Monday, 26 October 2026
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बैंक ज्यादा ब्याज देते हैं, तो धीमी पड़ती है डिजिटल डॉलर की रफ्तार

नई दिल्ली: बैंक जब जमा पैसे पर ज्यादा ब्याज देते हैं, तो क्या लोग स्टेबलकॉइन में पैसा रखना कम कर देते हैं? बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (बीआईएस) के एक नए अध्ययन में इसी सवाल की जांच की गई है। अध्ययन से पता चलता है कि स्टेबलकॉइन अब सिर्फ क्रिप्टो की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं हैं। वे लोगों की बचत के लिए बैंक खातों का एक विकल्प भी बन रहे हैं।

स्टेबलकॉइन ऐसे डिजिटल टोकन हैं, जिनकी कीमत अमेरिकी डॉलर जैसी किसी मुद्रा से जुड़ी होती है। अध्ययन के अनुसार, जब बैंक जमा पर ब्याज बढ़ाते हैं, तो स्टेबलकॉइन के बाजार की बढ़ने की रफ्तार धीमी हो जाती है। शोधकर्ताओं ने यह नतीजा जनवरी 2019 से जून 2025 तक के अमेरिकी आंकड़ों के आधार पर निकाला है।

स्टेबलकॉइन क्यों हैं अहम?

टेथर का यूएसडीटी और सर्किल का यूएसडीसी दो प्रमुख स्टेबलकॉइन हैं। इन्हें इस तरह बनाया गया है कि इनकी कीमत एक अमेरिकी डॉलर के बराबर बनी रहे। इनके जरिए दुनिया के किसी भी हिस्से में तुरंत पैसा भेजा जा सकता है। लोग इनका इस्तेमाल क्रिप्टो खरीदने-बेचने और अपनी रकम रखने के लिए भी करते हैं।

स्टेबलकॉइन का बाजार तेजी से बढ़ा है। 2019 में इनका कुल बाजार मूल्य 5 अरब डॉलर से भी कम था। जून 2025 तक यह बढ़कर 220 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया।

बैंक खातों की तरह स्टेबलकॉइन में भी लोग अपना पैसा रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उसे इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन एक बड़ा अंतर है। बैंक में जमा पैसे पर ब्याज मिल सकता है, जबकि स्टेबलकॉइन रखने पर आम तौर पर ब्याज नहीं मिलता।

इसी वजह से नियामकों के सामने एक सवाल है। अगर लोग बड़ी मात्रा में बैंक खातों से पैसा निकालकर स्टेबलकॉइन में रखने लगें, तो क्या बैंकों के पास जमा रकम कम हो जाएगी? ऐसा होने पर बैंकों के लिए आम लोगों और कारोबारों को कर्ज देना मुश्किल हो सकता है।

शोधकर्ताओं ने इसकी जांच कैसे की?

अभी स्टेबलकॉइन का बाजार अमेरिकी बैंकिंग व्यवस्था के मुकाबले काफी छोटा है। इसलिए यह पता लगाना आसान नहीं है कि स्टेबलकॉइन के बढ़ते इस्तेमाल से बैंकों पर कितना असर पड़ रहा है।

शोधकर्ताओं ने इस सवाल को दूसरे तरीके से देखा। उन्होंने जांच की कि जब बैंक जमा पैसे पर ज्यादा ब्याज देने लगते हैं, तो स्टेबलकॉइन की मांग पर क्या असर पड़ता है।

इसके लिए उन्होंने अमेरिकी केंद्रीय बैंक, यानी फेडरल रिजर्व, की मुख्य ब्याज दर और बैंकों की जमा दरों के बीच एक खास संबंध का इस्तेमाल किया।

अध्ययन के अनुसार, जब फेडरल रिजर्व की ब्याज दर लगभग 3 प्रतिशत से नीचे होती है, तो बैंक जमा पैसे पर मिलने वाला ब्याज बहुत कम बढ़ाते हैं। लेकिन जब यह दर 3 प्रतिशत से ऊपर जाती है, तो बैंक ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ज्यादा ब्याज देने लगते हैं।

बैंकों के इस व्यवहार से शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद मिली कि जमा पर मिलने वाला ब्याज बढ़ने से स्टेबलकॉइन के बाजार पर वास्तव में क्या असर पड़ता है।

ब्याज बढ़ने पर स्टेबलकॉइन की रफ्तार धीमी हुई

अध्ययन में पाया गया कि बैंक जमा पर औसत ब्याज दर में सिर्फ 0.01 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी होने पर अगले 10 सप्ताह में स्टेबलकॉइन की वृद्धि दर धीमी पड़ गई।

शोधकर्ताओं की शुरुआती गणना के अनुसार, वृद्धि दर में करीब 3 प्रतिशत अंक की कमी आई। वहीं, उनकी पसंदीदा गणना पद्धति के अनुसार, यह कमी लगभग 9 प्रतिशत अंक थी।

इसका मतलब यह नहीं है कि बैंक ब्याज बढ़ाते ही स्टेबलकॉइन का कुल बाजार मूल्य घटने लगता है। अध्ययन का मुख्य निष्कर्ष यह है कि ज्यादा बैंक ब्याज मिलने पर स्टेबलकॉइन के बाजार की बढ़ने की रफ्तार कम हो सकती है।

हालांकि, 2022 और 2023 में एक ऐसा दौर भी आया था जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें तेजी से बढ़ाईं और स्टेबलकॉइन का कुल बाजार मूल्य लगभग 30 प्रतिशत गिर गया। लेकिन उसी दौरान टेरायूएसडी और क्रिप्टो एक्सचेंज एफटीएक्स के पतन जैसी बड़ी घटनाएं भी हुई थीं। इसलिए उस गिरावट के लिए केवल ब्याज दरों को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।

अध्ययन में एक और दिलचस्प बात सामने आई। सर्किल के यूएसडीसी पर ब्याज दरों में बदलाव का असर टेथर के यूएसडीटी के मुकाबले ज्यादा था।

इसकी एक वजह दोनों के इस्तेमाल में अंतर हो सकती है। यूएसडीसी का इस्तेमाल अमेरिकी संस्थान और डीफाई यानी ऐसी वित्तीय सेवाएं देने वाले प्लेटफॉर्म ज्यादा करते हैं, जो पारंपरिक बैंकों जैसे बिचौलियों के बिना काम कर सकते हैं। वहीं, यूएसडीटी का इस्तेमाल अमेरिका के बाहर और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में ज्यादा होता है। इन बाजारों पर अमेरिकी बैंकों की ब्याज दरों का असर अपेक्षाकृत कम हो सकता है।

इसका क्या मतलब है?

यह अध्ययन शुरुआती सबूत देता है कि स्टेबलकॉइन अब सिर्फ क्रिप्टो कारोबार का हिस्सा नहीं हैं। वे पैसा रखने के एक नए विकल्प के रूप में बैंक खातों से भी प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।

इसका मतलब यह भी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व जब ब्याज दरें बदलता है, तो उसका असर क्रिप्टो बाजार तक एक और रास्ते से पहुंच सकता है। बैंक जमा पर मिलने वाला ब्याज बदलने से स्टेबलकॉइन की मांग भी प्रभावित हो सकती है।

यह बात स्टेबलकॉइन के नियम बनाने वाले नियामकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। उनके सामने कई सवाल हैं। क्या स्टेबलकॉइन जारी करने वाली कंपनियों को इन्हें रखने वाले लोगों को ब्याज देने की अनुमति होनी चाहिए? और क्या इन कंपनियों को अपने रिजर्व का कुछ हिस्सा बैंकों में रखना चाहिए?

अध्ययन इन सवालों के जवाब नहीं देता, लेकिन इनके पीछे मौजूद आर्थिक संबंध को समझने में मदद करता है।

बैंक खातों और स्टेबलकॉइन के बीच प्रतिस्पर्धा में एक बात साफ होती दिख रही है: लोग अपना पैसा कहां रखना पसंद करेंगे, इसमें ब्याज दरें बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।

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BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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