Thursday, 22 October 2026
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51 शहर, 6,000 किमी और 100 दिन: राजघाट पर संपन्न हुई प्रो. सोलंकी की क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा

प्रो. चेतन सोलंकी की 100 दिवसीय क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा राजघाट पर संपन्न हुई। अभियान के दौरान 51 शहरों में जलवायु संरक्षण और जिम्मेदार खपत का संदेश दिया गया

नई दिल्ली: प्रो. चेतन सिंह सोलंकी की 100 दिवसीय क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा गुरुवार को नई दिल्ली के राजघाट पर संपन्न हुई। यह वही स्थान है जहां से उन्होंने 13 मई 2026 को यात्रा की शुरुआत की थी। 100 दिनों तक देश के विभिन्न हिस्सों में जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संरक्षण और टिकाऊ जीवनशैली का संदेश देने के बाद प्रो. सोलंकी राजघाट लौटे और अभियान के इस चरण का समापन किया। इससे पहले उन्होंने गांधी स्मृति पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

51 शहरों में करीब 6,000 किलोमीटर की यात्रा

क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा के दौरान प्रो. सोलंकी ने करीब 6,000 किलोमीटर की दूरी तय की और 51 शहरों में लोगों से संवाद किया। इस दौरान 130 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संरक्षण, जिम्मेदार उपभोग और टिकाऊ जीवनशैली जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

अभियान के अनुसार, इन कार्यक्रमों के माध्यम से 14,000 से अधिक लोगों से सीधे संवाद किया गया। यात्रा के लिए विशेष रूप से तैयार सौर ऊर्जा से संचालित बस का इस्तेमाल किया गया। यही बस इस पूरे अभियान के दौरान प्रो. सोलंकी का घर भी रही।

‘जागरूकता बढ़ी, लेकिन कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होनी चाहिए’

यात्रा के समापन पर प्रो. सोलंकी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन को लेकर समाज में जागरूकता पहले की तुलना में बढ़ी है, लेकिन समस्या की गंभीरता और उससे निपटने के लिए जरूरी कदमों को लेकर अभी और स्पष्टता की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि केवल यह समझना पर्याप्त नहीं है कि जलवायु परिवर्तन हो रहा है। यह भी तय करना जरूरी है कि जलवायु कार्रवाई कब शुरू हो और कितनी तेजी से आगे बढ़े।

‘पृथ्वी सीमित है तो हमारी जरूरतें भी सीमित होनी चाहिए’

प्रो. सोलंकी ने जलवायु संकट और बढ़ती खपत के बीच संबंध पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “विज्ञान बढ़ सकता है, तकनीक बढ़ सकती है और अर्थव्यवस्था बढ़ सकती है, लेकिन पृथ्वी का आकार और उसके संसाधन नहीं बढ़ सकते। अगर पृथ्वी सीमित है, तो हमारी जरूरतें भी सीमित होनी चाहिए।”

उनके मुताबिक, जलवायु संकट से निपटने के लिए पेड़ लगाना, सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना, इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना और नई तकनीकों पर काम करना जरूरी है। हालांकि, उन्होंने कहा कि केवल तकनीकी समाधान जलवायु संकट का पूरा समाधान नहीं कर सकते।

जिम्मेदार उपभोग पर दिया जोर

प्रो. सोलंकी ने कहा कि जलवायु कार्रवाई को लोगों की रोजमर्रा की आदतों और उपभोग के तरीके से भी जोड़ना होगा। लगातार बढ़ती जरूरतों और खपत को सीमित करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

इसी संदेश के तहत यात्रा के दौरान लोगों को छोटे लेकिन प्रभावी बदलाव अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। अभियान के अनुसार, 10,000 से अधिक लोगों ने एक साल तक नए कपड़े नहीं खरीदने का संकल्प लिया।

अभियान के अनुमान के मुताबिक, इन संकल्पों से सामूहिक रूप से 20 करोड़ लीटर से अधिक पानी बचाने और करीब 5 लाख किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन को रोकने में मदद मिल सकती है।

यात्रा का अंत नहीं, अगले चरण की शुरुआत

प्रो. सोलंकी ने स्पष्ट किया कि 100 दिवसीय यात्रा का समापन क्लाइमेट सत्याग्रह अभियान का अंत नहीं है। उनके अनुसार, यह अभियान के अगले चरण की शुरुआत है।

उन्होंने कहा, “यात्रा समाप्त हुई है, लेकिन क्लाइमेट सत्याग्रह अब शुरू होता है। पृथ्वी सीमित है, इसलिए हमें अपनी जरूरतों को भी सीमित करना होगा।”

100 दिवसीय यात्रा के दौरान कुमार सचिन, नितिश शर्मा, वीरेंद्र चौहान और प्रकाश ईशावे ने प्रो. सोलंकी के साथ रहकर अभियान को अलग-अलग शहरों और समुदायों तक पहुंचाने में सहयोग किया।

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BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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