Saturday, 15 August 2026
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संसद का मानसून सत्र समाप्त, 12 विधेयक पास, कम चर्चा के बीच बने ये 7 अहम कानून

संसद के मानसून सत्र में 12 विधेयक पास हुए, लेकिन कम चर्चा और भारी हंगामे ने सत्र की तस्वीर बदल दी। जानिए 7 ऐसे कानूनों के बारे में जिनका आम लोगों पर असर पड़ेगा।

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र गुरुवार, 13 अगस्त को समाप्त हो गया। 20 जुलाई से शुरू हुआ यह सत्र कुल 19 बैठकों और 25 कैलेंडर दिनों तक चला। सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव, नारेबाजी और स्थगन के बावजूद दोनों सदनों ने कई महत्वपूर्ण विधेयकों को मंजूरी दी। उपलब्ध संसदीय आंकड़ों के मुताबिक, इस सत्र में 11 नए विधेयक दोनों सदनों से पारित हुए, जबकि एक विनियोग विधेयक को मिलाकर कुल 12 विधेयकों पर संसद की प्रक्रिया पूरी हुई।

इन विधेयकों का असर अलग-अलग क्षेत्रों पर पड़ता है। इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने से लेकर MSME, बैंकिंग रिकॉर्ड, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, न्यायाधिकरण, खनन और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून शामिल हैं। इनमें से सात विधेयक ऐसे हैं जिनका आम नागरिकों, कारोबार, प्रशासन और न्याय व्यवस्था पर खास प्रभाव पड़ सकता है।

1. परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026

मानसून सत्र में पारित सबसे महत्वपूर्ण विधेयकों में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 शामिल है। इसका सीधा संबंध प्रतियोगी और सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता से है।

परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल, फर्जी उम्मीदवारों और दूसरे अनुचित तरीकों को लेकर लगातार विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में इस कानून का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल के खिलाफ व्यवस्था को और मजबूत करना है।

किसी व्यक्ति द्वारा परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने पर अब 5 से 10 साल तक की जेल और अधिकतम 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। पहले यह सजा 3 से 5 साल और जुर्माना अधिकतम 10 लाख रुपये था।

अगर किसी सर्विस प्रोवाइडर की अनुचित साधनों में भूमिका पाई जाती है तो उस पर 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही परीक्षा संचालन से उसका प्रतिबंध भी 4 साल से बढ़ाकर 8 साल किया गया है।

नए प्रावधानों के तहत ऐसे मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने और मुकदमे की सुनवाई तीन महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान किया गया है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें नामित करने और विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की सुविधा भी दी गई है।

भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ी का सबसे बड़ा असर छात्रों और नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं पर पड़ता है। तेज जांच और सुनवाई का उद्देश्य ऐसे मामलों में कार्रवाई को लंबा खिंचने से रोकना है।

2. राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026

दूसरा महत्वपूर्ण कानून Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 है। इसका संबंध राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून में बदलाव से है।

विधेयक के तहत वंदे मातरम् के गायन को जानबूझकर रोकना या ऐसा व्यवधान पैदा करना जिससे वंदे मातरम् गाने वाली सभा बाधित हो, दंडनीय बनाया गया है।

यह विधेयक 29 और 30 जुलाई को दोनों सदनों से पारित हुआ। हालांकि इस पर संसदीय चर्चा अपेक्षाकृत कम हुई। आंकड़ों के मुताबिक दोनों सदनों में मिलाकर इस पर कुल लगभग 1 घंटा 15 मिनट चर्चा हुई।

इस मामले में प्रावधान राष्ट्रीय गान से जुड़े मौजूदा दंड के समान हैं। अपराध के लिए तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। दूसरी और उसके बाद की हर दोषसिद्धि पर कम से कम एक साल की जेल का प्रावधान है।

भारत में राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े प्रावधान पहले से कानून के दायरे में हैं। इस संशोधन के जरिए वंदे मातरम् से जुड़ी जानबूझकर की गई बाधा को भी कानूनी संरक्षण के दायरे में लाने की कोशिश की गई है।

3. जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026

तीसरा अहम विधेयक Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026 है। इसका सीधा संबंध जन्म और मृत्यु के आधिकारिक रिकॉर्ड से है।

इस कानून में देर से जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने की प्रक्रिया को अधिक सख्त बनाया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार, एक साल के बाद लेकिन दो साल तक पंजीकरण कराने के लिए सक्षम कार्यकारी मजिस्ट्रेट की मंजूरी की आवश्यकता होगी। वहीं दो साल से अधिक समय बीत जाने पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी होगी।

विधेयक 31 जुलाई को लोकसभा और 4 अगस्त को राज्यसभा से पारित हुआ।

जन्म प्रमाणपत्र आज सिर्फ उम्र का रिकॉर्ड नहीं है। स्कूल में दाखिला, सरकारी योजनाओं, पासपोर्ट, पहचान से जुड़े दस्तावेजों और कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं में जन्म रिकॉर्ड की भूमिका होती है। इसलिए रिकॉर्ड में गलत जानकारी या देरी से होने वाले पंजीकरण को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है।

हालांकि, सख्त प्रक्रिया का दूसरा पहलू यह है कि जिन परिवारों ने समय पर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण नहीं कराया है, उनके लिए प्रक्रिया अधिक कठिन हो सकती है।

4. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026

इस सूची में अगला महत्वपूर्ण विधेयक Micro, Small and Medium Enterprises Development (Amendment) Bill, 2026 है।

भारत की अर्थव्यवस्था में MSME क्षेत्र की बड़ी भूमिका है। छोटे कारोबारी रोजगार पैदा करने के साथ-साथ विनिर्माण, सेवाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करते हैं। लेकिन छोटे उद्यमों के सामने अक्सर वित्तीय संसाधनों और समय पर भुगतान की समस्या रहती है।

इस संशोधन का एक प्रमुख प्रावधान MSME के लिए राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाना है, जिस पर पंजीकरण मुफ्त और स्वैच्छिक होगा। विधेयक का उद्देश्य छोटे कारोबारों की वित्त तक पहुंच सुधारना, विलंबित भुगतान से जुड़े विवादों के समाधान को तेज करना और कारोबार करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।

विधेयक 3 अगस्त को राज्यसभा और 7 अगस्त को लोकसभा से पारित हुआ।

यदि डिजिटल पंजीकरण और भुगतान विवादों के समाधान की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो छोटे कारोबारियों को अपने व्यवसाय को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने और वित्तीय सुविधाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।

5. बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026

मानसून सत्र में पारित एक और महत्वपूर्ण विधेयक Bankers’ Books Evidence Bill, 2026 है। यह कानून बैंकिंग रिकॉर्ड को आधुनिक डिजिटल व्यवस्था के अनुरूप बनाने की कोशिश करता है।

नए कानून में ‘बैंकर्स बुक्स’ की परिभाषा को विस्तृत करते हुए फिजिकल, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल और क्लाउड-आधारित रिकॉर्ड को भी इसमें शामिल किया गया है। साथ ही इनके प्रमाणीकरण और अदालतों में पेश किए जाने के लिए तकनीक-तटस्थ कानूनी ढांचा तैयार किया गया है।

विधेयक 5 अगस्त को लोकसभा और 10 अगस्त को राज्यसभा से पारित हुआ।

खरीदार द्वारा MSME के बकाया भुगतान की जानकारी देने से संबंधित नियम तोड़ने पर पहली बार चेतावनी, दूसरी बार ₹10,000 से ₹50,000 और बाद के उल्लंघन पर ₹50,000 से ₹1 लाख तक की पेनल्टी का प्रावधान है। इन न्यूनतम पेनल्टी में हर तीन साल बाद 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है।

बैंकिंग व्यवस्था तेजी से डिजिटल हो चुकी है। लेनदेन, स्टेटमेंट और अन्य बैंकिंग जानकारी अब बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक या क्लाउड सिस्टम में मौजूद रहती है। ऐसे में पुराने कानूनों में मौजूद रिकॉर्ड की परिभाषा को डिजिटल व्यवस्था के अनुरूप बनाना न्यायिक और बैंकिंग प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

6. अधिकरण सुधार विधेयक, 2026

इस सूची में छठा महत्वपूर्ण कानून है Tribunals Reforms Bill, 2026। न्यायाधिकरण अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े विवादों के समाधान के लिए महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं। लेकिन इनके कामकाज, स्वतंत्रता और नियुक्तियों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

नए कानून का उद्देश्य न्यायाधिकरणों की दक्षता, स्वतंत्रता और पारदर्शिता में सुधार करना है। इसके तहत National Tribunals Commission का प्रावधान किया गया है।

यह विधेयक 10 अगस्त को लोकसभा और 11 अगस्त को राज्यसभा से पारित हुआ।

इस कानून का प्रभाव सीधे तौर पर उन मामलों पर पड़ सकता है जो विभिन्न विशेष न्यायाधिकरणों के सामने जाते हैं। अगर प्रशासनिक और संस्थागत व्यवस्था बेहतर होती है, तो मामलों के निपटारे में तेजी लाने में मदद मिल सकती है।

कानून के तहत ट्रिब्यूनल के चेयरपर्सन या सदस्य को दिवालिया होने, नैतिक अधमता वाले अपराध में दोषी ठहराए जाने, पद के दुरुपयोग या हितों के टकराव जैसी स्थितियों में पद से हटाया जा सकता है। कुछ अतिरिक्त आधारों में अयोग्य या अक्षम पाए जाना और भुगतान वाले काम में शामिल होना भी शामिल है।

7. खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026:

सत्र के अंतिम दिनों में पारित सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक विधेयकों में Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 शामिल है।

यह विधेयक खनिज क्षेत्र की वित्तीय व्यवस्था को ज्यादा निश्चित और पूर्वानुमान योग्य बनाने के उद्देश्य से लाया गया। दोनों सदनों से इसे 12 और 13 अगस्त को मंजूरी मिली।

नए कानून का एक महत्वपूर्ण पहलू राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त जमीन पर नए टैक्स, सेस या लेवी लगाने की शक्ति से जुड़ा है। ऐसी नई वसूली को केंद्र द्वारा स्वीकृत शर्तों के अनुरूप होना होगा। उद्देश्य खनन क्षेत्र में अलग-अलग राज्यों की कर व्यवस्थाओं से पैदा होने वाली अनिश्चितता को कम करना है।

खनन कंपनियों और निवेशकों के लिए लागत और कर संबंधी अनिश्चितता कम हो सकती है। दूसरी तरफ, राज्यों के अधिकार और उनके राजस्व हितों को लेकर इस तरह के प्रावधान स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण राजनीतिक और संघीय सवाल भी पैदा करते हैं।

12 विधेयक पास, लेकिन संसद की कार्यवाही पर सवाल

मानसून सत्र की सबसे बड़ी खासियत यही विरोधाभास रहा कि विधायी कामकाज हुआ, लेकिन चर्चा और संसदीय उत्पादकता काफी कम रही।

लोकसभा में उत्पादकता करीब 19% रही, जबकि राज्यसभा की उत्पादकता 39.17% दर्ज की गई। राज्यसभा ने कुल 37 घंटे 49 मिनट काम किया। सूचीबद्ध 285 तारांकित प्रश्नों में केवल 16 लिए जा सके। इसी तरह 380 जीरो ऑवर सबमिशन में से 52 और 380 विशेष उल्लेखों में से 93 लिए गए।

आंकड़े यह भी बताते हैं कि कई विधेयक बहुत कम चर्चा के बाद पारित हुए। उदाहरण के लिए Registration of Births and Deaths Bill पर दोनों सदनों में कुल 54 मिनट चर्चा हुई, जबकि Supreme Court Judges Amendment Bill पर कुल 2 घंटे 25 मिनट चर्चा हुई। MSME Bill पर कुल 1 घंटा 22 मिनट और Mines and Minerals Bill पर केवल 45 मिनट चर्चा हुई।

यानी संसद ने कानून बनाने का काम किया, लेकिन कई मामलों में उस कानून पर विस्तार से बहस के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला।

सत्र की सबसे बड़ी तस्वीर

20 जुलाई से 13 अगस्त तक चले मानसून सत्र में 12 विधेयक पारित होना सरकार के विधायी एजेंडे के लिहाज से महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इन कानूनों का दायरा भी परीक्षा व्यवस्था, राष्ट्रीय सम्मान, नागरिक रिकॉर्ड, छोटे कारोबार, बैंकिंग, न्यायाधिकरण और खनन तक काफी व्यापक रहा।

आंकड़ों की माने तो, प्रश्नकाल लोकसभा में निर्धारित समय का केवल करीब 1% और राज्यसभा में 12% ही चल सका।

इसलिए 2026 का मानसून सत्र एक ऐसे संसदीय सत्र के तौर पर याद किया जा सकता है जिसमें कानून बनाने का काम जारी रहा, लेकिन राजनीतिक टकराव और व्यवधानों ने चर्चा के लिए उपलब्ध समय को काफी सीमित कर दिया।

ये भी पढ़ें :- Gallantry Awards 2026: स्वतंत्रता दिवस पर 1,057 कर्मियों को मिलेगा सम्मान, वीरता पदक से लेकर सराहनीय सेवा पदक तक जाने पूरी सूची

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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