पूर्व सैनिकों को रोजगार देने की सोच के साथ आर.के. सिन्हा ने 1974 में SIS ग्रुप की स्थापना की थी। युद्ध संवाददाता के रूप में सेना के जवानों और पूर्व सैनिकों से मिले अनुभवों ने उन्हें निजी सुरक्षा सेवाओं का कारोबार शुरू करने की प्रेरणा दी।
नई दिल्ली/पटना: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व राज्यसभा सांसद और देश की प्रमुख निजी सुरक्षा कंपनियों में शामिल सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) ग्रुप के संस्थापक डॉ. रविंद्र किशोर सिन्हा का निधन हो गया है। आरके सिन्हा के नाम से पहचाने जाने वाले 75 वर्षीय सिन्हा ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को नोएडा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से बिहार के राजनीतिक और कारोबारी जगत में शोक की लहर है।
सिन्हा का जीवन पत्रकारिता, राजनीति, उद्यमिता और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ा रहा। उन्होंने 1974 में SIS ग्रुप की स्थापना की थी और इसे निजी सुरक्षा तथा मैनपावर सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़े कारोबारी समूह के रूप में विकसित किया। राजनीति में वह भारतीय जनता पार्टी से लंबे समय तक जुड़े रहे और बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा सांसद रहे। उनके पार्थिव शरीर को पटना लाए जाने की तैयारी की जा रही है, जहां लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सकेंगे।
पत्रकारिता से राजनीति और कारोबार तक का सफर
आरके सिन्हा का जन्म 22 सितंबर 1951 को बिहार के बक्सर में हुआ था। उनका पूरा नाम रविंद्र किशोर सिन्हा था। उन्होंने राजनीति विज्ञान और कानून की पढ़ाई की थी। सार्वजनिक जीवन में आने से पहले उन्होंने पत्रकार के रूप में अपना करियर शुरू किया। अपराध और राजनीतिक मामलों की रिपोर्टिंग में उनकी विशेष रुचि थी। पत्रकारिता के शुरुआती दौर में वह पटना से प्रकाशित अखबारों ‘द सर्चलाइट’ और ‘प्रदीप’ से जुड़े रहे।
सिन्हा के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध भी रहा। उस समय वह युद्ध संवाददाता के रूप में रिपोर्टिंग कर रहे थे। इस दौरान उनकी मुलाकात सेना के कई जवानों और पूर्व सैनिकों से हुई। उनके अनुभवों ने सिन्हा को पूर्व सैनिकों के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित किया। आगे चलकर इसी विचार ने उन्हें निजी सुरक्षा सेवाओं के कारोबार की स्थापना की ओर बढ़ाया।
पत्रकारिता के दौरान ही सिन्हा बिहार में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलन से भी प्रभावित हुए। वर्ष 1974-75 के आंदोलन को उन्होंने करीब से देखा और उस पर अध्ययन किया। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने जन आंदोलन नाम की पुस्तक लिखी। इस पुस्तक में बिहार के छात्र आंदोलन और जेपी के नेतृत्व में चले राजनीतिक-सामाजिक बदलावों का उल्लेख किया गया है।
1974 में SIS ग्रुप की नींव रखी
आरके सिन्हा के जीवन का सबसे अहम पहलू SIS ग्रुप की स्थापना और उसका विस्तार रहा। वर्ष 1974 में उन्होंने सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड यानी SIS की शुरुआत की। इसका उद्देश्य निजी सुरक्षा सेवाओं के क्षेत्र में काम करने के साथ-साथ सेना से सेवानिवृत्त हुए जवानों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना था। कंपनी की शुरुआत बेहद सीमित संसाधनों के साथ हुई थी। शुरुआती दिनों में एक छोटे कार्यालय और कुछ पूर्व सैनिकों के साथ उन्होंने इस कारोबार को आगे बढ़ाया।
सिन्हा का मानना था कि सेना में काम कर चुके लोगों के पास सुरक्षा, अनुशासन और जिम्मेदारी निभाने का अनुभव होता है। सेवानिवृत्ति के बाद इस अनुभव का इस्तेमाल नागरिक और औद्योगिक क्षेत्रों में किया जा सकता है। इसी सोच के साथ SIS ने निजी सुरक्षा सेवाओं के क्षेत्र में काम शुरू किया।
समय के साथ SIS का कारोबार निजी सुरक्षा से आगे बढ़कर मैनपावर और बिजनेस सपोर्ट सेवाओं तक पहुंचा। कंपनी ने भारत के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी उपस्थिति बनाई। वर्ष 2008 में SIS ने ऑस्ट्रेलिया की सुरक्षा कंपनी चब सिक्योरिटी के अधिग्रहण की दिशा में बड़ा कदम उठाया। इस सौदे को भारतीय निजी सुरक्षा उद्योग के अंतरराष्ट्रीय विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया। इससे SIS को ऑस्ट्रेलिया के बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिला।
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राजनीति में सक्रियता
कारोबार के साथ-साथ आरके सिन्हा का राजनीतिक सफर भी काफी पुराना रहा। वह भारतीय जनता पार्टी के शुरुआती दौर से जुड़े नेताओं में शामिल थे। उनकी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 1966 में पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने उन्हें भारतीय जनसंघ में शामिल कराया था। बाद में जनसंघ से भाजपा तक के संगठनात्मक सफर में वह सक्रिय रहे।
सिन्हा ने पार्टी के बिहार प्रदेश संगठन के साथ-साथ केंद्रीय स्तर पर भी अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं। वह भाजपा के उन नेताओं में गिने जाते थे, जिनका संगठन से जुड़ाव लंबे समय तक बना रहा। बिहार की राजनीति में उनकी पहचान केवल एक कारोबारी या पूर्व सांसद के रूप में नहीं, बल्कि पार्टी के पुराने कार्यकर्ता और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े नेता के तौर पर भी थी।
वर्ष 2014 में भाजपा ने उन्हें बिहार से राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया। वह उच्च सदन के लिए निर्वाचित हुए और 10 अप्रैल 2014 से 9 अप्रैल 2020 तक राज्यसभा सांसद रहे। इस दौरान वह गृह मामलों और विदेश मामलों से जुड़ी स्थायी समितियों सहित कई संसदीय समितियों के सदस्य रहे। इसके अलावा श्रम एवं रोजगार से संबंधित परामर्श समितियों में भी उनकी भागीदारी रही।
राज्यसभा में उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद भी वह सार्वजनिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे। पार्टी के कार्यक्रमों और बिहार से जुड़े मामलों में उनकी मौजूदगी बनी रही। उनका राजनीतिक जीवन जनसंघ के दौर से शुरू होकर भाजपा के संगठनात्मक विस्तार और संसद तक पहुंचा।
सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों में रुचि
आरके सिन्हा का सार्वजनिक जीवन केवल राजनीति और कारोबार तक सीमित नहीं था। वह शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक कल्याण से जुड़ी कई गतिविधियों में भी सक्रिय रहे।
SIS ग्रुप की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उनके नेतृत्व में समूह और उससे जुड़ी सामाजिक संस्थाओं ने युवाओं के कौशल विकास तथा रोजगार सृजन पर काम किया। कंपनी का दावा है कि इन पहलों के माध्यम से दो लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया गया और वंचित वर्गों के एक लाख से अधिक लोगों को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने में मदद मिली।
शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने संस्थागत पहल की। वह देहरादून-मसूरी क्षेत्र में इंडियन पब्लिक स्कूल के संस्थापक अध्यक्ष थे। इसके अलावा वह इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटी एंड सेफ्टी मैनेजमेंट से भी जुड़े रहे। निजी सुरक्षा क्षेत्र में प्रशिक्षण और पेशेवर मानकों को विकसित करने की दिशा में उनकी भूमिका रही। वह सेंट्रल एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री और सिक्योरिटी स्किल्स काउंसिल ऑफ इंडिया जैसी संस्थाओं की स्थापना से भी जुड़े थे।
सामाजिक क्षेत्र में सिन्हा अवसर ट्रस्ट, पतंजलि योगपीठ और वात्सल्य ग्राम जैसी संस्थाओं से जुड़े रहे। वह अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के अध्यक्ष भी रहे।
भाजपा ने दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि
आरके सिन्हा के निधन पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। बिहार भाजपा के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जारी संदेश में उन्हें पार्टी का वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद बताते हुए उनके निधन को भाजपा परिवार के लिए अपूरणीय क्षति माना गया। पार्टी ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी आरके सिन्हा के निधन पर दुख जताया। उन्होंने अपने संदेश में सिन्हा को जनसंघ और भाजपा का वरिष्ठ नेता बताया। सम्राट चौधरी ने कहा कि पत्रकारिता, सामाजिक सेवा और संगठन के क्षेत्र में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। उनके अनुसार, सिन्हा का निधन राजनीतिक और सामाजिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
वहीं, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि आरके सिन्हा जनसंघ से लेकर भाजपा तक संगठन की विचारधारा और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित रहे। धर्मेंद्र प्रधान ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की।
पटना लाया जाएगा पार्थिव शरीर
आरके सिन्हा का निधन नोएडा स्थित उनके आवास पर हुआ। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए पटना लाए जाने की जानकारी दी गई है। पटना के पाटलिपुत्र स्थित अन्नपूर्णा भवन में लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पार्थिव शरीर के पटना पहुंचने का समय और अंतिम संस्कार की तारीख व समय घोषित नहीं किए गए हैं। परिवार की ओर से आगे की जानकारी साझा किए जाने की बात कही गई है।
आरके सिन्हा का जीवन कई क्षेत्रों में फैले लंबे सफर की कहानी रहा। उन्होंने पत्रकार के रूप में सामाजिक और राजनीतिक घटनाओं को करीब से देखा, युद्ध संवाददाता के तौर पर काम किया, पूर्व सैनिकों के रोजगार के उद्देश्य से एक कंपनी शुरू की और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। इसके साथ ही जनसंघ और भाजपा से जुड़कर राजनीति में सक्रिय रहे तथा बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा पहुंचे।
उनके निधन पर श्रद्धांजलि देते हुए उनके सार्वजनिक जीवन के इन अलग-अलग पहलुओं को याद किया जा रहा है। पत्रकारिता, उद्यमिता, राजनीति और सामाजिक कार्यों में उनकी भूमिका ने उन्हें बिहार के सार्वजनिक जीवन में एक अलग पहचान दी। SIS ग्रुप की स्थापना और उसके विस्तार के साथ-साथ शिक्षा और रोजगार से जुड़ी पहलों को भी उनके योगदान के रूप में याद किया जाएगा।


