Friday, 02 October 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
शिवाजी पार्क में CJP का बड़ा प्रदर्शन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग हुई तेज! SIR और वोटर लिस्ट को लेकर गंभीर आरोप ‘Drishyam 3 The Conclusion’ Review: दमदार कहानी और क्लाइमेक्स के साथ ‘विजय सलगांवकर’ की वापसी, जयदीप अहलावत ने बढ़ाया सस्पेंस; जानिए कैसा है आखिरी चैप्टर? ‘Sigma’ Movie Review: विजय के बेटे जेसन संजय की पहली फिल्म कैसी है? सुंदीप किशन की एक्टिंग और एक्शन ने जीता दिल? ‘सेकंड एक्ट अवॉर्ड्स 2026’ में नई शुरुआत करने वाली हस्तियों को सम्मान इन्दिरा आईवीएफ ने चंद्रपुर में नया फर्टिलिटी सेंटर शुरू किया पंजाब कांग्रेस में बड़ा फेरबदल, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने छोड़ा प्रदेश अध्यक्ष पद! जानिए इस्तीफे का कारण और पद के प्रबल दावेदार Verity Movie Review: ऐनी हैथवे और डकोटा जॉनसन के दमदार अभिनय के बावजूद कहानी में उलझी फिल्म, जानिए कैसी है साइकोलॉजिकल थ्रिलर ‘वेरिटी’ America-Iran Conflict: मार्को रुबियो ने ईरानी विदेश मंत्री को न्यूयॉर्क छोड़ने का आदेश दिया, बातचीत में गतिरोध के बीच बढ़ी कूटनीतिक तल्खी शिवाजी पार्क में CJP का बड़ा प्रदर्शन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग हुई तेज! SIR और वोटर लिस्ट को लेकर गंभीर आरोप ‘Drishyam 3 The Conclusion’ Review: दमदार कहानी और क्लाइमेक्स के साथ ‘विजय सलगांवकर’ की वापसी, जयदीप अहलावत ने बढ़ाया सस्पेंस; जानिए कैसा है आखिरी चैप्टर? ‘Sigma’ Movie Review: विजय के बेटे जेसन संजय की पहली फिल्म कैसी है? सुंदीप किशन की एक्टिंग और एक्शन ने जीता दिल? ‘सेकंड एक्ट अवॉर्ड्स 2026’ में नई शुरुआत करने वाली हस्तियों को सम्मान इन्दिरा आईवीएफ ने चंद्रपुर में नया फर्टिलिटी सेंटर शुरू किया पंजाब कांग्रेस में बड़ा फेरबदल, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने छोड़ा प्रदेश अध्यक्ष पद! जानिए इस्तीफे का कारण और पद के प्रबल दावेदार Verity Movie Review: ऐनी हैथवे और डकोटा जॉनसन के दमदार अभिनय के बावजूद कहानी में उलझी फिल्म, जानिए कैसी है साइकोलॉजिकल थ्रिलर ‘वेरिटी’ America-Iran Conflict: मार्को रुबियो ने ईरानी विदेश मंत्री को न्यूयॉर्क छोड़ने का आदेश दिया, बातचीत में गतिरोध के बीच बढ़ी कूटनीतिक तल्खी

क्रिप्टो एसेट्स पर वैश्विक स्तर पर एकजुट नियमन की आवश्यकतानई दिल्ली,

दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, वैचारिक मतभेद और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच, क्रिप्टो एसेट्स अब कोई हाशिये की तकनीक नहीं रह गई हैं। वे वैश्विक वित्तीय प्रणाली के केंद्र में एक अहम भूमिका निभाने लगी हैं।

क्रिस्टीन लेगार्ड का चेतावनी भरा संदेश
अप्रैल 2025 में इंटरनेशनल मॉनेटरी एंड फाइनेंशियल कमिटी (IMFC) की बैठक के दौरान, यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड ने क्रिप्टो एसेट्स के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने दुनियाभर के नीति-निर्माताओं से आग्रह किया कि वे इन परिसंपत्तियों से जुड़े जोखिमों को गंभीरता से लें और नियमन के लिए वैश्विक सहयोग को मज़बूत करें। उन्होंने सावधानीपूर्वक वित्तीय नीतियों की आवश्यकता पर भी बल दिया।

वैश्विक संस्थाओं की चेतावनियां और बढ़ते जोखिम
लेगार्ड की बातों को अंतरराष्ट्रीय मानक संस्थाओं—जैसे बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS), IMF, फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बोर्ड (FSB), और बेसल बैंकिंग पर्यवेक्षण समिति (BCBS)—की हालिया चेतावनियों से समर्थन मिला है। इनका मानना है कि स्टेबलकॉइन, डीसेंट्रलाइज़्ड फाइनेंस (DeFi), और संस्थागत निवेश में तेजी से बढ़ोतरी के कारण क्रिप्टो अब पूरे वित्तीय सिस्टम के लिए खतरा बन सकता है। इसलिए, इस क्षेत्र में समन्वित वैश्विक नीतियों की सख्त ज़रूरत है।

IMF रिपोर्ट: तेज़ी के साथ अस्थिरता भी लौटी
IMF की Global Financial Stability Report (GFSR) अप्रैल 2025 में प्रकाशित हुई, जिसमें बताया गया कि 2024 के अंत से बिटकॉइन ने उल्लेखनीय रिटर्न दिए हैं। इसके एक्सचेंज-ट्रेडेड प्रोडक्ट्स (ETPs) में निवेश $100 बिलियन से अधिक हो गया है। वहीं, स्टेबलकॉइन्स का कुल बाजार मूल्य $200 बिलियन पार कर चुका है, खासकर अमेरिका में संभावित सकारात्मक क्रिप्टो नियमों की उम्मीदों के कारण।

हालांकि, इसी के साथ अस्थिरता भी बढ़ी है। बिटकॉइन की कीमतें अपने उच्चतम स्तर से करीब 25% तक गिर चुकी हैं। IMF ने चेताया है कि अब बिटकॉइन की कीमतें शेयर बाज़ार की चाल से गहराई से जुड़ चुकी हैं। इसका मतलब है कि अगर क्रिप्टो बाज़ार में बड़ी गिरावट आती है, तो इसका असर पूरे वित्तीय तंत्र पर पड़ सकता है।

तेज़ी से बढ़ती स्वीकृति, लेकिन नियमों की कमी एक खतरा
IMF ने विशेष रूप से विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को लेकर चिंता जताई है। यदि इन देशों में बिना स्पष्ट नियमों के क्रिप्टो को तेजी से अपनाया गया, तो इससे पूंजी का पलायन, मौद्रिक संप्रभुता की क्षति और अवैध वित्तीय गतिविधियों की आशंका बढ़ सकती है। IMF ने सुझाव दिया है कि स्पष्ट कानूनी ढांचे, टोकनाइज़ेशन की निगरानी और IMF–FSB के वैश्विक रोडमैप के अनुरूप कदम उठाए जाने चाहिएं।

वैश्विक नियमन ही स्थायित्व का रास्ता
दुनियाभर की नियामक एजेंसियां इस बात पर सहमत हैं कि एक समन्वित वैश्विक रेगुलेटरी व्यवस्था ही इस चुनौती से निपटने का सही तरीका है। इससे नियमों में असमानता दूर होगी, अवैध गतिविधियों पर लगाम लगेगी, और नवाचार को एक सुरक्षित, पारदर्शी और टिकाऊ रूप मिल सकेगा।

भारत की चुप्पी: चिंताजनक संकेत
ऐसे समय में जब वैश्विक मंच पर क्रिप्टो रेगुलेशन को लेकर सक्रियता दिख रही है, भारत की निष्क्रियता चिंता का कारण बन रही है। भले ही टैक्सेशन और मनी लॉन्ड्रिंग के संदर्भ में कुछ कदम उठाए गए हों, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट और व्यापक नीति या नियामक ढांचा सामने नहीं आया है। यह स्थिति इसलिए और विरोधाभासी बन जाती है क्योंकि भारत ने G20 के क्रिप्टो रोडमैप में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई है।

नवाचार को रोकना नहीं, बल्कि सुरक्षित बनाना है लक्ष्य
यह समझना जरूरी है कि रेगुलेशन का मकसद तकनीकी नवाचार को बाधित करना नहीं है, बल्कि उसे जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाना है। अब सवाल यह नहीं है कि क्रिप्टो को रेगुलेट किया जाए या नहीं, बल्कि यह है कि कैसे किया जाए ताकि वैश्विक और घरेलू—दोनों स्तरों पर वित्तीय स्थिरता कायम रह सके।

शेयर करें: Facebook X WhatsApp
BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

संबंधित खबरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।