Thursday, 16 July 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
NEET घोटाला: इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में INNOVATIVEVIEW की भूमिका पर गंभीर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग तेज 18वें दिन भी जारी है सोनम वांगचुक का अनशन, इस बीच जानिए दुनिया के 7 सबसे लंबे अनशन और उनके कारण Expiry Date बदलकर आपकी रसोई तक पहुंच रहा ज़हर? दिल्ली के ओखला से सामने आए फूड रैकेट ने बढ़ाई चिंता 1976 Chowchilla Bus Kidnapping: जब फिरौती के लिए रची गई 26 बच्चों को जिंदा दफनाने की साजिश E20 पेट्रोल: देश के लिए हरित भविष्य या वाहन मालिकों के लिए नई चुनौती? आखिर क्यों छिड़ी है एथेनॉल पर इतनी बड़ी बहस रेफरी पर भड़के फ्रांस के मैनेजर डिडिएर डेशॉम्प्स, सेमीफाइनल में मिली हार के बाद उठाए गंभीर सवाल GOFTE के नेतृत्व में दिल्ली में तकनीकी शिक्षा कर्मचारियों का शांतिपूर्ण पैदल मार्च India at Lord’s: जब भारतीय क्रिकेट ने ‘Home of Cricket’ में लिखी अपनी सबसे यादगार कहानियां NEET घोटाला: इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में INNOVATIVEVIEW की भूमिका पर गंभीर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग तेज 18वें दिन भी जारी है सोनम वांगचुक का अनशन, इस बीच जानिए दुनिया के 7 सबसे लंबे अनशन और उनके कारण Expiry Date बदलकर आपकी रसोई तक पहुंच रहा ज़हर? दिल्ली के ओखला से सामने आए फूड रैकेट ने बढ़ाई चिंता 1976 Chowchilla Bus Kidnapping: जब फिरौती के लिए रची गई 26 बच्चों को जिंदा दफनाने की साजिश E20 पेट्रोल: देश के लिए हरित भविष्य या वाहन मालिकों के लिए नई चुनौती? आखिर क्यों छिड़ी है एथेनॉल पर इतनी बड़ी बहस रेफरी पर भड़के फ्रांस के मैनेजर डिडिएर डेशॉम्प्स, सेमीफाइनल में मिली हार के बाद उठाए गंभीर सवाल GOFTE के नेतृत्व में दिल्ली में तकनीकी शिक्षा कर्मचारियों का शांतिपूर्ण पैदल मार्च India at Lord’s: जब भारतीय क्रिकेट ने ‘Home of Cricket’ में लिखी अपनी सबसे यादगार कहानियां

उत्तराखंड की थारू जनजाति की जीवनशैली और परंपराओं में बसी अनोखी पहचान

नई दिल्ली: भारत में कई ऐसी जनजातियाँ हैं जिनकी अपनी अलग पहचान और जीवनशैली है। उन्हीं में से एक है थारू जनजाति। यह जनजाति लंबे समय से तराई के इलाकों में रहती आ रही है यह आज भी अपनी परंपराओं को संभाले हुए है। खासकर उत्तराखंड के उधम सिंह नगर के इलाकों में रहने वाले थारू लोग एक साधारण लेकिन बेहद दिलचस्प जीवन जीते हैं।

प्रकृति के साथ उनका गहरा रिश्ता

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर और खटीमा जैसे इलाकों में थारू समुदाय बड़ी संख्या में रहता है। अगर इनकी संख्या की बात की जाए तो यहाँ इनकी कुल आबादी लगभग 81,000 से 89,000 के बीच मानी जाती है।इनका जीवन पूरी तरह प्रकृति से जुड़ा हुआ है।

ये लोग खेती करते हैं जिसमें धान, गेहूं और सब्जियों के अलावा गन्ने की फसल भी उगाते हैं। आज भी इनमें से कई लोगों के घर मिट्टी और लकड़ी से बने होते हैं, जो मौसम के हिसाब से ठंडक और गर्मी दोनों बनाए रखते हैं।

साधारण खाना और सेहतभर जीवन

थारू लोगों का भोजन बहुत ही सरल होता है। चावल, दाल और मछली इनके खाने का मुख्य हिस्सा हैं। इसके अलावा ये जंगल से मिलने वाली प्राकृतिक चीजों का भी उपयोग करते हैं।

ये भी पढ़े:- मालवीय नगर का वो ‘बंद मकान’ और कातिल मां की खामोशी, 2 बेटियों के कत्ल की आरोपी का अभी जेल ही ठिकाना

रंग-बिरंगी परंपराएँ और संस्कृति

थारू जनजाति अपनी समृद्ध संस्कृति के लिए जानी जाती है। इनके लोकगीत और पारंपरिक नृत्य सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
महिलाएँ रंग-बिरंगे कपड़े पहनती हैं और चाँदी के आभूषणों से खुद को सजाए रखती हैं, जो उनकी सांस्कृतिक पहचान को और खास बनाता है।

अनोखी घर बनाने की शैली

इनके घर मिट्टी, गोबर और लकड़ी से बनाए जाते हैं। दीवारों पर खूबसूरत पेंटिंग्स और डिज़ाइन होते हैं, जो उनकी कला और संस्कृति को दिखाते हैं।

मच्छरों से प्राकृतिक सुरक्षा

थारू लोगों के बारे में माना जाता है कि उनमें मलेरिया के खिलाफ प्राकृतिक सहनशीलता पाई जाती है। पुराने समय में जब तराई क्षेत्र मलेरिया से भरा था, तब भी ये लोग वहीं आराम से रहते थे।

महिलाओं की अहम भूमिका

थारू जनजाति में महिलाओं की भूमिका बेहद मजबूत और प्रभावशाली होती है, जहाँ वे सिर्फ घर तक सीमित नहीं रहतीं बल्कि खेती, आर्थिक कार्यों और सामाजिक जीवन में बराबर की भागीदारी निभाती हैं। वे खेतों में बुवाई से लेकर कटाई तक हर काम में सक्रिय रहती हैं और कई बार खेती से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले भी खुद लेती हैं।

इसके साथ ही वे घर की जिम्मेदारियाँ, पशुपालन और आय बढ़ाने के लिए छोटे व्यवसाय भी संभालती हैं। थारू महिलाएँ अपनी पारंपरिक कला, लोकगीत, नृत्य और दीवार चित्रों के माध्यम से संस्कृति को संजोकर अगली पीढ़ी तक पहुँचाती हैं।

समाज में उन्हें अपेक्षाकृत अधिक सम्मान और स्वतंत्रता मिलती है, जिससे वे आत्मनिर्भर और सशक्त नजर आती हैं, और यही कारण है कि उन्हें थारू समाज की असली ताकत माना जाता है।

ये भी पढ़े:- ISRO ने फिर धमाका कर दिया! गगनयान का दूसरा एयर ड्रॉप टेस्ट सफल, मानव अंतरिक्ष यात्रा अब और नजदीक

परंपरा और आधुनिकता का संतुलन

आज का थारू समाज एक ऐसे दौर में है, जहाँ वह अपनी पुरानी परंपराओं को भी संभाल कर रखना चाहता है और आधुनिक दुनिया के साथ भी कदम मिलाकर चलना चाहता है।

थारू जनजाति हमें यह सिखाती है कि सादगी में भी खुशियाँ छिपी होती हैं और प्रकृति के साथ जुड़कर जीवन को बेहतर तरीके से जिया जा सकता है।

शेयर करें: Facebook X WhatsApp
BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।

Exit mobile version