Wednesday, 05 August 2026
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दुनिया में सबसे ज्यादा चलते हैं हांगकांग के लोग, क्या सचमुच जरूरी है रोजाना 10,000 कदम?

PureGym Global Survey 2024 की जारी रिपोर्ट के अनुसार हांगकांग दुनिया का सबसे ज्यादा चलने वाला देश है, जबकि इस सूची में भारत काफी पीछे है। क्या 10,000 कदम का लक्ष्य सचमुच वैज्ञानिक है या यह सिर्फ एक लोकप्रिय मिथक? जानिए पूरी सच्चाई।

हांगकांग/ नई दिल्ली: बदलती जीवनशैली, घंटों ऑफिस में बैठकर काम करना, मोबाइल और लैपटॉप पर बढ़ती निर्भरता तथा शारीरिक गतिविधियों में लगातार आ रही कमी अब केवल फिटनेस का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह वैश्विक स्वास्थ्य चिंता बन चुकी है। इसी बीच World of Statistics द्वारा साझा किए गए PureGym Global Survey 2024 के आंकड़ों ने दुनिया के अलग-अलग देशों में लोगों की रोजाना चलने की आदतों की तस्वीर सामने रखी है।

सर्वे के अनुसार, हांगकांग के लोग दुनिया में सबसे ज्यादा पैदल चलते हैं, जबकि भारत इस सूची में काफी पीछे है। भारतीय औसतन प्रतिदिन केवल 4,297 कदम चलते हैं, जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह और दुनिया के कई देशों के औसत से काफी कम है।

यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है जब दुनियाभर में मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का मानना है कि नियमित पैदल चलना इन बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है। हालांकि, हालिया वैज्ञानिक शोध यह भी बताते हैं कि हर व्यक्ति के लिए 10,000 कदम चलना अनिवार्य नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति अपनी उम्र, स्वास्थ्य और जीवनशैली के अनुसार नियमित रूप से सक्रिय रहे।

PureGym Global Survey 2024 क्या है?

PureGym Global Survey 2024 दुनिया के कई देशों में लोगों की फिटनेस आदतों, शारीरिक गतिविधियों और रोजाना चलने वाले औसत कदमों का विश्लेषण करता है। इन आंकड़ों को बाद में World of Statistics ने साझा किया, जिसके बाद यह सूची सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गई।

सर्वे से स्पष्ट होता है कि जिन देशों में लोग अधिक पैदल चलते हैं, वहां दैनिक जीवन में सार्वजनिक परिवहन, पैदल चलने योग्य सड़कें और सक्रिय जीवनशैली की भूमिका महत्वपूर्ण है।

रोजाना सबसे ज्यादा कदम चलने वाले दुनिया के टॉप-10 देश

1. हांगकांग (औसत 6,880 कदम प्रतिदिन)

PureGym Global Survey 2024 के अनुसार हांगकांग दुनिया का सबसे अधिक पैदल चलने वाला क्षेत्र है। यहां सार्वजनिक परिवहन बेहद विकसित है, इसलिए लोग मेट्रो स्टेशनों, बस स्टॉप और दफ्तरों तक पहुंचने के लिए रोजाना काफी पैदल चलते हैं। सीमित जगह, ऊंची आबादी और पैदल यात्रियों के अनुकूल शहरी ढांचा भी लोगों को सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है। यही वजह है कि हांगकांग इस सूची में पहले स्थान पर है।

2. स्वीडन (औसत 6,461 कदम प्रतिदिन)

स्वीडन में स्वस्थ जीवनशैली को दैनिक संस्कृति का हिस्सा माना जाता है। यहां लोग नियमित रूप से पैदल चलना, साइकिल चलाना और बाहरी गतिविधियों में भाग लेना पसंद करते हैं। शहरों में सुरक्षित फुटपाथ, हरित पार्क और वॉकिंग ट्रेल्स लोगों को अधिक चलने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सक्रिय जीवनशैली के कारण स्वीडन इस वैश्विक रैंकिंग में दूसरा स्थान हासिल करने में सफल रहा।

3. पोलैंड (औसत 6,504 कदम प्रतिदिन)

पोलैंड के लोग दैनिक जीवन में पैदल चलने को प्राथमिकता देते हैं। बड़े शहरों में सार्वजनिक परिवहन और पैदल यात्री-अनुकूल सड़कें लोगों की गतिविधियों को बढ़ावा देती हैं। काम, खरीदारी और अन्य छोटे-छोटे कामों के लिए पैदल जाना यहां आम बात है। सरकार भी फिटनेस और सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले अभियानों पर जोर देती है, जिससे लोगों की औसत दैनिक गतिविधि लगातार बेहतर बनी हुई है।

4. डेनमार्क (औसत 6,394 कदम प्रतिदिन)

डेनमार्क दुनिया के सबसे स्वास्थ्य-सचेत देशों में गिना जाता है। यहां लोग पैदल चलने के साथ-साथ साइकिल का भी व्यापक उपयोग करते हैं। शहरों की योजना इस तरह बनाई गई है कि लोग निजी वाहनों पर कम निर्भर रहें। साफ-सुथरा वातावरण, सुरक्षित सड़कें और फिटनेस के प्रति जागरूक समाज लोगों को रोजाना अधिक सक्रिय रहने के लिए प्रेरित करता है, जिससे देश शीर्ष देशों में शामिल है।

5. चीन (औसत 6,189 कदम प्रतिदिन)

चीन में तेजी से शहरीकरण होने के बावजूद बड़ी आबादी अब भी सार्वजनिक परिवहन और पैदल चलने पर निर्भर है। बड़े शहरों में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार लोगों को स्टेशन तक पैदल जाने के लिए प्रेरित करता है। इसके अलावा, सुबह और शाम पार्कों में टहलना तथा सामूहिक व्यायाम करना भी यहां की आम जीवनशैली का हिस्सा है। यही कारण है कि चीन शीर्ष पांच देशों में शामिल है।

6. चेकिया (औसत 6,201 कदम प्रतिदिन)

चेकिया में पैदल चलना दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। प्राग सहित कई शहरों के पुराने इलाके पैदल घूमने के लिए प्रसिद्ध हैं। अच्छी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और पैदल यात्रियों के लिए सुविधाजनक सड़कें लोगों को अधिक चलने के लिए प्रेरित करती हैं। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और सक्रिय जीवनशैली ने चेकिया को इस वैश्विक सूची में प्रमुख स्थान दिलाया है।

7. यूक्रेन (औसत 6,107 कदम प्रतिदिन)

यूक्रेन कठिन परिस्थितियों का सामना करने के बावजूद इस सूची में ऊंचे स्थान पर है। यहां के कई शहरों में लोग रोजमर्रा के कामों के लिए पैदल चलना पसंद करते हैं। सार्वजनिक परिवहन के साथ पैदल यात्रा का संयोजन भी आम है। चुनौतियों के बावजूद लोगों की सक्रिय जीवनशैली और नियमित शारीरिक गतिविधियां देश के औसत दैनिक कदमों को ऊंचा बनाए रखने में मदद करती हैं।

8. जापान (औसत 6,010 कदम प्रतिदिन)

जापान लंबे समय से स्वस्थ और अनुशासित जीवनशैली के लिए जाना जाता है। यहां अधिकतर लोग ट्रेन और मेट्रो का उपयोग करते हैं, जिससे उन्हें रोजाना स्टेशन तक पैदल चलना पड़ता है। इसके अलावा, बुजुर्गों में भी नियमित वॉक करने की आदत काफी आम है। संतुलित खानपान, सक्रिय दिनचर्या और फिटनेस के प्रति जागरूकता जापान को दुनिया के सबसे सक्रिय देशों में शामिल करती है।

9. फिनलैंड (औसत 5,999 कदम प्रतिदिन)

फिनलैंड में प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली लोगों को अधिक सक्रिय रहने के लिए प्रेरित करती है। यहां ट्रैकिंग, वॉकिंग और आउटडोर गतिविधियां बेहद लोकप्रिय हैं। शहरों में पैदल यात्रियों के लिए अच्छी सुविधाएं उपलब्ध हैं और लोग रोजमर्रा के छोटे कार्यों के लिए पैदल चलना पसंद करते हैं। स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन पर विशेष ध्यान देने वाली संस्कृति भी लोगों की सक्रियता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।

10. नॉर्वे (औसत 5,863 कदम प्रतिदिन)

नॉर्वे में सक्रिय और प्रकृति-केंद्रित जीवनशैली को विशेष महत्व दिया जाता है। यहां लोग रोजाना पैदल चलने, पहाड़ी ट्रैकिंग और आउटडोर गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं। सरकार भी नागरिकों को शारीरिक रूप से सक्रिय रहने के लिए प्रोत्साहित करती है। आधुनिक सुविधाओं के बावजूद लोग नियमित वॉक को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए रखते हैं, जिससे नॉर्वे दुनिया के सबसे अधिक चलने वाले देशों की शीर्ष-10 सूची में शामिल है।

क्या है भारत की स्थिति?

भारत का औसत केवल 4,297 कदम प्रतिदिन दर्ज किया गया है। इस आंकड़े को कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता का विषय माना है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, बैठकर काम करने वाली नौकरियां, निजी वाहनों का बढ़ता उपयोग, डिजिटल जीवनशैली और व्यायाम के प्रति जागरूकता की कमी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।

कोविड-19 महामारी के बाद ‘वर्क फ्रॉम होम’ संस्कृति ने भी लोगों की शारीरिक गतिविधि को प्रभावित किया। पहले जहां लोग कार्यालय आने-जाने, सीढ़ियां चढ़ने और अन्य दैनिक गतिविधियों में अधिक चलते थे, वहीं अब कई लोग पूरे दिन घर या ऑफिस में एक ही स्थान पर बैठे रहते हैं।

क्या 10,000 कदम सबके लिए जरूरी हैं?

लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि स्वस्थ रहने के लिए हर व्यक्ति को रोज़ 10,000 कदम चलना चाहिए। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार यह संख्या किसी आधिकारिक चिकित्सा मानक पर आधारित नहीं है। माना जाता है कि 1960 के दशक में जापान में एक पेडोमीटर के प्रचार अभियान के दौरान “10,000 कदम” का विचार लोकप्रिय हुआ और धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फिटनेस लक्ष्य बन गया। आधुनिक शोध बताते हैं कि स्वास्थ्य लाभ केवल 10,000 कदम चलने पर ही निर्भर नहीं करते।

नियमित रूप से 6,000 से 8,000 कदम चलने से भी हृदय स्वास्थ्य, वजन नियंत्रण और समय से पहले मृत्यु के जोखिम को कम करने जैसे महत्वपूर्ण फायदे मिल सकते हैं। नियमितता सबसे अधिक मायने रखती है।

क्या भारत में जागरूकता की कमी है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कम पैदल चलने की वजह केवल व्यस्त दिनचर्या नहीं, बल्कि जागरूकता की कमी भी है। आज भी बड़ी संख्या में लोग मानते हैं कि फिट रहने के लिए सिर्फ जिम जाना जरूरी है, जबकि नियमित पैदल चलना सबसे आसान, सस्ता और प्रभावी व्यायामों में से एक है।

इसके अलावा कई शहरों में सुरक्षित फुटपाथों की कमी, पैदल चलने योग्य सार्वजनिक स्थानों का अभाव, बढ़ता प्रदूषण, भारी ट्रैफिक और लंबे कार्य घंटे भी लोगों को नियमित वॉक करने से रोकते हैं। डिजिटल जीवनशैली और घंटों स्क्रीन के सामने बैठकर काम करने की आदत ने शारीरिक गतिविधियों को और कम कर दिया है।

यही कारण है कि भारत में मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लोग रोजमर्रा की दिनचर्या में पैदल चलने को शामिल करें, तो स्वास्थ्य संबंधी कई गंभीर जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

रोज चलने के फायदे

पैदल चलना सबसे आसान, सस्ता और लगभग हर उम्र के लोगों के लिए सुरक्षित व्यायाम माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित वॉक केवल कैलोरी बर्न करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर के स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर डालती है। यदि कोई व्यक्ति रोजाना पर्याप्त कदम चलता है, तो उसे कई शारीरिक और मानसिक लाभ मिल सकते हैं।

1. हृदय की मजबूती

नियमित पैदल चलने से हृदय की कार्यक्षमता बेहतर होती है। इससे रक्त संचार सुधरता है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने में मदद मिलती है और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। डॉक्टर इसे हार्ट हेल्थ के लिए सबसे प्रभावी शारीरिक गतिविधियों में से एक मानते हैं।

2. डायबिटीज से राहत

चलने से शरीर इंसुलिन का बेहतर उपयोग करता है, जिससे रक्त में शुगर का स्तर नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। यही कारण है कि मधुमेह के मरीजों को नियमित वॉक की सलाह दी जाती है।

3. वजन में नियंत्रण

तेज गति से पैदल चलने पर कैलोरी खर्च होती है। यदि इसे संतुलित आहार के साथ जोड़ा जाए तो वजन नियंत्रित रखने और मोटापे के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

4. मानसिक स्वास्थ्य में सुधार

चलने के दौरान शरीर एंडोर्फिन जैसे ‘फील-गुड’ हार्मोन रिलीज करता है। इससे तनाव कम हो सकता है, मूड बेहतर रहता है और चिंता व अवसाद के लक्षणों में भी राहत मिल सकती है।

कैसे बढ़ाएं अपने स्टेप्स?

दैनिक कदम बढ़ाना कठिन नहीं है, यदि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव किया जाए। उदाहरण के लिए, लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का उपयोग करना, छोटी दूरी के लिए पैदल जाना, फोन पर बात करते समय चलते रहना, भोजन के बाद 10–15 मिनट टहलना और छुट्टी के दिन पार्क या खुले स्थान पर वॉक करना। मोबाइल या स्मार्टवॉच में स्टेप काउंटर का उपयोग भी लोगों को अपने लक्ष्य पर नजर रखने में मदद कर सकता है।

क्या भारत को ‘Walking Culture’ अपनाने की जरूरत है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में अब ‘वॉकिंग कल्चर’ को बढ़ावा देना समय की जरूरत बन गया है। यूरोप और पूर्वी एशिया के कई देशों में लोग रोजमर्रा के छोटे-छोटे कामों के लिए पैदल चलना अपनी जीवनशैली का हिस्सा मानते हैं, जिससे उनकी शारीरिक सक्रियता बनी रहती है।

भारत में भी यदि शहरों को पैदल यात्रियों के अनुकूल बनाया जाए, सुरक्षित फुटपाथ, ग्रीन वॉकिंग ट्रैक और सार्वजनिक पार्कों का विस्तार किया जाए, तो अधिक लोग नियमित रूप से पैदल चलने के लिए प्रेरित होंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल व्यक्तिगत प्रयास ही नहीं, बल्कि बेहतर शहरी योजना और सरकारी नीतियां भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। पैदल चलने की आदत बढ़ने से मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग जैसी जीवनशैली संबंधी बीमारियों का जोखिम कम होगा। साथ ही, निजी वाहनों पर निर्भरता घटने से ट्रैफिक जाम, वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आ सकती है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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