Wednesday, 30 September 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
‘नाद संगम’ में युवा कलाकारों ने शास्त्रीय संगीत और कथक से मोहा मन ईरान की अर्थव्यवस्था हुई बेहाल, 25 लाख रियाल प्रति डॉलर के पार पहुंची मुद्रा! जानिए कैसे पटरी पर आएगी GDP? IPL 2027: मोहित शर्मा बनेंगे CSK के नए बॉलिंग कोच, जहीर खान की सिफारिश पर मिली जिम्मेदारी Karnataka SIR: 4 हजार से ज्यादा फॉर्म-7 आवेदन, मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की मांग से उठे सवाल Asian Games 2026: नीरू धांडा का ‘गोल्डन निशाना’, महिला ट्रैप में रचा इतिहास; एशियन रिकॉर्ड के साथ जीता स्वर्ण 1 अक्टूबर से रेलवे में टिकट चेकिंग होगी सख्त, इन यात्रियों को रखनी होगी Original ID; नियम तोड़ने पर लग सकता है भारी जुर्माना 11 साल बाद ‘वायर्ड ईयरबड्स’ के साथ लौटा Bose! Noise Cancelling के साथ USB-C कनेक्शन; जानें कीमत और दूसरे फीचर्स अटल सम्मान समारोह 2026 में डॉ. सत्यनारायण जटिया, श्याम जाजू और अविनाश राय खन्ना सहित कई हस्तियां सम्मानित ‘नाद संगम’ में युवा कलाकारों ने शास्त्रीय संगीत और कथक से मोहा मन ईरान की अर्थव्यवस्था हुई बेहाल, 25 लाख रियाल प्रति डॉलर के पार पहुंची मुद्रा! जानिए कैसे पटरी पर आएगी GDP? IPL 2027: मोहित शर्मा बनेंगे CSK के नए बॉलिंग कोच, जहीर खान की सिफारिश पर मिली जिम्मेदारी Karnataka SIR: 4 हजार से ज्यादा फॉर्म-7 आवेदन, मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की मांग से उठे सवाल Asian Games 2026: नीरू धांडा का ‘गोल्डन निशाना’, महिला ट्रैप में रचा इतिहास; एशियन रिकॉर्ड के साथ जीता स्वर्ण 1 अक्टूबर से रेलवे में टिकट चेकिंग होगी सख्त, इन यात्रियों को रखनी होगी Original ID; नियम तोड़ने पर लग सकता है भारी जुर्माना 11 साल बाद ‘वायर्ड ईयरबड्स’ के साथ लौटा Bose! Noise Cancelling के साथ USB-C कनेक्शन; जानें कीमत और दूसरे फीचर्स अटल सम्मान समारोह 2026 में डॉ. सत्यनारायण जटिया, श्याम जाजू और अविनाश राय खन्ना सहित कई हस्तियां सम्मानित

Karnataka SIR: 4 हजार से ज्यादा फॉर्म-7 आवेदन, मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की मांग से उठे सवाल

बाबलेश्वर में हुच्चप्पा गणीगर ने 22 और 23 सितंबर को 493 Form-7 आवेदन दाखिल किए। इनमें बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई थी।

बेंगलुरु: कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने की मांग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

राज्य के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में 4,000 से ज्यादा फॉर्म-7आवेदन दाखिल किए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या उन मतदाताओं की बताई जा रही है, जिनके नाम मुस्लिम समुदाय से जुड़े हैं। खास बात यह है कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में दर्जनों या सैकड़ों आवेदन कुछ ही लोगों की ओर से दाखिल किए गए हैं।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कर्नाटक में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है और लाखों मतदाताओं के नामों की दोबारा जांच की जा रही है। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि फॉर्म-7के जरिए की गई हर आपत्ति की जांच की जाएगी और केवल आवेदन दाखिल हो जाने से किसी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि गलत आधार पर आपत्ति दर्ज कराने वालों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

क्या है फॉर्म–7?

फॉर्म-7का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी व्यक्ति के नाम को लेकर आपत्ति दर्ज कराने या उसका नाम हटाने की मांग करने के लिए किया जाता है। किसी मतदाता की मृत्यु हो जाने, उसके स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाने या उसका नाम किसी दूसरी जगह पहले से दर्ज होने जैसे आधारों पर इस फॉर्म के जरिए आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है। नियमों के तहत किसी व्यक्ति को किसी दूसरे मतदाता के नाम को लेकर भी आपत्ति की अनुमति है।

यानी फॉर्म-7अपने आप में गैरकानूनी फॉर्म नहीं है। समस्या तब पैदा होती है जब बड़ी संख्या में मतदाताओं के खिलाफ बहुत कम लोग एक साथ आवेदन दाखिल करते हैं और उन आवेदनों में एक खास समुदाय के मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में दिखाई देते हैं। कर्नाटक में सामने आए ताजा मामलों में यही पैटर्न चर्चा का विषय बना है।

बाबलेश्वर में एक दिन में 1,373 आवेदन

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा ध्यान विजयपुरा जिले के बाबलेश्वर विधानसभा क्षेत्र में सामने आए आंकड़ों ने खींचा है। यहां 22 सितंबर को ही 1,373 फॉर्म-7आवेदन दाखिल किए गए। इनमें से 1,363 आवेदन सिर्फ 10 लोगों ने दाखिल किए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक इन आवेदनों में बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं के नामों की थी, जो मुस्लिम समुदाय से संबंधित बताए जा रहे हैं और कई मामलों में संबंधित आवेदक के अपने मतदान केंद्र से अलग बूथों के मतदाताओं को निशाना बनाया गया।

आंकड़ों के मुताबिक 22 सितंबर को बाबलेश्वर में दाखिल 1,373 आवेदनों का बड़ा हिस्सा कुछ ही लोगों ने जमा किया। अगले दिन यानी 23 सितंबर को भी 257 और Form-7 आवेदन दाखिल किए गए। इस तरह सिर्फ 22 और 23 सितंबर के दौरान इस निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता नाम हटाने की मांग से जुड़े आवेदनों की संख्या काफी बढ़ गई।

बाबलेश्वर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कांग्रेस नेता और कर्नाटक के मंत्री एमबी पाटिल करते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 2.17 लाख से अधिक मतदाता थे और पाटिल ने 15,216 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी।

एक व्यक्ति ने दाखिल किए 493 आवेदन

बाबलेश्वर के मामले में एक और बात सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार हुच्चप्पा गणीगर नाम के एक मतदाता ने 22 और 23 सितंबर के दौरान 493 Form-7 आवेदन दाखिल किए।

वहीं गोविंदराज मुंदुर नाम के एक अन्य व्यक्ति ने 23 सितंबर को अलग-अलग 33 मतदान केंद्रों में 413 मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की।

इन आवेदनों में इस्तेमाल किए गए आधारों में मतदाता का अनुपस्थित होना या स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाना जैसे कारण शामिल थे। यही वह बिंदु है जिस पर चुनाव प्रक्रिया से जुड़े लोगों और नागरिक समूहों ने सवाल उठाए हैं कि क्या इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के बारे में व्यक्तिगत स्तर पर सही तरीके से जानकारी जुटाई गई थी।

भालकी में भी दिखा ऐसा ही पैटर्न

ठीक ऐसा ही मामला बिदर जिले के भालकी विधानसभा क्षेत्र में सामने आया। यहां 22 और 23 सितंबर को बड़ी संख्या में Form-7 आवेदन दाखिल किए गए। इन आवेदनों में करीब 2,180 मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई और रिपोर्टों के मुताबिक इनमें लगभग सभी नाम मुस्लिम मतदाताओं के थे।

22 सितंबर को 10 लोगों ने 384 आवेदन दाखिल किए, जबकि 23 सितंबर को 31 लोगों ने 1,895 आवेदन दाखिल किए। कुल मिलाकर 22 और 23 सितंबर को बाबलेश्वर और भालकी में 3,909 फॉर्म-7आवेदन दर्ज हुए और इनसे 3,757 मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई।

भालकी का प्रतिनिधित्व कांग्रेस के मंत्री ईश्वर खंड्रे करते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 2.30 लाख से ज्यादा मतदाता थे और खंड्रे ने 27,706 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी।

24 सितंबर को भालकी में 525 और फॉर्म-7 आवेदन दाखिल किए गए। रिपोर्ट के अनुसार इनमें से 523 आवेदन केवल 20 लोगों ने दाखिल किए थे और जिन मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई, उनमें बड़ी संख्या मुस्लिम मतदाताओं की थी।

ये भी पढ़ें :- Asian Games 2026: नीरू धांडा का ‘गोल्डन निशाना’, महिला ट्रैप में रचा इतिहास; एशियन रिकॉर्ड के साथ जीता स्वर्ण

बीजेपी के कब्जे वाली सीटों में भी मामले

यह मामला केवल कांग्रेस विधायकों वाले निर्वाचन क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। कुछ बीजेपी प्रतिनिधित्व वाले विधानसभा क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में Form-7 आवेदन सामने आए हैं।

बसवकल्याण में एक दिन प्राप्त 37 Form-7 आवेदनों में से 32 आवेदन एक ही व्यक्ति सिद्दप्पा ने दाखिल किए। इन आवेदनों में एक ही मतदान केंद्र के मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई थी।

इसी तरह दक्षिण कन्नड़ के बेल्थंगडी में उमेश बांगेड़ा नाम के व्यक्ति ने 21 आवेदन दाखिल किए। इन आवेदनों में भी एक मतदान केंद्र के मुस्लिम मतदाताओं के नामों पर आपत्ति की गई थी। दोनों निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व बीजेपी विधायक करते हैं।

इससे यह स्पष्ट होता है कि मौजूदा विवाद को केवल एक पार्टी के निर्वाचन क्षेत्रों तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। अलग-अलग राजनीतिक दलों के प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों में Form-7 के बड़े समूह में दाखिल होने की घटनाएं सामने आई हैं।

बेलगावी में भी विवाद

कर्नाटक में SIR के दौरान बेलगावी से भी Form-7 को लेकर विवाद सामने आया था। बेलगावी के वीरभद्र नगर इलाके में करीब 200 Form-7 आवेदन दाखिल किए जाने का मामला सामने आया। आरोप था कि दो लोगों ने बूथ लेवल अधिकारी पर इन फॉर्मों को आगे बढ़ाने के लिए दबाव बनाया।

बूथ लेवल अधिकारी ने कथित तौर पर फॉर्म पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया और कहा कि जिन मतदाताओं के नामों पर आपत्ति की गई थी, उनकी मैपिंग वह खुद कर चुकी थीं।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि इन आवेदन में मुस्लिम मतदाताओं के नाम थे और संबंधित लोग स्थानीय बीजेपी नेता से जुड़े थे। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी। बेलगावी के डिप्टी कमिश्नर ने कहा था कि संबंधित आपत्तियों के आधार पर किसी मतदाता का नाम हटाया नहीं गया है और मामले की जांच की जाएगी।

SIR और मतदाता सूची की जांच

कर्नाटक में चल रहा SIR केवल Form-7 आवेदनों तक सीमित नहीं है। राज्य में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण 30 जून 2026 से शुरू हुआ था। बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर जाकर मतदाताओं के रिकॉर्ड और पुराने चुनावी आंकड़ों का मिलान किया।

24 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 4.46 करोड़ मतदाता थे। इससे पहले 16 जून की सूची में लगभग 5.54 करोड़ मतदाता दर्ज थे। चुनाव अधिकारियों के अनुसार करीब 1.08 करोड़ मतदाताओं को ASDDO श्रेणी में रखा गया था।

ASDDO का अर्थ Absent, Shifted, Dead, Duplicate या Other है। इसका मतलब यह नहीं था कि इन सभी लोगों को अंतिम रूप से मतदाता सूची से हटा दिया गया है, बल्कि उनके रिकॉर्ड को लेकर अलग-अलग कारणों से सत्यापन की जरूरत थी।

इसके अलावा करीब 43.81 लाख मतदाताओं को ऐसे मामलों में नोटिस जारी किया जाना था, जहां पुराने रिकॉर्ड से उनका मिलान नहीं हो पाया या रिकॉर्ड में तार्किक विसंगतियां पाई गईं।

यही वजह है कि SIR के दौरान नामों के सत्यापन और उन्हें सूची में बनाए रखने की प्रक्रिया को लेकर पूरे राज्य में राजनीतिक और सामाजिक बहस चल रही है।

चुनाव आयोग के सामने कितनी बड़ी चुनौती?

कर्नाटक में सामने आए ये मामले चुनाव अधिकारियों के सामने दोहरी चुनौती रखते हैं। एक तरफ मतदाता सूची से मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या गलत तरीके से दर्ज नामों को हटाना SIR का उद्देश्य है। दूसरी तरफ किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलती से हटने से रोकना भी चुनाव प्रक्रिया की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

SIR की प्रक्रिया में मतदाताओं को अपने रिकॉर्ड की जांच करने और जरूरी होने पर दावे या आपत्तियां दाखिल करने का अवसर दिया गया है। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर SIR से जुड़ी मतदाता सूची और संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

कर्नाटक के मौजूदा मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि बड़े पैमाने पर दाखिल किए गए फॉर्म-7 आवेदनों में से कितने वास्तविक रिकॉर्ड संबंधी समस्याओं पर आधारित हैं और कितने आवेदन गलत या अपर्याप्त आधार पर दाखिल किए गए। इसका जवाब चुनाव अधिकारियों की जांच और आगे की कार्रवाई के बाद ही सामने आएगा।

कब आएगी अंतिम मतदाता सूची?

कर्नाटक में SIR की प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची 24 अगस्त को प्रकाशित की गई थी। दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया सितंबर में पूरी हुई। इसके बाद चुनाव अधिकारियों को प्राप्त आवेदनों और आपत्तियों का निपटारा करना है।

संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जानी है।

इसका मतलब है कि फिलहाल फॉर्म-7 के जरिए दाखिल किए गए हजारों आवेदनों पर अंतिम फैसला बाकी है। बाबलेश्वर, भालकी, बसवकल्याण, बेल्थंगडी और अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में सामने आए मामलों की जांच पूरी होने के बाद ही यह पता चलेगा कि कितने नाम हटाने योग्य पाए गए और कितनी आपत्तियां खारिज हुईं।

Home » Karnataka SIR: 4 हजार से ज्यादा फॉर्म-7 आवेदन, मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की मांग से उठे सवाल
शेयर करें: Facebook X WhatsApp

MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।

Exit mobile version