रक्सौल में आरपीएफ ने मानव तस्करी के जाल को किया फेल, चार नाबालिग लड़कियों बचाईं

13 मई 2025 को मिली गुप्त रिपोर्ट के आधार पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने रक्सौल रेलवे स्टेशन पर सघन जांच शुरू की। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), चाइल्डलाइन रक्सौल और एनजीओ “प्रयास किशोर सहायता केंद्र” के साथ मिलकर चलाए गए इस अभियान में जल्द ही मानव तस्करी का सबूत हाथ लगा।

ट्रेन से बचाई गई चार लड़कियां

रक्सौल–आनंद विहार सत्याग्रह एक्सप्रेस (15273 नंबर) में सफर कर रही चार नेपाली नाबालिग (उम्र 13–17 वर्ष) लड़कियों को तस्करों ने नौकरी दिलाने और गोरखपुर में “लापता रिश्तेदार” खोजने के झांसे में फँसाया था। संयुक्त टीम ने ऑपरेशन “आहट” के तहत इन्हें सुरक्षित बाहर निकाला और एक तस्कर को गिरफ्तार कर लिया।

कानूनी कार्यवाही व कल्याण की जिम्मेदारी

बचाई गई लड़कियों को तत्काल बाल कल्याण अधिकारियों के हवाले कर दिया गया। जीआरपी रक्सौल में उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता, किशोर न्याय (बाल देखभाल व संरक्षण) अधिनियम व बाल एवं किशोर श्रम (निषेध व विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

ऑपरेशन “आहट” की उपलब्धियां

2024–25 में आरपीएफ के तहत चल रहे इस राष्ट्रव्यापी अभियान ने अब तक 929 पीड़ितों को बचाया, जिनमें 874 बच्चे (50 लड़कियां, 824 किशोर) शामिल हैं, और 274 तस्करों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

भविष्य की रणनीति: जागरूकता एवं साझेदारी

आरपीएफ महानिदेशक मनोज यादव ने यात्रियों से सचेत रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना हेल्पलाइन 139 पर देने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि अब रेलवे के हर बड़े स्टेशन पर मानव तस्करी निरोधी इकाइयां सक्रिय हैं और राष्ट्रीय महिला आयोग के साथ समझौते से पीड़ितों को मिलने वाली सहायता और भी अधिक प्रभावी हो गई है।

इस तरह आरपीएफ सतत् निगरानी, सामुदायिक भागीदारी व अंतर—एजेंसी समन्वय से रेलवे परिसरों को मानव तस्करी के गुंजाइश से मुक्त रखकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।

ये भी पढ़ें :- तुर्की में डॉ. के.ए. पॉल की अपील – “युद्ध और हथियार व्यापार तुरंत रोका जाए”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *