Thursday, 22 October 2026
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“भारत के सोलर मैन” प्रो. चेतन सिंह सोलंकी की पहल, कल राजघाट से शुरू होगी ‘भारत क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा’

देशभर के 51 शहरों में अभियान, 10 लाख नागरिकों को व्यवहारिक जलवायु कार्रवाई के लिए प्रेरित करने का लक्ष्य

नई दिल्ली, 12 मई 2026:

पूर्व आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर एवं प्रख्यात जलवायु कार्यकर्ता प्रो. चेतन सिंह सोलंकी के नेतृत्व में ‘भारत क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा’ का शुभारंभ कल, 13 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित राजघाट से प्रार्थना सभा के साथ किया जाएगा। यह यात्रा देशव्यापी जलवायु जनआंदोलन की शुरुआत का प्रतीक होगी।

एनर्जी स्वराज फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित यह 100 दिवसीय यात्रा जलवायु जागरूकता को जनभागीदारी में बदलने का प्रयास है। इसका उद्देश्य नागरिकों को अपने दैनिक जीवन में सरल, मापनीय और व्यवहारिक बदलाव अपनाने के लिए प्रेरित करना है। आगामी 100 दिनों में यह यात्रा लगभग 5,800 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए देश के 51 शहरों से गुजरेगी। यह मार्ग भारत के ‘गोल्डन क्वाड्रिलेटरल’—दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई—को जोड़ता है।

हालांकि यात्रा भौतिक रूप से गोल्डन क्वाड्रिलेटरल के शहरों से होकर गुजरेगी, लेकिन ‘क्लाइमेट सत्याग्रह’ अभियान पूरे देश में समानांतर रूप से संचालित किया जाएगा। इसमें स्थानीय स्वयंसेवकों और नागरिकों की भागीदारी के माध्यम से उत्तर-पूर्व, जम्मू-कश्मीर सहित कई अन्य क्षेत्रों में भी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

“भारत के सोलर मैन” के रूप में विख्यात प्रो. सोलंकी लंबे समय से देशभर में व्यवहार आधारित अभियानों के जरिए सतत जीवनशैली और जलवायु जिम्मेदारी का संदेश दे रहे हैं। ‘भारत क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा’ इसी विचार पर आधारित है कि जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्या का समाधान केवल नीतिगत चर्चाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

यह अभियान उस वैश्विक चिंता को रेखांकित करता है कि मानवता वर्तमान में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग 1.8 पृथ्वियों के बराबर दर से कर रही है, जबकि हमारे पास केवल एक ही पृथ्वी है। ‘फाइनाइट लिविंग’ की अवधारणा के माध्यम से लोगों को अनावश्यक उपभोग कम करने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

इस पहल का लक्ष्य लगभग 10 लाख लोगों को ‘फाइनाइट लिविंग प्रतिज्ञा’ से जोड़ना है। इसकी शुरुआत एक सरल और व्यवहारिक संकल्प से की जा रही है—एक वर्ष तक नए कपड़े न खरीदने का निर्णय। इसके साथ ही विभिन्न शहरों में स्थानीय जलवायु समूहों का गठन करने और एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों को अपने पर्यावरणीय प्रभाव को मापने की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। अभियान का जोर ऐसे कदमों पर है जो सरल हों, व्यावहारिक हों और जिनमें अतिरिक्त खर्च न हो, ताकि हर व्यक्ति इसमें भाग ले सके।

यात्रा के शुभारंभ से पूर्व प्रो. सोलंकी ने कहा, “जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की चिंता नहीं रह गया है, यह वर्तमान की सच्चाई है जो समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रही है। यह यात्रा नागरिकों से अपील है कि वे अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे कदम उठाकर जलवायु सुधार के सक्रिय भागीदार बनें।”

प्रो. सोलंकी ने नागरिकों, शैक्षणिक संस्थानों, सामुदायिक समूहों और सिविल सोसायटी संगठनों से अपील की है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में यात्रा से जुड़ी गतिविधियों में भाग लें और इस राष्ट्रव्यापी जलवायु आंदोलन को मजबूत बनाने में योगदान दें।

‘क्लाइमेट सत्याग्रह’ का मूल भाव पृथ्वी की सीमाओं के भीतर रहते हुए जीवन जीने का संकल्प है। यह अभियान अनावश्यक उपभोग को कम करने और सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जो जलवायु संकट के प्रति एक सीधी और प्रभावी प्रतिक्रिया है।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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