Friday, 17 July 2026
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On This Day: जब मद्रास बना चेन्नई, जानिए 17 जुलाई 1996 की उस ऐतिहासिक घोषणा की पूरी कहानी

17 जुलाई 1996 को तमिलनाडु सरकार ने मद्रास का नाम बदलकर चेन्नई करने की घोषणा की। जानिए इस ऐतिहासिक फैसले की वजह, कानूनी प्रक्रिया और पूरा इतिहास

नई दिल्ली: भारत के प्रमुख महानगरों में शामिल चेन्नई आज अपनी संस्कृति, शिक्षा, आईटी उद्योग, ऑटोमोबाइल सेक्टर और ऐतिहासिक विरासत के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। लेकिन एक समय था जब यही शहर मद्रास (Madras) के नाम से पहचाना जाता था।

17 जुलाई 1996 भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है, क्योंकि इसी दिन तमिलनाडु सरकार ने राज्य की राजधानी मद्रास का नाम बदलकर चेन्नई (Chennai) करने की घोषणा की थी। हालांकि यह बदलाव उसी दिन कानूनी रूप से लागू नहीं हुआ था।

इसके लिए बाद में द सिटी ऑफ मद्रास (अल्टरेशन ऑफ नेम) एक्ट, 1996 के तहत कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई और उसी वर्ष यह नाम आधिकारिक रूप से लागू हो गया।

यह केवल एक शहर का नाम बदलने का फैसला नहीं था, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान, ऐतिहासिक विरासत और स्थानीय भाषा को सम्मान देने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम था।

क्यों बदला गया मद्रास का नाम?

1990 के दशक में भारत के कई राज्यों में ऐसे शहरों और स्थानों के नाम बदलने की मांग तेज हुई, जिनके नाम औपनिवेशिक शासन के दौरान प्रचलित हुए थे। तमिलनाडु में भी लंबे समय से यह विचार सामने आ रहा था कि राजधानी का नाम उसकी स्थानीय संस्कृति और तमिल पहचान को दर्शाना चाहिए।

17 जुलाई 1996 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने तमिलनाडु विधानसभा में घोषणा की कि राज्य सरकार मद्रास का नाम बदलकर चेन्नई करेगी। इस घोषणा के पीछे मुख्य उद्देश्य शहर को उसकी मूल सांस्कृतिक पहचान से जोड़ना और तमिल भाषा एवं विरासत को प्राथमिकता देना था।

 ‘मद्रासनाम की कहानी

‘मद्रास’ नाम की उत्पत्ति को लेकर इतिहासकारों के बीच अलग-अलग मत हैं। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह नाम मद्रासपट्टनम (Madraspatnam) नामक एक छोटे से गांव से जुड़ा था, जहां ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 17वीं शताब्दी में अपना ठिकाना बनाया था। वहीं कुछ अन्य विशेषज्ञ इसे पुर्तगाली प्रभाव या स्थानीय समुदायों से जोड़कर देखते हैं।

इतिहास में इस नाम की उत्पत्ति को लेकर कोई एक सर्वमान्य सिद्धांत नहीं है, लेकिन इतना स्पष्ट है कि अंग्रेजी शासन के दौरान *Madras* नाम व्यापक रूप से सरकारी रिकॉर्ड, व्यापार और प्रशासन में इस्तेमाल होने लगा।

चेन्नईनाम कहां से आया?

‘चेन्नई’ नाम की उत्पत्ति को लेकर भी कई ऐतिहासिक मत हैं। सबसे प्रचलित मान्यता यह है कि यह नाम ‘चेन्नापट्टनम (Chennapatnam)’ से निकला है, जो मद्रासपट्टनम के समीप स्थित एक बस्ती थी।

कुछ इतिहासकार इसे स्थानीय नायक शासक दामरला चेन्नप्पा नायक के नाम से जोड़ते हैं, जबकि कुछ इसे क्षेत्र की प्राचीन बस्तियों से संबंधित मानते हैं।

भले ही इसके स्रोत पर मतभेद हों, लेकिन ‘चेन्नई’ को तमिल संस्कृति और स्थानीय इतिहास से अधिक निकट माना जाता है। यही कारण था कि राज्य सरकार ने इस नाम को आधिकारिक रूप देने का निर्णय लिया।

कानूनी प्रक्रिया कैसे पूरी हुई?

17 जुलाई 1996 को विधानसभा में घोषणा होने के बाद नाम परिवर्तन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद द सिटी ऑफ मद्रास (अल्टरेशन ऑफ नेम) एक्ट, 1996′ पारित किया गया। इस कानून को सितंबर 1996 में राज्यपाल की मंजूरी मिली और इसके बाद शहर का आधिकारिक नाम चेन्नई कर दिया गया।

नाम परिवर्तन के बाद सभी सरकारी विभागों, रेलवे, डाक विभाग, हवाई अड्डे, प्रशासनिक रिकॉर्ड और आधिकारिक दस्तावेजों में धीरे-धीरे ‘Madras’ की जगह ‘Chennai’ का उपयोग शुरू हो गया।

क्या केवल शहर का नाम बदला?

दिलचस्प बात यह है कि शहर का नाम बदलने के बाद भी कई संस्थानों ने अपने पुराने नाम बरकरार रखे। उदाहरण के लिए Madras High Court, Indian Institute of Technology Madras (IIT Madras), University of Madras और Madras Medical College जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों ने अपने ऐतिहासिक नाम नहीं बदले।

इससे यह भी स्पष्ट होता है कि नाम परिवर्तन का उद्देश्य इतिहास को मिटाना नहीं, बल्कि शहर की आधिकारिक पहचान को स्थानीय संस्कृति के अनुरूप बनाना था।

दूसरे शहरों पर भी पड़ा प्रभाव

मद्रास से चेन्नई बनने के बाद देश के अन्य शहरों के नाम बदलने की प्रक्रिया को भी नई गति मिली। इसके बाद बॉम्बे का नाम मुंबई, कलकत्ता का कोलकाता, बैंगलोर का  बेंगलुरु, इलाहाबाद का प्रयागराज और गुड़गांव का गुरुग्राम जैसे कई बड़े बदलाव देखने को मिले।

इन बदलावों के पीछे अलग-अलग राज्यों की अपनी सांस्कृतिक, भाषाई और ऐतिहासिक वजहें थीं, लेकिन एक समान उद्देश्य था—स्थानीय पहचान और विरासत को अधिक महत्व देना।

आज का चेन्नई

आज चेन्नई भारत के सबसे विकसित महानगरों में गिना जाता है। इसे ‘डेट्रॉयट ऑफ इंडिया’ भी कहा जाता है क्योंकि देश के ऑटोमोबाइल उद्योग का बड़ा हिस्सा यहां केंद्रित है। इसके अलावा शहर आईटी, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, समुद्री व्यापार और फिल्म उद्योग का भी प्रमुख केंद्र है।

मरीना बीच, कपालीश्वरर मंदिर, फोर्ट सेंट जॉर्ज, संगीत एवं भरतनाट्यम की समृद्ध परंपरा और तमिल संस्कृति चेन्नई की पहचान को और मजबूत बनाते हैं। हर वर्ष लाखों पर्यटक और व्यवसायी इस शहर का रुख करते हैं।

एक नाम, नई पहचान

17 जुलाई 1996 वह दिन था जब तमिलनाडु सरकार ने मद्रास को चेन्नई नाम देने की ऐतिहासिक घोषणा की। हालांकि कानूनी रूप से यह बदलाव कुछ समय बाद लागू हुआ, लेकिन इस निर्णय ने शहर की पहचान को एक नई दिशा दी। यह केवल नाम बदलने की कहानी नहीं थी, बल्कि स्थानीय भाषा, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देने का प्रतीक भी थी।

आज, लगभग तीन दशक बाद, चेन्नई केवल तमिलनाडु की राजधानी ही नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक, सांस्कृतिक और तकनीकी प्रगति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

मद्रास से चेन्नई तक का यह सफर हमें याद दिलाता है कि किसी शहर का नाम केवल उसकी पहचान नहीं होता, बल्कि उसके इतिहास, संस्कृति और लोगों की भावनाओं से भी गहराई से जुड़ा होता है।

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Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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