कमीशन में बढ़ोतरी, नए कनेक्शन बहाल करने और परिचालन संबंधी समस्याओं के समाधान की मांग; एसोसिएशन ने सरकार को एक महीने का समय दिया
नई दिल्ली: कमीशन में बढ़ोतरी और लंबित मांगों को पूरा करने की मांग को लेकर सोमवार को दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड में एलपीजी वितरकों ने प्रदर्शन किया। एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (इंडिया) के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 4,000 से अधिक वितरक शामिल हुए। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि एक महीने के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो देशव्यापी हड़ताल की जा सकती है।
प्रदर्शन में एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीएस शर्मा के साथ धनोटिया केके, गुरपाल मान, आशुतोष गर्ग, पीयूष और श्वेता सहित विभिन्न राज्यों के अध्यक्ष और अन्य सदस्य मौजूद रहे।
बीएस शर्मा ने कहा कि वितरक वर्ष 2018 से कमीशन में व्यापक संशोधन की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस दौरान एलपीजी की कीमतों और कारोबार चलाने की लागत में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन कमीशन में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं की गई।
शर्मा ने दावा किया कि घरेलू एलपीजी की कीमत 2018 के बाद लगभग 450 रुपये से बढ़कर 1,000 रुपये तक पहुंच गई, जबकि कमर्शियल एलपीजी की कीमत 1,100 रुपये से बढ़कर 3,033 रुपये हो गई। उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत के बावजूद वितरकों को मिलने वाले कमीशन में समानुपातिक बदलाव नहीं हुआ है।
उन्होंने बताया कि कमीशन की समीक्षा के लिए किए गए अध्ययन के बाद 2022 में अंतरिम राहत दी गई थी, लेकिन व्यापक संशोधन की मांग अब भी लंबित है। शर्मा के मुताबिक, एसोसिएशन पिछले चार वर्षों से इस मुद्दे पर सरकार से बातचीत की मांग कर रही है।
प्रदर्शनकारियों ने 24 मार्च 2026 को जारी उस सरकारी आदेश पर भी आपत्ति जताई, जो पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का बुनियादी ढांचा उपलब्ध होने वाले क्षेत्रों में एलपीजी आपूर्ति बंद करने से संबंधित है। एसोसिएशन का कहना है कि इस नीति से वितरकों के कारोबार और उपभोक्ताओं के पास उपलब्ध विकल्पों पर असर पड़ सकता है।
एसोसिएशन ने ई-केवाईसी सत्यापन पूरा नहीं होने के कारण करीब 3.16 करोड़ एलपीजी कनेक्शन निलंबित किए जाने का दावा भी उठाया। शर्मा ने बायोमेट्रिक सत्यापन की अनिवार्यता पर सवाल किए और सुप्रीम कोर्ट के केएस पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ मामले का हवाला दिया। कनेक्शनों की संख्या और कानूनी आपत्तियों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
वितरकों ने तेल विपणन कंपनियों के अधिकारियों पर उनके कामकाज में हस्तक्षेप करने का आरोप भी लगाया। एसोसिएशन के अनुसार, गैस की मांग से जुड़े इंडेंट में बदलाव होने से आपूर्ति और कारोबार प्रभावित हो सकते हैं। संगठन ने गैस चूल्हे, रबर ट्यूब, लाइटर और एप्रन जैसे उत्पाद बेचने के लिए कथित दबाव का मुद्दा भी उठाया।

बीएस शर्मा ने प्रदर्शन स्थल पर बैरिकेडिंग और सार्वजनिक परिवहन तथा आवागमन पर प्रतिबंधों के कारण कुछ प्रदर्शनकारियों को हुई परेशानियों का भी जिक्र किया।
एसोसिएशन ने सरकार से एक महीने के भीतर कमीशन में संशोधन, एलपीजी कनेक्शन से जुड़ी नीतियों की समीक्षा और परिचालन समस्याओं का समाधान करने की मांग की है। बीएस शर्मा ने कहा कि समयसीमा के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर वितरक देशव्यापी हड़ताल का रास्ता अपना सकते हैं। संगठन ने यह भी कहा कि वह सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार है।




