Nora Fatehi और संजय दत्त का गाना ‘सरके चुनर तेरी’ विवादों में घिर गया है, अश्लीलता के आरोपों और विरोध के बाद इसका हिंदी वर्जन YouTube से हटा दिया गया, जानें पूरा मामला
नई दिल्ली: बॉलीवुड एक्ट्रेस Nora Fatehi और अभिनेता संजय दत्त का हाल ही में रिलीज हुआ गाना “सरके चुनर तेरी” इन दिनों काफी चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह इसकी लोकप्रियता नहीं बल्कि विवाद है। रिलीज के कुछ ही दिनों बाद इस गाने को लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्त विरोध शुरू हो गया।
लोगों ने गाने के बोल और डांस स्टाइल को अश्लील बताते हुए इसकी आलोचना की। देखते ही देखते यह मामला इतना बढ़ गया कि गाने के मेकर्स को बड़ा फैसला लेना पड़ा। खबरों के मुताबिक, “सरके चुनर तेरी” के हिंदी वर्जन को YouTube से हटा दिया गया है या फिर प्राइवेट कर दिया गया है, जिससे अब आम लोग इसे आसानी से नहीं देख पा रहे हैं।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
गाना रिलीज होते ही कुछ दर्शकों को इसके बोल और प्रस्तुति पसंद नहीं आई। खासकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई यूजर्स ने आरोप लगाया कि गाने में अश्लीलता को बढ़ावा दिया गया है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि इस तरह के गाने समाज पर गलत असर डाल सकते हैं। धीरे-धीरे यह विरोध बढ़ता गया और कई संगठनों ने भी इस पर आपत्ति जताई। इसके बाद गाने के खिलाफ शिकायतें दर्ज होने लगीं। बताया जा रहा है कि इस मामले में अधिकारियों तक भी शिकायत पहुंची, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया।
मेकर्स ने लिया फैसला
लगातार बढ़ते विरोध और विवाद को देखते हुए गाने के निर्माताओं ने स्थिति को संभालने का फैसला किया। इसी के तहत “सरके चुनर तेरी” के हिंदी वर्जन को YouTube से हटा दिया गया। हालांकि, यह साफ नहीं है कि यह कदम पूरी तरह से किसी सरकारी आदेश के तहत उठाया गया या फिर मेकर्स ने खुद ही यह निर्णय लिया। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि मेकर्स ने विवाद को शांत करने के लिए यह कदम उठाया, ताकि आगे और विवाद न बढ़े। यह भी सामने आया है कि गाने के अन्य भाषा वाले वर्जन अभी भी कुछ प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध हो सकते हैं।
सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले में लोगों की राय बंटी हुई नजर आ रही है। एक तरफ जहां कई लोग गाने को हटाने के फैसले का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ बता रहे हैं। समर्थन करने वालों का कहना है कि मनोरंजन के नाम पर अश्लीलता नहीं परोसी जानी चाहिए। वहीं विरोध करने वाले लोगों का मानना है कि अगर किसी को गाना पसंद नहीं है तो वह उसे न देखे, लेकिन इस तरह हटाना सही नहीं है।
इंडस्ट्री के लिए एक संकेत
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि फिल्मों और गानों में क्या दिखाया जाना चाहिए और क्या नहीं। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव के कारण अब कंटेंट बहुत तेजी से लोगों तक पहुंचता है, ऐसे में जिम्मेदारी भी उतनी ही बढ़ जाती है। मनोरंजन और मर्यादा के बीच संतुलन बनाना आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। “सरके चुनर तेरी” विवाद इसी बात की एक मिसाल है कि दर्शकों की राय को नजरअंदाज करना अब आसान नहीं है।
