तमिलनाडु में सी. जोसेफ विजय ने फ्लोर टेस्ट में 144 वोट हासिल कर बहुमत साबित किया। सहयोगी दलों और विपक्षी समर्थन से बनी मजबूत सरकार
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और TVK के प्रमुख सी जोसेफ विजय ने बुधवार को विधानसभा में 144 वोट पाकर सफलतापूर्वक फ्लोर टेस्ट पास कर लिया। तमिलनाडु की राजनीति में आज एक नया अध्याय लिखा गया है। तमिलनाडु में नए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने आज विधानसभा में विश्वास मत में जीत हासिल कर तमिलनाडु के सीएम के रूप में अपनी जगह पक्की कर ली है। राज्य में यह पहला मौका है जब सदन में प्लोर टेस्ट की कार्यवाई का सीधा प्रसारण किया गया।
क्या कहते हैं आंकड़े
बात करें मौजूदा आंकड़ों की तो तमिलनाडु की मौजूदा 234 सीटों में से मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK ने 108 सीटों पर जीत दर्ज की थी। यानी इस समीकरण के आधार पर TVK बहुमत के आंकड़े 118 से 10 सीट दूर थी। बात करें अगर TVK के सहयोगी दलों की इसमें कांग्रेस (5 सीट), CPI (2 सीट), CPM (2 सीट), IUML (2 सीट) और VCK (2 सीट) शामिल हैं। इन 13 विधेयकों की मदद से TVK को कुल 121 सीटें प्राप्त हो गईं। इसके अलावा कई अन्य दलों के विधायकों का भी उन्हें समर्थन मिला जिसकी बदौलत वे 144 के आंकड़े तक आसानी से पहुंच गए।
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ये TVK विधायक नहीं हुए फ्लोर टेस्ट में शामिल
हालाँकि, मद्रास उच्च न्यायालय के एक फैसले ने विजय के फ्लोर टेस्ट जीतने के लक्ष्य को थोड़ा मुश्किल बनाने का प्रयास किया। कोर्ट ने तिरुप्पत्तूर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतने वाले TVK विधायक श्रीनिवास सेतुपति को फ्लोर टेस्ट में वोट देने पर रोक लगा दी थी। दरअसल, तिरुप्पत्तूर क्षेत्र के नतीजों के मुताबिक श्रीनिवास सेतुपति को 83,365 वोट मिले। वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी केआर पेरियाकरुप्पन (DMK) के पक्ष में 83,364 वोट आये। महज 1 वोट से मिली इस हार पर पेरियाकरुप्पन ने मद्रास हाई कोर्ट में वोटों की दोबारा गिनती की चुनौती पेश करी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। लेकिन इसके बावजूद भी TVK फ्लोर टेस्ट में बहुमत प्राप्त करने में सफल रही।
AIADMK में बगावत, TVK को फायदा
फ्लोर टेस्ट मे ठीक पहले विपक्षी दल AIADMK में बगावत की खबरें भी सामने आईं। वरिष्ठ नेता वीसी षणमुगम और एसपी वेलुमणि के नेतृत्व वाले एक गुट ने TVK को समर्थन देने की घोषणा की। वहीं मंगलवार को AMMK के एकमात्र विधायक एस कामराज ने भी विधानसभा में विजय को अपना समर्थन देने की सार्वजनिक घोषणा की थी। जिसके बाद AMMK के संस्थापक टीटीवी दिनाकरन ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया।
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