Thursday, 06 August 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
Hiroshima Day: 81 साल पहले हिरोशिमा पर बरसा था परमाणु कहर, जानिए कैसे ‘लिटिल बॉय’ ने थाम दी थी लाखों जिंदगियां डॉ. के. ए. पॉल ने मोदी-शाह से एफसीआरए संशोधन विधेयक वापस लेने की मांग की नहीं रहे बसपा के इकलौते विधायक उमा शंकर सिंह, ‘बलिया के रॉबिन हुड’ ने 55 साल की उम्र में ली अंतिम सांस शेख हसीना के ऑनलाइन कार्यक्रम के बाद शाकिब अल हसन के घर पर हमला, बांग्लादेश में गरमाई राजनीति सैकड़ों विद्यार्थियों ने लिया नशामुक्त भारत का संकल्प, योगी सूरी बोले— ‘स्वामी दयानंद की तलवार बनकर नशे के राक्षस का अंत करें’ वाईएसआरसीपी के विरोध के बावजूद राज्यसभा में चिंतकायला विजय ने विशेष सीबीआई अदालतों में वर्षों से लंबित मामलों का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया डॉ. के.ए. पॉल ने विजय को वाशिंगटन डीसी बुलाया, स्टालिन परिवार से अपील EPS-95 पेंशनर्स की चेतावनी: पेंशन बढ़ाओ, वरना EPFO कार्यालय बंद Hiroshima Day: 81 साल पहले हिरोशिमा पर बरसा था परमाणु कहर, जानिए कैसे ‘लिटिल बॉय’ ने थाम दी थी लाखों जिंदगियां डॉ. के. ए. पॉल ने मोदी-शाह से एफसीआरए संशोधन विधेयक वापस लेने की मांग की नहीं रहे बसपा के इकलौते विधायक उमा शंकर सिंह, ‘बलिया के रॉबिन हुड’ ने 55 साल की उम्र में ली अंतिम सांस शेख हसीना के ऑनलाइन कार्यक्रम के बाद शाकिब अल हसन के घर पर हमला, बांग्लादेश में गरमाई राजनीति सैकड़ों विद्यार्थियों ने लिया नशामुक्त भारत का संकल्प, योगी सूरी बोले— ‘स्वामी दयानंद की तलवार बनकर नशे के राक्षस का अंत करें’ वाईएसआरसीपी के विरोध के बावजूद राज्यसभा में चिंतकायला विजय ने विशेष सीबीआई अदालतों में वर्षों से लंबित मामलों का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया डॉ. के.ए. पॉल ने विजय को वाशिंगटन डीसी बुलाया, स्टालिन परिवार से अपील EPS-95 पेंशनर्स की चेतावनी: पेंशन बढ़ाओ, वरना EPFO कार्यालय बंद

डॉ. के. ए. पॉल ने मोदी-शाह से एफसीआरए संशोधन विधेयक वापस लेने की मांग की

डॉ. के. ए. पॉल ने कहा कि अमेरिकी सांसद राइली मूर की टिप्पणी एफसीआरए संशोधनों पर बढ़ती वैश्विक चिंता का संकेत है और सरकार से पुनर्विचार की अपील की

नई दिल्ली: ग्लोबल पीस इनिशिएटिव के संस्थापक डॉ. के. ए. पॉल ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधनों को वापस लेने की अपील की। उनका कहना है कि यह विधेयक भारत की अर्थव्यवस्था, लोकतांत्रिक संस्थाओं और वैश्विक छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

एक सार्वजनिक वीडियो संदेश में डॉ. पॉल ने सरकार से विधेयक को फिलहाल आगे न बढ़ाने और सभी संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा के बाद ही निर्णय लेने का आग्रह किया। उनके अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों से नागरिक समाज संगठनों, धर्मार्थ संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के बीच अनिश्चितता बढ़ सकती है।

डॉ. पॉल ने दावा किया कि इस विधेयक को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता व्यक्त की जा रही है। उन्होंने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं, अमेरिकी सांसदों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और भारतीय गैर-सरकारी संगठनों ने इस पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, इससे धार्मिक और धर्मार्थ संस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं, विदेशी निवेश पर असर पड़ सकता है और भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है।

उन्होंने अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद राइली मूर की टिप्पणी का भी उल्लेख किया। डॉ. पॉल के अनुसार, मूर ने प्रस्तावित संशोधनों पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि किसी संस्था का एफसीआरए पंजीकरण समाप्त होता है, तो उसकी संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं। वहीं, भारत सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य विदेशी अनुदान प्राप्त संस्थाओं की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना और कानूनी प्रावधानों को स्पष्ट करना है।

डॉ. पॉल ने कहा कि यदि विधेयक मौजूदा स्वरूप में पारित हुआ तो निवेश, रोजगार और दीर्घकालिक आर्थिक विकास प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने सरकार से संवाद, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए पुनर्विचार करने की अपील की।

शेयर करें: Facebook X WhatsApp
BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

संबंधित खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।