Tuesday, 23 June 2026
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बीआईएस–आईआईए दिल्ली स्टेट इंडस्ट्री मीट में बोले प्रतिनिधिबी: मानकीकरण और अनुपालन से ही बढ़ेगी एमएसएमई की ताकत

2026 में गुणवत्ता, लिक्विडिटी और संस्थागत सहयोग को बताया विकास का आधार

नई दिल्ली, 25 फरवरी 2026

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA) – दिल्ली स्टेट के सहयोग से रोहिणी स्थित क्राउन प्लाजा में बीआईएस–आईआईए दिल्ली स्टेट इंडस्ट्री मीट का आयोजन किया। अनुपालन-आधारित वैश्विक अर्थव्यवस्था में मानकीकरण के महत्व, हितधारकों की जागरूकता और एमएसएमई की तैयारियों पर केंद्रित इस बैठक में उद्योग विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और वित्तीय नेतृत्व ने गुणवत्ता मानकों, लिक्विडिटी चुनौतियों तथा सतत विकास के रोडमैप पर विस्तृत चर्चा की।

कार्यक्रम का नेतृत्व बीआईएस के सीनियर डायरेक्टर एवं प्रमुख (DLBO-I) आर.आर. सिंह और आईआईए दिल्ली स्टेट की चेयरपर्सन डॉ. ममतामयी प्रियदर्शिनी ने किया। सर्वप्रथम दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद उद्घाटन सत्र में गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को केंद्र में रखा गया।

आर.आर. सिंह ने कहा कि मजबूत गुणवत्ता मानक भारत के औद्योगिक ढांचे को अंतरराष्ट्रीय बाजार में विश्वसनीय बनाते हैं। वहीं, डॉ. आर.के. भारती ने एमएसएमई के लिए सरकारी पहलों और उत्पाद सुरक्षा सुनिश्चित करने में बीआईएस की भूमिका को रेखांकित किया। इसी क्रम में डॉ. ममतामयी प्रियदर्शिनी ने स्पष्ट किया, “जागरूकता से अनुपालन आता है और अनुपालन से प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि एमएसएमई को मानकीकरण को बोझ नहीं, बल्कि दीर्घकालिक विकास की रणनीति के रूप में देखना चाहिए।

इसके उपरांत तकनीकी सत्र आयोजित हुआ। डिप्टी डायरेक्टर सचिन सिंह नरूका ने बीआईएस की प्रमुख गतिविधियों की जानकारी दी, जबकि डिप्टी डायरेक्टर शिवम अग्रवाल ने प्रमाणन प्रक्रिया और नई पहलों को विस्तार से समझाया। साथ ही, एक वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से डिजिटल संसाधनों और हालिया पहलों से प्रतिभागियों को अवगत कराया गया। इस दौरान इंटरैक्टिव सत्र में उद्योग प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए और सुझाव भी दिए।

दूसरे चरण की शुरुआत जल संरक्षण गतिविधि से हुई, जो पर्यावरणीय जिम्मेदारी का प्रतीक रही। इसके बाद “एमएसएमई लिक्विडिटी एंड ग्रोथ इन 2026” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। सीए जितेंद्र कुमार जैन के संचालन में सीए मनीष गुप्ता, सीए एच.के. गुप्ता, डॉ. एल.के. पांडे और डॉ. (प्रो.) साकेत चटोपाध्याय ने “वर्किंग कैपिटल, TReDS प्लेटफॉर्म, ग्रामीण वित्तीय गैप और स्टार्टअप–एमएसएमई सहयोग” जैसे मुद्दों पर व्यावहारिक सुझाव रखे। इस प्रकार चर्चा ने वित्तीय मजबूती और संरचनात्मक सुधार, दोनों पहलुओं को संतुलित रूप से सामने रखा।

इसके अतिरिक्त मैन्युफैक्चरिंग में उत्कृष्टता और वेस्टेज कम करने पर कमल सिंगला का सत्र और उचित बिजनेस व बैंकिंग पार्टनर के चयन पर मधुकर सहाय का मार्गदर्शन भी कार्यक्रम का हिस्सा रहा। वहीं, उद्योग नवाचार पर ऋषभ गुप्ता और अनुप कुमार ने अपने अनुभव साझा किए। अंततः युवा उद्यमी सेल के संयोजक के रूप में ऋषभ अग्रवाल की घोषणा की गई।

कार्यक्रम में बीआईएस अधिकारी राहुल राज और आईआईए के पदाधिकारी नीरज बजाज, मृगेन्द्र कुमार, चरणजीत सिंह, जतिन शर्मा, मनीष चावला, मोहन कुमार निरवान और पंकज पाठक सहित बड़ी संख्या में एमएसएमई प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

बैठक का निष्कर्ष स्पष्ट रहा कि 2026 में एमएसएमई की प्रगति केवल वित्तीय सुधारों पर निर्भर नहीं होगी। बल्कि, इसके लिए मजबूत मानकीकरण, अनुपालन की समझ, पर्यावरणीय प्रतिबद्धता और संस्थागत सहयोग—इन सभी का समन्वय आवश्यक होगा।

समापन सत्र में आईआईए सीईसी सदस्य डॉ. एल.के. पांडे ने सभी वक्ताओं, अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया तथा आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी संस्थानों की भूमिका की सराहना की, जिसके बाद राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम औपचारिक रूप से संपन्न हुआ।

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Bureau NOTD

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