इंग्लैंड दौरे पर लगातार हार के बीच पाकिस्तान क्रिकेट में फिक्सिंग का साया फिर चर्चा में है। खिलाड़ियों के फोन से डेटा लिए जाने की खबरों ने पुराने स्पॉट फिक्सिंग मामलों की याद ताजा कर दी है।
लंदन/ इस्लामाबाद: पाकिस्तान क्रिकेट एक बार फिर ऐसे विवाद के केंद्र में है, जिसने मैदान के प्रदर्शन से ज्यादा टीम के अंदर चल रही गतिविधियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इंग्लैंड दौरे पर लगातार दो टेस्ट हारने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने सात खिलाड़ियों को स्वदेश भेज दिया, कोचिंग स्टाफ में बदलाव किया और अब टीम के कुछ खिलाड़ियों के मोबाइल फोन से डेटा लिए जाने की खबर सामने आई है। इसके बाद सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में मैच फिक्सिंग और स्पॉट फिक्सिंग की आशंकाएं फिर चर्चा में आ गई हैं।
हालांकि, सबसे पहले यह साफ करना जरूरी है कि मौजूदा मामले में किसी पाकिस्तानी खिलाड़ी को मैच फिक्सिंग का दोषी घोषित नहीं किया गया है। PCB ने सिर्फ इतना कहा है कि उसने खिलाड़ियों के अनुशासन और आचरण से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के बाद आंतरिक जांच शुरू की है। बोर्ड ने किसी खिलाड़ी पर भ्रष्टाचार या फिक्सिंग का आधिकारिक आरोप नहीं लगाया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, मोहम्मद रिजवान और इमाम-उल-हक के मोबाइल फोन से डेटा लिए जाने की बात सामने आई है। PCB ने इन रिपोर्टों की पुष्टि नहीं की है और लोगों से अपुष्ट दावों पर भरोसा न करने को कहा है।
फिर सवाल उठता है कि आखिर पाकिस्तान क्रिकेट में फिक्सिंग का नाम बार-बार क्यों आता है? और क्या यह वाकई दुनिया की दूसरी टीमों के मुकाबले पाकिस्तानी क्रिकेटरों में ज्यादा है?
इंग्लैंड दौरे पर उठते सवाल
पाकिस्तान का मौजूदा इंग्लैंड दौरा प्रदर्शन के लिहाज से बेहद खराब रहा। तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में टीम को पहले हेडिंग्ले और फिर लॉर्ड्स में बड़ी हार का सामना करना पड़ा। दूसरे टेस्ट में इंग्लैंड ने पाकिस्तान को 194 रन से हराया। इसके बाद PCB ने टीम में बड़ा बदलाव किया।
मोहम्मद रिजवान, सलमान अली आगा, इमाम-उल-हक, अली उस्मान, खुर्रम शहजाद, आमिर जमाल और मोहम्मद अवैस जफर को टीम से रिलीज कर दिया गया। मुख्य कोच सरफराज अहमद और गेंदबाजी कोच उमर गुल को भी हटा दिया गया। तीसरे टेस्ट से पहले माइक हेसन को रेड-बॉल टीम की जिम्मेदारी दी गई।
इसी बीच पाकिस्तानी मीडिया में खबरें आईं कि इमाम और रिजवान के फोन टीम के सुरक्षा अधिकारी ने अपने कब्जे में लिए और उनका डेटा हासिल किया गया। बाद में फोन खिलाड़ियों को लौटा दिए गए। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि अन्य खिलाड़ियों के फोन भी PCB के पास हैं। लेकिन इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
PCB ने 7 सितंबर को आंतरिक अनुशासनात्मक जांच की पुष्टि जरूर की, लेकिन यह नहीं बताया कि जांच किन खिलाड़ियों के खिलाफ है और आरोप क्या हैं। बोर्ड के मीडिया निदेशक आमिर मीर ने कहा कि प्रक्रिया PCB के नियमों के तहत होगी।
आखिर मैच फिक्सिंग और स्पॉट फिक्सिंग में क्या अंतर है?
यहां इस अंतर को समझना बेहद जरूरी है। मैच फिक्सिंग में पूरे मैच के नतीजे या महत्वपूर्ण घटनाओं को जानबूझकर प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। वहीं स्पॉट फिक्सिंग में मैच के किसी खास हिस्से या घटना को पहले से तय करने की कोशिश होती है।
मसलन, गेंदबाज का जानबूझकर नो-बॉल डालना, किसी ओवर में निश्चित संख्या में रन देना या बल्लेबाज का जानबूझकर एक निश्चित तरीके से आउट होना स्पॉट फिक्सिंग के दायरे में आ सकता है।
2010 का लॉर्ड्स मामला इसी वजह से क्रिकेट इतिहास के सबसे चर्चित स्पॉट फिक्सिंग मामलों में शामिल हुआ।
पाकिस्तान क्रिकेट के 7 बड़े फिक्सिंग मामले
1. सलीम मलिक मामला: पाकिस्तान क्रिकेट का पहला बड़ा धक्का
पूर्व पाकिस्तानी कप्तान सलीम मलिक का नाम 1990 के दशक में मैच फिक्सिंग के आरोपों से जुड़ा। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों शेन वॉर्न और मार्क वॉ ने उन पर खराब प्रदर्शन के लिए रिश्वत देने की पेशकश के आरोप लगाए थे।
इसके बाद पाकिस्तान में अलग-अलग जांच हुईं। 2000 में न्यायमूर्ति मलिक कय्यूम की जांच में सलीम मलिक को मैच फिक्सिंग का दोषी माना गया और आजीवन प्रतिबंध की सिफारिश की गई। उन पर जुर्माना भी लगाया गया।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि पहली बार पाकिस्तान क्रिकेट के सबसे बड़े नामों में से एक पर भ्रष्टाचार का इतना गंभीर आरोप साबित हुआ। इससे टीम की अंतरराष्ट्रीय छवि को बड़ा नुकसान पहुंचा।
2. अता-उर-रहमान: उसी जांच में दूसरा बड़ा नाम
तेज गेंदबाज अता-उर-रहमान भी उसी कय्यूम जांच में दोषी पाए गए। उन पर आजीवन प्रतिबंध और जुर्माना लगाया गया था। बाद में ICC स्तर पर उनकी प्रतिबंध संबंधी स्थिति की समीक्षा भी हुई।
यह मामला दिखाता है कि फिक्सिंग की समस्या केवल एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं थी। जांच के दौरान टीम के भीतर भ्रष्टाचार और संदिग्ध संपर्कों को लेकर व्यापक सवाल उठे।
हालांकि, उसी दौर के सभी आरोप साबित नहीं हुए। पाकिस्तान की सीनेट में दर्ज आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, कुछ अन्य खिलाड़ियों पर लगाए गए आरोप पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण साबित नहीं हुए और कुछ पर केवल जुर्माना लगाया गया।
3. 2010 लॉर्ड्स स्पॉट फिक्सिंग: सबसे बदनाम अध्याय
यह पाकिस्तान क्रिकेट के इतिहास का शायद सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मामला 2010 का लॉर्ड्स स्पॉट फिक्सिंग स्कैंडल था।
इसमें कप्तान सलमान बट, तेज गेंदबाज मोहम्मद आसिफ और युवा गेंदबाज मोहम्मद आमिर दोषी पाए गए। आरोप था कि इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट में जानबूझकर नो-बॉल डाली गईं। ICC के स्वतंत्र एंटी-करप्शन ट्रिब्यूनल ने तीनों को दोषी पाया।
सलमान बट को 10 साल का प्रतिबंध दिया गया, जिसमें पांच साल निलंबित थे। मोहम्मद आसिफ पर सात साल का प्रतिबंध लगा, जिसमें दो साल निलंबित थे, जबकि मोहम्मद आमिर को पांच साल के लिए प्रतिबंधित किया गया।
बाद में ब्रिटेन की अदालत में भी मामले ने आपराधिक रूप लिया और तीनों को जेल की सजा मिली। यही वजह है कि जब भी पाकिस्तान क्रिकेट में फिक्सिंग की कोई नई खबर सामने आती है, 2010 लॉर्ड्स टेस्ट का नाम सबसे पहले याद किया जाता है।
4. दानिश कनेरिया मामला: इंग्लैंड में स्पॉट फिक्सिंग
पाकिस्तान के टेस्ट स्पिनर दानिश कनेरिया का मामला भी काफी गंभीर था। यह घटना 2009 के इंग्लिश घरेलू क्रिकेट से जुड़ी थी।
ECB की अनुशासनात्मक कार्यवाही में कनेरिया पर एसेक्स के साथी खिलाड़ी मर्विन वेस्टफील्ड को जानबूझकर खराब प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने का आरोप साबित हुआ। इसके बाद कनेरिया को इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में क्रिकेट से आजीवन प्रतिबंधित कर दिया गया।
वेस्टफील्ड ने भी स्वीकार किया था कि उसे एक निश्चित संख्या में रन देने के लिए भुगतान किया गया था और उसे पांच साल का प्रतिबंध मिला।
5. शरजील खान: PSL में स्पॉट फिक्सिंग
2017 में पाकिस्तान सुपर लीग भी भ्रष्टाचार के विवाद में फंस गई। शरजील खान को PSL के शुरुआती मैचों के बाद जांच के चलते निलंबित किया गया। PCB ने कहा था कि एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट PSL को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था।
शरजील पर पांच आरोप साबित हुए और उन्हें पांच साल का प्रतिबंध मिला, जिसमें ढाई साल निलंबित थे। PCB के विस्तृत फैसले में कहा गया कि ट्रिब्यूनल इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि स्पॉट फिक्सिंग पर चर्चा हुई और शरजील ने तय योजना को अमल में भी लाया।
बाद में उन्होंने वापसी के लिए PCB के पुनर्वास कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
6. खालिद लतीफ: PSL 2017 का दूसरा बड़ा मामला
खालिद लतीफ भी उसी PSL 2017 प्रकरण में दोषी पाए गए। उनका मामला इस लिहाज से महत्वपूर्ण था कि PCB की जांच में भ्रष्टाचार के लिए खिलाड़ियों तक पहुंच बनाने वाले नेटवर्क और संपर्कों की भूमिका सामने आई।
PCB के आधिकारिक दस्तावेजों में लतीफ के खिलाफ कार्रवाई का संबंध 9 फरवरी 2017 को इस्लामाबाद यूनाइटेड और पेशावर जाल्मी के बीच खेले गए PSL मुकाबले से बताया गया है।
यानी PSL 2017 कोई एक खिलाड़ी वाला मामला नहीं था। इसमें कई खिलाड़ियों की जांच हुई और अलग-अलग खिलाड़ियों पर अलग-अलग स्तर की कार्रवाई हुई।
7. नासिर जमशेद: PSL 2017 मामले का ‘मुख्य कड़ी’ वाला आरोप
PSL 2017 प्रकरण में नासिर जमशेद का मामला सबसे लंबी कार्रवाई वाले मामलों में रहा। PCB ट्रिब्यूनल ने 2018 में उन्हें 10 साल के लिए निलंबित किया। ICC ने रिपोर्ट किया कि PCB के मुताबिक जमशेद को मामले का ‘मास्टरमाइंड’ माना गया और उन पर दूसरे खिलाड़ियों को स्पॉट फिक्सिंग में शामिल करने की भूमिका साबित हुई।
इसी मामले में मोहम्मद इरफान, मोहम्मद नवाज और शाहजैब हसन जैसे खिलाड़ियों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई थी। PCB के रिकॉर्ड के मुताबिक, मोहम्मद इरफान ने भ्रष्टाचार-रोधी नियमों के उल्लंघन को स्वीकार किया और उन्हें एक साल का प्रतिबंध तथा जुर्माना मिला, जिसमें छह महीने निलंबित थे।
आखिर पाकिस्तान में बार-बार क्यों उठता है फिक्सिंग का मुद्दा?
1. सट्टेबाजी का बड़ा और संगठित नेटवर्क
क्रिकेट में भ्रष्टाचार सिर्फ खिलाड़ी की लालच से पैदा नहीं होता। सट्टेबाज, बिचौलिए और ऐसे लोग जो खिलाड़ियों से अंदरूनी जानकारी हासिल करना चाहते हैं, पूरे नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं।
स्पॉट फिक्सिंग में किसी पूरे मैच का परिणाम बदलने की जरूरत भी नहीं होती। किसी छोटे घटनाक्रम को प्रभावित करके सट्टेबाजी से पैसा कमाया जा सकता है।
2. आर्थिक असमानता और खिलाड़ियों की शुरुआती स्थिति
कुछ खिलाड़ी अपेक्षाकृत साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचते हैं। अचानक मिलने वाली बड़ी रकम और बाहरी नेटवर्क का दबाव कुछ खिलाड़ियों को कमजोर बना सकता है। हालांकि, यह समस्या सिर्फ पाकिस्तान की नहीं है।
3. प्रशासनिक अस्थिरता
पाकिस्तान क्रिकेट की एक बड़ी समस्या लंबे समय से प्रशासनिक अस्थिरता रही है। कोच, चयनकर्ता और टीम प्रबंधन में बार-बार बदलाव से खिलाड़ियों के लिए स्थिर सिस्टम बनाना मुश्किल होता है।
मौजूदा संकट में भी दो टेस्ट के बाद सात खिलाड़ियों को रिलीज करने और कोचिंग स्टाफ बदलने जैसे कदमों ने टीम की अस्थिरता को उजागर किया है।
4. भ्रष्टाचार-रोधी व्यवस्था का महत्व
किसी भी क्रिकेट बोर्ड के लिए सिर्फ दोषी खिलाड़ी को सजा देना पर्याप्त नहीं है। खिलाड़ियों को यह समझाना भी जरूरी है कि संदिग्ध संपर्क या सट्टेबाजी से जुड़े किसी व्यक्ति की पेशकश को तुरंत रिपोर्ट करना उनकी जिम्मेदारी है।
PSL 2017 मामले के समय PCB ने भी खिलाड़ियों को संदिग्ध संपर्क की जानकारी तुरंत एंटी-करप्शन अधिकारियों को देने की जिम्मेदारी याद दिलाई थी।
पाकिस्तान क्रिकेट के ‘पतन’ की असली वजह सिर्फ फिक्सिंग नहीं
अगर पाकिस्तान क्रिकेट की मौजूदा स्थिति को देखें तो उसकी परेशानी को सिर्फ मैच फिक्सिंग से जोड़ना गलत होगा।
टीम की अस्थिरता के पीछे लगातार प्रशासनिक बदलाव, चयन विवाद, कोचिंग में अस्थिरता, खिलाड़ियों का प्रदर्शन, नेतृत्व संबंधी सवाल और घरेलू क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक प्रतिभाओं को व्यवस्थित तरीके से विकसित करने की चुनौती जैसे कई कारण देखे जा सकते हैं।
इंग्लैंड दौरे पर दो टेस्ट हारने के बाद अचानक सात खिलाड़ियों को वापस भेजना और कोचिंग स्टाफ में बदलाव इस अस्थिरता का ताजा उदाहरण है।
फिक्सिंग के पुराने मामले इस संकट को और गंभीर इसलिए बनाते हैं क्योंकि वे टीम की विश्वसनीयता को प्रभावित करते हैं। मैदान पर खराब प्रदर्शन को खिलाड़ी की फॉर्म से समझा जा सकता है, लेकिन जब उसी समय खिलाड़ियों के फोन, संपर्क और अनुशासन की जांच की खबरें सामने आती हैं तो संदेह तेजी से जन्म लेता है।
पाकिस्तान क्रिकेट के सामने चुनौती केवल एक जांच पूरी करने की नहीं है। उसे ऐसा भरोसेमंद और स्थिर सिस्टम तैयार करना होगा, जहां खिलाड़ियों को भ्रष्ट नेटवर्क से बचाने, संदिग्ध संपर्कों की रिपोर्टिंग, पारदर्शी जांच और दोष साबित होने पर निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए ताकि नउ सभी को एक साथ मजबूत किया जा सके। तभी बार-बार लौटता ‘फिक्सिंग का भूत’ वास्तव में पाकिस्तान क्रिकेट से दूर हो सकेगा।
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