Friday, 14 August 2026
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भारतीय रेलवे में नया प्रयोग, भारत की पहली ‘ब्रांडेड ट्रेन’ बनी Sprite Tejas Express

लखनऊ-नई दिल्ली तेजस एक्सप्रेस को तीन महीने के लिए ‘Sprite Tejas Express’ के रूप में ब्रांड किया गया है। जानिए क्या यह भारत की पहली ब्रांडेड ट्रेन है और इसका मकसद क्या है।

नई दिल्ली/ लखनऊ: भारतीय रेलवे में अब यात्रियों को एक ऐसी ट्रेन का नाम सुनने को मिलेगा, जो किसी रेलवे स्टेशन, शहर या गंतव्य से नहीं, बल्कि एक लोकप्रिय पेय ब्रांड से जुड़ा है। लखनऊ और नई दिल्ली के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस को अब ‘Sprite Tejas Express’ के नाम से ब्रांड किया जा रहा है। यह भारतीय रेलवे में ट्रेन की व्यावसायिक ब्रांडिंग की दिशा में एक अहम कदम है।

यह बदलाव केवल ट्रेन के नाम तक सीमित नहीं है। रेलवे और भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम यानी आईआरसीटीसी (IRCTC) ने ट्रेन की बाहरी और आंतरिक ब्रांडिंग के व्यावसायिक अधिकार पेय ब्रांड Sprite को दिए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस ब्रांडिंग के तहत लखनऊ-नई दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस के नाम और घोषणाओं में भी Sprite ब्रांड का इस्तेमाल किया जाएगा।

क्या है Sprite Tejas Express का पूरा मामला?

लखनऊ और नई दिल्ली के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस को भारत की आधुनिक और प्रीमियम ट्रेन सेवाओं में गिना जाता है। अब इसी ट्रेन को एक निश्चित अवधि के लिए Sprite ब्रांड के साथ जोड़ा गया है।

गुरुवार, 13 अगस्त को सामने आई जानकारी के मुताबिक, आईआरसीटीसी ने लखनऊ-नई दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस की ट्रेन ब्रांडिंग के विज्ञापन अधिकार Sprite को दिए हैं। इसके बाद रेलवे के संबंधित अधिकारियों को ट्रेन संख्या 82501/82502 को स्टेशन और रास्ते के कुछ स्थानों पर ‘Sprite Tejas Express’ के रूप में घोषित करने के लिए कहा गया। यह सेवा आधिकारिक तौर पर 19 अगस्त, 2026 से शुरु होगी।

यह इसलिए खास है क्योंकि भारत में ट्रेनों पर विज्ञापन और ब्रांडिंग पहले भी देखने को मिली है, लेकिन किसी निर्धारित ट्रेन के नाम के साथ किसी कॉरपोरेट ब्रांड को इस तरह जोड़ना एक नया प्रयोग है।

यानी अब यह केवल ‘लखनऊ-नई दिल्ली तेजस एक्सप्रेस’ नहीं रहेगी, बल्कि व्यावसायिक ब्रांडिंग अवधि के दौरान यात्रियों को ‘Sprite Tejas Express’ नाम सुनने को मिलेगा।

क्या यह भारत की पहली निजी ट्रेन है?

यहीं सबसे ज्यादा भ्रम पैदा हो रहा है। कई जगह इसे ‘भारत की पहली निजी ट्रेन’ या ‘प्राइवेट ट्रेन’ कहा जा रहा है। लेकिन Sprite के साथ ब्रांडिंग और ट्रेन के निजी संचालन को एक ही चीज मानना सही नहीं है।

तेजस एक्सप्रेस की सेवा आईआरसीटीसी से जुड़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, आईआरसीटीसी भारतीय रेलवे की आधारभूत संरचना का इस्तेमाल करता है और उसके लिए रेलवे को हॉलिंग चार्ज यानी ट्रेन संचालन से जुड़े शुल्क का भुगतान करता है।

इसलिए Sprite का जुड़ना मुख्य रूप से कमर्शियल ब्रांडिंग और विज्ञापन मॉडल से संबंधित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि Sprite ट्रेन के परिचालन, ट्रैक, सुरक्षा या रेलवे स्टेशनों का नियंत्रण अपने हाथ में ले रहा है।

आखिर ट्रेन का नाम Sprite क्यों रखा गया?

इसके पीछे मुख्य वजह रेलवे की नॉन-फेयर रेवेन्यू यानी किराए के अलावा अतिरिक्त आय बढ़ाने की कोशिश है। रेलवे के लिए यात्रियों से मिलने वाला किराया आय का प्रमुख स्रोत है, लेकिन रेलवे के पास अपनी संपत्तियों और सेवाओं से अतिरिक्त कमाई के कई दूसरे रास्ते भी हैं। विज्ञापन, ब्रांडिंग और व्यावसायिक अधिकार इसी मॉडल का हिस्सा हैं।

ट्रेन के कोच, स्टेशन परिसर, डिजिटल स्क्रीन और अन्य रेलवे परिसंपत्तियों पर विज्ञापन के जरिए कंपनियां बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकती हैं। ट्रेन ब्रांडिंग इसी सोच का विस्तार है। यदि किसी ब्रांड को पूरी ट्रेन के साथ जोड़ दिया जाए, तो उसे केवल किसी एक विज्ञापन बोर्ड या पोस्टर की तुलना में कहीं ज्यादा व्यापक दृश्यता मिल सकती है।

Sprite के लिए भी यह ब्रांडिंग रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों और रेलवे नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पहुंच बनाने का माध्यम बन सकती है।

कितने समय तक चलेगी Sprite की ब्रांडिंग?

रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ-नई दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस की ट्रेन ब्रांडिंग के अधिकार Sprite को तीन महीने के लिए दिए गए हैं। यह स्थायी नाम परिवर्तन नहीं है। ब्रांडिंग की अवधि समाप्त होने के बाद ट्रेन का व्यावसायिक नाम सामान्य रूप में वापस जा सकता है, जब तक कि रेलवे या आईआरसीटीसी किसी नए समझौते के तहत आगे की व्यवस्था न करे।

कितनी खास है लखनऊ-नई दिल्ली तेजस एक्सप्रेस?

लखनऊ-नई दिल्ली तेजस एक्सप्रेस को 2019 में शुरू किया गया था। यह पूरी तरह वातानुकूलित ट्रेन है और आधुनिक यात्री सुविधाओं के लिए जानी जाती है।

यह लगभग 512 किलोमीटर की दूरी तय करती है और सामान्य तौर पर यात्रा में करीब 6 घंटे 15 मिनट लगते हैं। ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलती है। इसमें एसी चेयर कार और एग्जीक्यूटिव चेयर कार जैसी श्रेणियां उपलब्ध हैं।

तेजस एक्सप्रेस को शुरू से ही सामान्य ट्रेनों की तुलना में बेहतर यात्री अनुभव देने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया था। इसमें आधुनिक कोच, स्वचालित दरवाजे, ऑन-बोर्ड खानपान और मनोरंजन जैसी सुविधाएं शामिल रही हैं।

यात्रियों पर असर

फिलहाल, Sprite की ब्रांडिंग से ट्रेन की मूल यात्रा सुविधाओं में कोई बड़ा बदलाव होने की जानकारी सामने नहीं आई है। यानी यात्रियों के लिए ट्रेन का मुख्य उद्देश्य लखनऊ और नई दिल्ली के बीच तेज और आरामदायक एसी रेल यात्रा होगा।

ट्रेन में आधुनिक सुविधाओं के साथ खानपान और मनोरंजन सेवाएं उपलब्ध हैं। आईआरसीटीसी के मुताबिक इसमें यात्रियों के लिए ऑन-बोर्ड फूड और बेवरेज तथा इंफोटेनमेंट सेवाओं की व्यवस्था है।

इसके अलावा समूह में यात्रा करने वाले लोगों के लिए एक पूरा एसी चेयर कार कोच बुक करने की सुविधा भी उपलब्ध है। इसमें एक कोच में 78 सीटें होती हैं। यह सुविधा कॉरपोरेट मीटिंग, शादी या अन्य सामूहिक यात्रा के लिए उपयोगी हो सकती है।

स्टेशन पर भी सुनाई देगा ‘Sprite Tejas Express’

इस पूरे प्रयोग का सबसे दिलचस्प हिस्सा सिर्फ ट्रेन पर लगाया गया विज्ञापन नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित स्टेशनों पर ट्रेन की घोषणा भी ‘Sprite Tejas Express’ के नाम से की जाएगी। यानी ब्रांड का नाम ट्रेन की पहचान का हिस्सा बनकर यात्रियों के सामने आएगा।

यही बात इसे सामान्य ट्रेन विज्ञापन से अलग बनाती है। अगर किसी कोच पर किसी कंपनी का विज्ञापन लगा हो, तो वह सिर्फ विज्ञापन माना जाता है। लेकिन जब ट्रेन की सार्वजनिक घोषणा में भी ब्रांड का नाम शामिल हो जाए, तो ब्रांड को ट्रेन की पहचान के साथ जोड़ दिया जाता है।

रेलवे के लिए क्या है फायदा?

इस प्रयोग का सबसे बड़ा संभावित फायदा अतिरिक्त कमाई है। भारतीय रेलवे के पास देश का विशाल रेल नेटवर्क, हजारों स्टेशन और करोड़ों यात्रियों का आधार है। ऐसे में रेलवे परिसंपत्तियों की व्यावसायिक क्षमता काफी बड़ी है।

ट्रेन ब्रांडिंग के जरिए रेलवे और आईआरसीटीसी यात्री किराए के अलावा अतिरिक्त राजस्व हासिल कर सकते हैं। इससे रेलवे को अपनी व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार करने का अवसर मिलेगा।

दूसरा फायदा यह है कि इससे रेलवे को नए तरह के विज्ञापन मॉडल आजमाने का अनुभव मिलेगा। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में दूसरी प्रीमियम ट्रेनों के लिए भी इसी तरह के ब्रांडिंग अधिकार दिए जाने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।

कंपनियों के लिए आकर्षक मॉडल

किसी ट्रेन के साथ ब्रांड जोड़ना कंपनियों के लिए काफी प्रभावी विज्ञापन माध्यम हो सकता है। एक ट्रेन लगातार अलग-अलग शहरों और स्टेशनों से गुजरती है। उसके कोच पर मौजूद ब्रांडिंग यात्रियों के अलावा स्टेशन पर मौजूद लोगों और रेलवे से जुड़े डिजिटल माध्यमों तक भी पहुंच सकती है।

Sprite जैसी बड़ी उपभोक्ता ब्रांड के लिए यह खास तौर पर उपयोगी हो सकता है क्योंकि उसका कारोबार बड़े पैमाने पर आम उपभोक्ताओं से जुड़ा है। ट्रेन के नाम के साथ ब्रांड का जुड़ना सामान्य विज्ञापन की तुलना में ब्रांड रिकॉल को मजबूत कर सकता है।

इस मॉडल के नुकसान क्या हो सकते हैं?

जहां इस कदम के आर्थिक फायदे हैं, वहीं इसके कुछ सवाल और संभावित नुकसान भी हैं।

1. ट्रेन की पहचान पर ब्रांड का असर

रेलवे की ट्रेनें लंबे समय से अपनी पारंपरिक पहचान और नामों के लिए जानी जाती हैं। अगर बड़ी संख्या में ट्रेनों के नाम कॉरपोरेट ब्रांड से जुड़ने लगें, तो रेलवे की पारंपरिक पहचान कमजोर होने की चिंता उठ सकती है।

आज Sprite Tejas Express है, लेकिन सवाल यह है कि भविष्य में क्या दूसरी ट्रेनों के नाम भी अलग-अलग कंपनियों के नाम पर रखे जाएंगे?

2. विज्ञापन और यात्री अनुभव के बीच संतुलन

यदि ट्रेन के बाहरी हिस्से, अंदरूनी हिस्से और घोषणाओं में ब्रांडिंग बहुत ज्यादा बढ़ती है, तो यात्रियों को यह विज्ञापन से भरा अनुभव लग सकता है।

प्रीमियम ट्रेन के यात्रियों की उम्मीद केवल आधुनिक ब्रांडिंग नहीं, बल्कि साफ-सफाई, समय की पाबंदी, अच्छा खाना, आराम और सुविधाओं के सही तरीके से काम करने की भी होती है।

इसलिए ब्रांडिंग से मिलने वाली कमाई का बड़ा सवाल यही रहेगा कि क्या इसका कोई फायदा यात्री सुविधाओं में भी दिखाई देता है।

3. ‘निजी ट्रेन’ को लेकर भ्रम

‘Sprite Tejas Express’ को ‘प्राइवेट ट्रेन’ कहे जाने से यात्रियों के बीच भ्रम पैदा हो सकता है।

जैसा कि रिपोर्टों में स्पष्ट किया गया है, ब्रांडिंग अधिकार निजी कंपनी को देना और ट्रेन का पूरा परिचालन किसी निजी कंपनी को सौंपना अलग-अलग बातें हैं।

इसलिए इस मॉडल को ‘ब्रांडेड ट्रेन’ या ‘व्यावसायिक रूप से ब्रांड की गई ट्रेन’ के रूप में समझना ज्यादा सही होगा।

टिकट की महंगाई पर कितना असर

फिलहाल ऐसी कोई विश्वसनीय जानकारी सामने नहीं आई है कि केवल Sprite ब्रांडिंग के कारण तेजस एक्सप्रेस के किराए में बढ़ोतरी की गई है। ट्रेन की ब्रांडिंग एक अलग व्यावसायिक समझौते से जुड़ी है। इसलिए यात्रियों को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि टिकट की कीमत सीधे ब्रांडिंग की वजह से बढ़ेगी।

हालांकि, तेजस एक्सप्रेस की टिकट कीमतें पहले से ही कई सामान्य ट्रेनों की तुलना में अधिक हो सकती हैं क्योंकि यह प्रीमियम एसी सेवा है।

क्या यह भारतीय रेलवे के निजीकरण की शुरुआत है?

यह सवाल भी इस कदम के बाद उठना स्वाभाविक है। लेकिन Sprite की ब्रांडिंग को सीधे रेलवे के निजीकरण से जोड़ना उचित नहीं होगा। यह फिलहाल रेलवे की व्यावसायिक परिसंपत्तियों से अतिरिक्त राजस्व जुटाने का मॉडल दिखाई देता है।

ट्रैक, स्टेशन और रेलवे का बुनियादी ढांचा अभी भी भारतीय रेलवे के नियंत्रण में है। वहीं आईआरसीटीसी ट्रेन के संचालन से जुड़ा है और रेलवे के बुनियादी ढांचे के इस्तेमाल के लिए शुल्क देता है। इसलिए इसे रेलवे के पूर्ण निजीकरण के बजाय कमर्शियलाइजेशन और ब्रांडिंग मॉडल के रूप में देखना ज्यादा सटीक होगा।

ये भी पढ़ें :- मुजफ्फरनगर दंगा केस में 25 बीजेपी नेताओं और हिंदू कार्यकर्ताओं को बड़ी राहत, कोर्ट ने मुकदमा वापस लेने की दी मंजूरी

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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