Thursday, 22 October 2026
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असम के चाय बागान में PM MODI का अनोखा अंदाज़, कर्मियों के साथ बिताए यादगार पल

डिब्रूगढ़ के चाय बागान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अलग ही रूप देखने को मिला, उन्होंने यहां मजदूरों से मुलाकात की, इस पूरे दौरे ने स्थानीय लोगों के बीच खास उत्साह पैदा कर दिया

नई दिल्ली: असम विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डिब्रूगढ़ दौरा सुर्खियों में बना हुआ है। आम तौर पर राजनीतिक कार्यक्रमों में मंच से भाषण देने वाले प्रधानमंत्री इस बार सीधे चाय बागान में पहुंचे और वहां काम कर रहे लोगों के बीच समय बिताया। उनका यह सादा और सहज अंदाज़ लोगों को काफी पसंद आया।

डिब्रूगढ़ को असम की चाय नगरी भी कहा जाता है। यहां के चाय बागान अपनी बेहतरीन गुणवत्ता के लिए देश-विदेश में मशहूर हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री का यहां आना और बागान में जाकर श्रमिकों से मिलना सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि एक जुड़ाव का संकेत माना जा रहा है।

चाय बागान में बिताया समय

अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पारंपरिक तरीके से चाय की पत्तियां तोड़ते नजर आए। उन्होंने बागान के श्रमिकों से बातचीत की और उनके कामकाज के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने यह भी समझने की कोशिश की कि चाय उत्पादन की प्रक्रिया में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

प्रधानमंत्री का यह अंदाज़ काफी सहज और जमीन से जुड़ा हुआ दिखा। उन्होंने मजदूरों के साथ हंसी-मजाक किया और उनके साथ फोटो खिंचवाई। कई श्रमिकों ने बताया कि उनके लिए यह पल बेहद खास था, क्योंकि उन्होंने पहली बार किसी प्रधानमंत्री को इतने करीब से देखा और बातचीत की।

“असम की आत्मा है चाय”

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने चाय को असम की पहचान और आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि असम की चाय न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती है, बल्कि यहां के लाखों लोगों की आजीविका का भी आधार है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चाय उद्योग को और मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, ताकि बागान में काम करने वाले लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सके। चाय उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों के कल्याण के लिए कई योजनाएं भी चलाई जा रही हैं।

चुनाव से पहले दौरे के राजनीतिक मायने

प्रधानमंत्री का यह दौरा ऐसे समय पर हुआ है, जब असम में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में इस दौरे को राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिक असम की राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं और उनका वोट किसी भी पार्टी के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री का इस तरह सीधे श्रमिकों से जुड़ना और उनके बीच जाकर समय बिताना एक मजबूत संदेश देने की कोशिश है। इससे यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि सरकार जमीनी स्तर पर लोगों के साथ खड़ी है और उनकी समस्याओं को समझती है।

लोगों में दिखा उत्साह और अपनापन

प्रधानमंत्री के इस दौरे के दौरान स्थानीय लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग उन्हें देखने और उनका स्वागत करने के लिए पहुंचे। चाय बागान के मजदूरों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी।

सोशल मीडिया पर भी प्रधानमंत्री की चाय बागान वाली तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग उनके इस अंदाज़ की तारीफ कर रहे हैं और इसे एक सकारात्मक पहल के रूप में देख रहे हैं।

चाय उद्योग के लिए उम्मीदें

असम का चाय उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यहां लाखों लोग सीधे और परोक्ष रूप से इस उद्योग से जुड़े हुए हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री का यह दौरा उद्योग से जुड़े लोगों के लिए नई उम्मीदें लेकर आया है।

चाय बागान के श्रमिकों को उम्मीद है कि उनके काम की स्थिति, वेतन और सुविधाओं में सुधार होगा। वहीं, उद्योग से जुड़े अन्य लोग भी चाहते हैं कि सरकार चाय के निर्यात और गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए और कदम उठाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव का उदाहरण भी बन गया है। चाय की पत्तियां तोड़ते और मजदूरों के साथ समय बिताते हुए उनका यह सरल रूप लोगों के दिलों को छू गया है।

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BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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