पाटलिपुत्र औद्योगिक क्षेत्र स्थित गोल्डन डेयरी में जांच के दौरान 244 चोको बार और 198 अमर बार समेत 442 आइसक्रीम खराब हालत में मिलीं। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने पर इन्हें मौके पर ही नष्ट करा दिया गया।
पटना: बिहार की राजधानी पटना में खाद्य सुरक्षा विभाग ने आइसक्रीम और डेयरी उत्पादों से जुड़े प्रतिष्ठानों की जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कहीं खराब आइसक्रीम मिली, तो कहीं एक्सपायरी और बिना लेबल वाली खाद्य सामग्री का भंडारण किया जा रहा था।
कुछ जगहों पर साफ-सफाई, उत्पादों की पैकेजिंग और सुरक्षित परिवहन से जुड़े नियमों का पालन भी नहीं किया जा रहा था। विभाग ने कार्रवाई करते हुए सैकड़ों आइसक्रीमें नष्ट कराईं। वहीं, स्नो बॉल आइसक्रीम की निर्माण इकाई से 260 किलोग्राम एक्सपायरी या बिना लेबल वाली सामग्री हटाई गई, जिसकी कीमत 80,720 रुपये बताई गई है।
विभागीय कार्रवाई के दौरान कुम्हरार के एक कोल्ड स्टोरेज में रखा मक्खन भी जब्त किया गया। वहीं, खेमनीचक स्थित सलोनी एंटरप्राइजेज को क्रीम डेयरी आइसक्रीम की बिक्री बंद करने का निर्देश दिया गया।
गोल्डन डेयरी में आइसक्रीम नष्ट
पाटलिपुत्र औद्योगिक क्षेत्र में स्थित गोल्डन डेयरी प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने निरीक्षण किया। इस दौरान फ्रोजन स्टोरेज में साफ-सफाई के मानकों का उचित पालन नहीं होने की बात सामने आई। अधिकारियों ने कृत्रिम मक्खन से जुड़ी कुछ अनियमितताएं भी दर्ज कीं।
जांच के दौरान वहां रखी 244 चोको बार और 198 अमर बार आइसक्रीम की हालत खराब पाई गई। खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरने के कारण सभी 442 आइसक्रीम को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया।
इसके अलावा, रोज व्हाइट आइसक्रीम का नमूना भी एकत्र किया गया, जिसे गुणवत्ता की जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।
विभाग ने गोल्डन डेयरी को सुधार नोटिस जारी किया है। अब आगे की कार्रवाई निरीक्षण में सामने आई कमियों को दूर करने और नमूने की जांच के नतीजों के आधार पर हो सकती है।
260 किलो सामग्री हटाई गई
जांच के दौरान मनेर स्थित अनुज न्यूट्रिटेक प्राइवेट लिमिटेड की निर्माण इकाई में भी खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कमियां सामने आईं। यह इकाई स्नो बॉल ब्रांड की आइसक्रीम बनाती है। अधिकारियों ने यहां कुल 260 किलोग्राम खाद्य सामग्री नष्ट कराई जिसकी अनुमानित कीमत 80,720 रुपये बताई गई है।
नष्ट की गई सामग्री में 100 किलोग्राम बिना लेबल वाला दूध पाउडर, 120 किलोग्राम एक्सपायरी मैंगो पल्प, 20 किलोग्राम एक्सपायरी ड्राइड ब्लैक करंट और 20 किलोग्राम चॉकलेट सब्स्टिट्यूट शामिल था।
रिपोर्ट के मुताबिक, सामग्री को गड्ढे में दबाकर उस पर मिट्टी और राख डालकर नष्ट किया गया। अधिकारियों को निर्माण इकाई में केवल खाद्य सामग्री से जुड़ी ही नहीं, बल्कि संचालन और स्वच्छता संबंधी कमियां भी मिलीं।
निरीक्षण में उत्पादों को ले जाने के लिए उपयुक्त वाहनों से जुड़े दस्तावेजों की कमी सामने आई। इस्तेमाल किए जा रहे पानी की जांच रिपोर्ट, कर्मचारियों के स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र और साफ-सफाई से संबंधित रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं थे।
खाद्य निर्माण इकाइयों में इन व्यवस्थाओं का महत्व इसलिए है, क्योंकि उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कच्चे माल, पानी, उपकरणों, कर्मचारियों और परिवहन की स्वच्छता पर ध्यान देना जरूरी होता है।
मदर डेयरी के स्टॉकिस्ट में भी कमियां
खाद्य सुरक्षा विभाग ने अनीसाबाद स्थित मां भद्रकाली ट्रेडर्स का भी निरीक्षण किया गया। यह मदर डेयरी का आइसक्रीम स्टॉकिस्ट है जहां जांच के दौरान उत्पादों के वितरण और सुरक्षित परिवहन से संबंधित दस्तावेजों में कमियां पाई गईं।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिष्ठान के बिलों पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI का पंजीकरण या लाइसेंस नंबर दर्ज नहीं था। रेफ्रिजरेटेड वाहन से जुड़े जरूरी पंजीकरण विवरण भी उपलब्ध नहीं मिले। इसके अलावा, कर्मचारियों के स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
अधिकारियों ने जांच के लिए फ्रोजन ग्रीन पीज का नमूना भी एकत्र किया। प्रतिष्ठान को कमियां दूर करने के लिए सुधार नोटिस जारी किया गया। पटना इस स्टॉकिस्ट को सुधार के लिए सात दिन का समय दिया गया है।
यह मामला बताता है कि खाद्य सुरक्षा की निगरानी केवल निर्माण इकाइयों तक सीमित नहीं रहती। भंडारण, वितरण और परिवहन के दौरान जरूरी दस्तावेजों का रखरखाव भी महत्वपूर्ण है।
क्रीम डेयरी आइसक्रीम की बिक्री पर रोक
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने खेमनीचक स्थित सलोनी एंटरप्राइजेज का निरीक्षण किया। यहां क्रीम डेयरी आइसक्रीम के पैकेटों पर बैच नंबर और निर्माण तिथि जैसी जरूरी जानकारियां दर्ज नहीं पाई गईं। अधिकारियों ने यह भी पाया कि आइसक्रीम खुले में रखी गई थी और उसके भंडारण के लिए उचित व्यवस्था नहीं थी।
जांच के दौरान परिसर में कीटों से बचाव के पर्याप्त प्रबंध भी नहीं मिले। इसके अलावा, इस्तेमाल किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता से संबंधित जांच रिपोर्ट और उपकरणों की नियमित सफाई का ब्योरा देने वाले दस्तावेज भी अधिकारियों के सामने प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
कर्मचारियों की साफ-सफाई और सुरक्षा से जुड़े नियमों के पालन में भी लापरवाही मिली। जांच के समय कर्मचारी निर्धारित यूनिफॉर्म और सिर ढकने वाले कवर के बिना काम करते पाए गए। वहीं, अधिकारियों को कर्मचारियों के स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र भी उपलब्ध नहीं कराए गए।
इन कमियों को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने प्रतिष्ठान में आइसक्रीम की बिक्री पर रोक लगा दी। यह कार्रवाई खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि बैच नंबर और निर्माण तिथि से किसी उत्पाद की पहचान करने, उसकी निर्माण संबंधी जानकारी पता लगाने और जरूरत पड़ने पर संबंधित खेप को बाजार से हटाने में मदद मिलती है।
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160 किलो मक्खन भी जब्त
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पटना के कुम्हरार इलाके में स्थित पॉपुलर स्नोमैन कोल्ड स्टोरेज का निरीक्षण किया। यह प्रतिष्ठान स्नो बॉल ब्रांड की आइसक्रीम और डेयरी उत्पादों से जुड़ा है। जांच के दौरान अधिकारियों को यहां 160 किलोग्राम मक्खन मिला, जिसके पैकेज पर बैच नंबर दर्ज नहीं था। आवश्यक जानकारी की कमी को देखते हुए विभाग ने पूरा स्टॉक जब्त कर लिया। जब्त मक्खन की अनुमानित कीमत 43,000 रुपये बताई गई है।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने आइसक्रीम के कुछ नमूने भी एकत्र किए और उन्हें खाद्य प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इन नमूनों के परीक्षण का अंतिम परिणाम सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग पर बैच नंबर दर्ज होना महत्वपूर्ण है। इसकी मदद से किसी उत्पाद की खेप की पहचान की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर उसके निर्माण तथा वितरण से जुड़ी जानकारी का पता लगाया जा सकता है। यदि किसी खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर शिकायत मिलती है, तो बैच नंबर संबंधित स्टॉक की पहचान करने और आवश्यक कार्रवाई में मदद करता है। ऐसे में पैकेज पर जरूरी विवरणों का अभाव खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन से जुड़ा एक अहम मुद्दा है।
सुधार नोटिस जारी, लाइसेंस पर भी हो सकती है कार्रवाई
पटना में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच के बाद जिन प्रतिष्ठानों में नियमों से जुड़ी कमियां मिली हैं, उन्हें सुधार के निर्देश दिए गए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित इकाइयों को नोटिस जारी कर स्वच्छता, खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण, उत्पादों की लेबलिंग और जरूरी दस्तावेजों से जुड़ी खामियां दूर करने को कहा गया है। अधिकारियों की निगरानी में यह देखा जाएगा कि प्रतिष्ठान निर्धारित समय के भीतर सुधारात्मक कदम उठाते हैं या नहीं।
खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। परिस्थितियों और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर लाइसेंस निलंबित करने या रद्द करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि, ऐसी कार्रवाई को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित जांच और नियामकीय प्रक्रिया के आधार पर ही लिया जाएगा।
इस मामले में अगला महत्वपूर्ण चरण प्रयोगशाला में भेजे गए खाद्य नमूनों की जांच रिपोर्ट है। इन नतीजों से उत्पादों की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुपालन के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकती है। फिलहाल उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में सभी नमूनों की अंतिम जांच रिपोर्ट का विवरण सामने नहीं आया है। इसी तरह, निरीक्षण के बाद संबंधित प्रतिष्ठानों ने सभी कमियां दूर की हैं या नहीं, इसकी भी पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए आगे की कार्रवाई को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और विभागीय समीक्षा के बाद ही सामने आएगा।
उपभोक्ताओं के लिए जरूरी बातें
पटना में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद आइसक्रीम और अन्य पैकेज्ड खाद्य उत्पाद खरीदते समय सावधानी बरतना जरूरी है। उपभोक्ताओं को सामान खरीदने से पहले पैकेट पर निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और निर्माता का नाम जैसी जानकारियां जांचनी चाहिए। इससे उत्पाद की पहचान करने और उसकी वैधता सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
आइसक्रीम खरीदते समय यह भी देखना चाहिए कि उसे उचित तापमान पर रखा गया है या नहीं। यदि पैकेज खुला हो, सील टूटी हुई हो या उत्पाद पिघलने के बाद दोबारा जमाया हुआ दिखाई दे, तो उसे खरीदने से बचें। पैकेट पर जरूरी विवरण गायब होने या उत्पाद की स्थिति संदिग्ध लगने पर भी सावधानी बरतनी चाहिए।
यदि किसी खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह हो, तो उपभोक्ता उसका बिल और पैकेज संभालकर रख सकते हैं। शिकायत के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के माध्यम से या स्थानीय खाद्य सुरक्षा विभाग से संपर्क किया जा सकता है।
पटना में हुई कार्रवाई ने खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण और वितरण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करने की जरूरत को रेखांकित किया है। विभाग ने खराब आइसक्रीम और एक्सपायरी सामग्री को नष्ट करने के साथ नियमों में कमियां पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कदम उठाए हैं। अब आगे की कार्रवाई निरीक्षण, सुधार और प्रयोगशाला जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी।

