फोकस 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों और टीम के रोडमैप पर था।
बाद में अगरकर के कार्यकाल को लेकर मीडिया में कई तरह की रिपोर्ट सामने आईं। कुछ रिपोर्टों में उनके विस्तार की संभावना बताई गई, जबकि कुछ में कहा गया कि वह आगे जिम्मेदारी संभालने के इच्छुक नहीं हैं।
चयन समिति में बदलाव कितना महत्वपूर्ण?
चीफ सेलेक्टर का पद भारतीय क्रिकेट में बेहद महत्वपूर्ण प्रशासनिक और क्रिकेट संबंधी जिम्मेदारियों वाला पद है। पुरुष सीनियर चयन समिति ही अंतरराष्ट्रीय सीरीज और प्रमुख टूर्नामेंटों के लिए भारतीय टीम के खिलाड़ियों के चयन की प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभाती है।
चयन समिति के अध्यक्ष को केवल मौजूदा प्रदर्शन नहीं देखना होता, बल्कि खिलाड़ियों के फॉर्म, फिटनेस, घरेलू क्रिकेट के प्रदर्शन, टीम संयोजन और भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रखना होता है। खासकर भारत के सामने 2027 वनडे विश्व कप और विश्व टेस्ट चैंपियनशिप चक्र जैसी बड़ी चुनौतियां हैं, इसलिए चयन समिति में बदलाव ऐसे समय हो रहा है जब टीम के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले किए जाने हैं।
अगरकर के जाने की स्थिति में नए अध्यक्ष को मौजूदा चयन समिति के सदस्यों के साथ काम करना होगा। BCCI ने पिछले वर्षों में चयन समिति की संरचना में कई बदलाव किए हैं। 2024 में अजित रात्रा को चयन समिति में शामिल किया गया था और उन्होंने सलिल अंकोला की जगह ली थी।
रोहित और विराट के भविष्य पर भी रहेगी नजर
नए चीफ सेलेक्टर के सामने सबसे ज्यादा चर्चा का विषय भारतीय क्रिकेट के दो वरिष्ठ बल्लेबाज रोहित शर्मा और विराट कोहली का वनडे भविष्य होगा। दोनों टेस्ट और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं और फिलहाल उनका अंतरराष्ट्रीय करियर वनडे प्रारूप तक सीमित है।

2027 वनडे विश्व कप दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में होना है। ऐसे में चयनकर्ताओं को अगले विश्व कप के लिए टीम का संयोजन तैयार करना होगा। रोहित और विराट जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों को लेकर फैसले उनके प्रदर्शन, टीम की जरूरत और चयन समिति की रणनीति पर निर्भर करेंगे।
नए चीफ सेलेक्टर की चुनौतियां
अगर पार्थिव पटेल या प्रज्ञान ओझा को भविष्य में चीफ सेलेक्टर की जिम्मेदारी मिलती है तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती मौजूदा टीम के प्रदर्शन और भविष्य की टीम के बीच संतुलन बनाने की होगी। भारतीय टीम को एक ओर अनुभवी खिलाड़ियों का उपयोग करना है, वहीं दूसरी ओर युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करना भी जरूरी है।
दोनों ही पूर्व खिलाड़ी लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट खेल चुके हैं। इसके अलावा वह भारतीय क्रिकेट सिस्टम के अलग-अलग स्तरों से परिचित रहे हैं। लेकिन चीफ सेलेक्टर की भूमिका खिलाड़ी के तौर पर खेलने से अलग होती है। इसमें चयन संबंधी फैसलों के साथ-साथ कोच, कप्तान और BCCI के साथ लगातार समन्वय भी करना पड़ता है।
भारतीय क्रिकेट के लिए यह बदलाव ऐसे समय में हो सकता है जब टीम को अगले बड़े अंतरराष्ट्रीय चक्र की तैयारी करनी है। इसलिए नए चयन प्रमुख के सामने केवल तत्काल सीरीज के लिए टीम चुनने की जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि अगले बड़े टूर्नामेंटों को ध्यान में रखते हुए भारतीय क्रिकेट के भविष्य का रोडमैप तैयार करने की भी चुनौती होगी।


