Sunday, 16 August 2026
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जब बड़े बैंक पब्लिक ब्लॉकचेन अपनाते हैं, तो किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

नई दिल्ली: कल्पना कीजिए कि एक ऐसी विशाल डिजिटल नोटबुक है, जिसे पूरी दुनिया के लोग देख सकते हैं और उसमें नई जानकारी जोड़ सकते हैं, लेकिन उसका मालिक कोई एक व्यक्ति, कंपनी या सरकार नहीं है। दुनिया भर में फैले हजारों कंप्यूटर मिलकर इसे लगातार अपडेट करते हैं और एक बार दर्ज हुई जानकारी को बदलना या हटाना लगभग असंभव होता है। यही व्यवस्था पब्लिक ब्लॉकचेन कहलाती है, जिसके सबसे लोकप्रिय उदाहरण बिटकॉइन और एथेरियम हैं।

कई वर्षों तक पब्लिक ब्लॉकचेन का इस्तेमाल मुख्य रूप से क्रिप्टो की खरीद-बिक्री करने वाले लोगों तक ही सीमित था। लेकिन अब यह स्थिति धीरे-धीरे बदल रही है। आज बड़े और सख्त नियमों के तहत काम करने वाले बैंक भी यह सोचने लगे हैं कि क्या वे इन खुले ब्लॉकचेन का उपयोग पैसे भेजने और डिजिटल करेंसी जारी करने के लिए कर सकते हैं। हाल ही में डिजिटल करेंसी इनिशिएटिव की एक रिपोर्ट ने इसी सवाल पर विस्तार से चर्चा की है और बताया है कि इस रास्ते में अभी कौन-कौन सी बड़ी रुकावटें मौजूद हैं।

आमतौर पर किसी बैंक का पूरा रिकॉर्ड उसके अपने कंप्यूटर, अपने डेटा सेंटर और अपने कर्मचारियों के नियंत्रण में होता है। बैंक हर चीज़ पर पूरी तरह नियंत्रण रखता है। लेकिन पब्लिक ब्लॉकचेन इसकी बिल्कुल विपरीत व्यवस्था है। यहां रिकॉर्ड एक खुले नेटवर्क पर मौजूद होते हैं, जिन्हें दुनिया भर के अनजान लोग मिलकर संभालते हैं और किसी एक व्यक्ति या संस्था का उन पर नियंत्रण नहीं होता। पूरी तरह नियंत्रण में काम करने के आदी बैंकों के लिए यह व्यवस्था नई और चुनौतीपूर्ण है। रिपोर्ट का कहना है कि इसी वजह से कुछ ऐसी समस्याएं सामने आती हैं जिन्हें बैंक अकेले हल नहीं कर सकते। रिपोर्ट में ऐसी ही चार प्रमुख चुनौतियों का जिक्र किया गया है।

पहली चुनौती है “फ्रंट-रनिंग”।पब्लिक ब्लॉकचेन पर किसी लेन-देन के पूरा होने से पहले ही उसकी जानकारी दूसरे लोगों को दिखाई देने लगती है। ऐसे में कोई व्यक्ति उस जानकारी का फायदा उठाकर अपना लेन-देन पहले कर सकता है और मुनाफा कमा सकता है। इसे ऐसे समझिए जैसे टिकट खरीदने की लाइन में कोई व्यक्ति देख ले कि आप आखिरी टिकट लेने वाले हैं और वह आपसे पहले लाइन में घुसकर टिकट खरीद ले।

दूसरी समस्या है “सेंसरशिप”। पब्लिक ब्लॉकचेन पर लेन-देन दर्ज करने वाले लोग किसी खास ट्रांजैक्शन को जानबूझकर रोक सकते हैं या उसे देर से दर्ज कर सकते हैं। यह ठीक वैसे ही है जैसे कोई डाकिया कुछ चिट्ठियां जानबूझकर समय पर न पहुंचाए। अगर किसी आपात स्थिति में बैंक को तुरंत भुगतान करना हो, तो ऐसी देरी उसके लिए नुकसानदायक हो सकती है।

तीसरी चुनौती “अनचाहे टोकन” की है। पब्लिक ब्लॉकचेन पर कोई भी व्यक्ति बिना पूछे किसी बैंक के डिजिटल खाते में टोकन भेज सकता है। यह वैसा ही है जैसे कोई भी व्यक्ति आपके घर के लेटरबॉक्स में विज्ञापन वाले पर्चे डाल दे। इनमें से ज़्यादातर टोकन नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन कुछ अपराधियों या प्रतिबंधित लोगों की ओर से भी आ सकते हैं। ऐसे में बैंक को यह जांचने में समय और पैसा खर्च करना पड़ता है कि कौन-से टोकन सही हैं और कौन-से नहीं।

चौथी समस्या लेन-देन की फीस के गलत हाथों में पहुंचने का जोखिम है। पब्लिक ब्लॉकचेन पर हर ट्रांजैक्शन के साथ एक छोटी-सी प्रोसेसिंग फीस भी दी जाती है, जिसे सड़क पर टोल टैक्स देने जैसा समझा जा सकता है। लेकिन पब्लिक ब्लॉकचेन में कई बार यह साफ नहीं होता कि आखिरकार यह फीस किसके पास पहुंच रही है। अगर यह पैसा किसी ऐसे व्यक्ति या संस्था तक पहुंच जाए जिस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हों, तो बैंक अनजाने में कानून तोड़ सकता है।

इन समस्याओं के समाधान को समझाने के लिए रिपोर्ट ब्लॉकचेन तकनीक की तुलना कई मंजिलों वाली एक इमारत से करती है। सबसे ऊपर वे ऐप्स हैं जिनका लोग इस्तेमाल करते हैं। उनके नीचे वे तकनीकी नियम हैं जिनके आधार पर पूरा ब्लॉकचेन चलता है और सबसे बाहर कानून और नियमों का ढांचा है। रिपोर्ट का कहना है कि बैंक अपने स्तर पर जो आसान उपाय कर सकते हैं, वे केवल समस्या के असर को कम करते हैं, असली वजह को नहीं। असली समाधान ब्लॉकचेन की बुनियादी व्यवस्था में बदलाव से ही संभव हैं। लेकिन उन बदलावों पर बैंकों का सीधा नियंत्रण नहीं होता और इसके लिए पूरी वैश्विक ब्लॉकचेन समुदाय की सहमति जरूरी होती है।

रिपोर्ट यह भी कहती है कि केवल नई तकनीक इन समस्याओं का हल नहीं है। इसके लिए साफ और मजबूत नियम भी जरूरी हैं। उदाहरण के तौर पर, सरकारें यह स्पष्ट कर सकती हैं कि पब्लिक ब्लॉकचेन पर फ्रंट-रनिंग करना गैरकानूनी है। साथ ही, वे उन बैंकों को कानूनी सुरक्षा भी दे सकती हैं जो पूरी ईमानदारी से नियमों का पालन करते हैं, लेकिन कभी उनसे अनजाने में कोई गलती हो जाती है।

रिपोर्ट में बैंकों, ब्लॉकचेन डेवलपर्स और सरकारों से मिलकर काम करने की निवेदन की गई है, क्योंकि इन समस्याओं का समाधान कोई एक पक्ष अकेले नहीं कर सकता।

भारत जैसे देश में, जहां डिजिटल भुगतान अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं और डिजिटल परिसंपत्तियों में लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है, ये सवाल भविष्य के नहीं बल्कि आज के हैं। पब्लिक ब्लॉकचेन कई नई संभावनाएं लेकर आया है, लेकिन लोगों और संस्थाओं का भरोसा जीतने के लिए धैर्य, आपसी सहयोग और साफ नियमों की जरूरत है।

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BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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