पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मद्देनजर सरकार और सेना के खिलाफ आवाज उठाने पर पंजाब प्रांत में 11 सोशल मीडिया एक्टिविस्टों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सोशल मीडिया एक्टिविस्टों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। यह मुकदमा उनपर सरकार और सेना के खिलाफ आवाज उठाने पर लगाया गया है। इस गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान समेत दुनिया के सभी देशों में अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर बहस तेज हो गई है।
इंफ्लुएंसर और यूट्यूबर हुए गिरफ्तार
जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर, ऑनलाइन एक्टिविस्ट, यूट्यूबर और कुछ स्वतंत्र पत्रकार भी शामिल हैं। पाकिस्तान की साइबर अपराध जांच एजेंसी ने दावा किया है कि ये तमाम लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए सरकार और सेना के खिलाफ अभियान चला रहे थे। एजेंसी का कहना है कि इनके द्वारा किए गए पोस्ट्स से राष्ट्रीय संस्थानों की छवि प्रभावित हो रही थी। एजेंसी ने सभी एक्टिविस्टों पर Anti-State Propaganda फैलाने और लोगों को भड़काने का भी आरोप लगाया है।
कई शहरों में हुई छापेमारी
पाकिस्तानी अखबार डॉन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार (28 मई) को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कई शहरों में NCCIA (National Cyber Crime Investigation Agency) ने एक साथ छापेमारी की। छापेमारी के दौरान मुल्तान से 4, फैसलाबाद से 3, लाहौर से 2 और गुजरांवाला से 1 एक्टिविस्ट को गिरफ्तार किया गया है। एजेंसी से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए सभी लोग लंबे समय से सोशल मीडिया पर सरकारी संस्थाओं और सेना के खिलाफ अभियान चला रहे थे। अधिकारियों ने कहा कि इन सभी 11 लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री देश की सुरक्षा के लिए नुकसानदायक है।
मानवाधिकार संगठनों ने की आलोचना
पाकिस्तान में हुए 11 एक्टिविस्टों की गिरफ्तारी के बाद मानवाधिकार संगठनों ने इसकी आलोचना की है। उनका कहना है कि पाकिस्तान में सेना और सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को लगातार दबाया जा रहा है। साथ ही उनके खिलाफ साइबर कानूनों का उपयोग भी बढ़ता जा रहा है। इन संगठनों ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि आमजन की आलोचनात्मक आवाजों को “राष्ट्र विरोधी” करार देकर उनपर कार्रवाई की जा रही है। इससे लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी प्रभावित हो रही है।
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