Saturday, 11 July 2026
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Monaco Diamond League 2026: सर्वेश कुशारे ने रचा इतिहास, डायमंड लीग में पोडियम पर पहुंचने वाले पहले भारतीय हाई जम्पर बने

भारतीय हाई जंप के लिए ऐतिहासिक दिन! सर्वेश कुशारे ने मोनाको डायमंड लीग 2026 में कांस्य पदक जीतकर डायमंड लीग पोडियम पर पहुंचने वाले पहले भारतीय बनने का गौरव हासिल किया।

मोनाको: भारतीय एथलेटिक्स के लिए 11 जुलाई 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। मोनाको में आयोजित प्रतिष्ठित Diamond League 2026 के हाई जंप मुकाबले में भारत के सर्वेश कुशारे (Sarvesh Kushare) ने तीसरा स्थान हासिल कर ऐसा कारनामा किया, जो आज तक कोई भारतीय हाई जम्पर नहीं कर पाया था।

दुनिया के सर्वश्रेष्ठ जम्परों के बीच मुकाबला करते हुए सर्वेश ने 2.26 मीटर की छलांग लगाई और डायमंड लीग में पोडियम फिनिश करने वाले भारत के पहले High Jumper बन गए।

यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि डायमंड लीग को ट्रैक एंड फील्ड की सबसे प्रतिष्ठित वार्षिक प्रतियोगिताओं में गिना जाता है। यहां केवल विश्व रैंकिंग के शीर्ष एथलीटों को ही प्रतिस्पर्धा का मौका मिलता है। ऐसे मंच पर भारत के किसी हाई जम्पर का शीर्ष तीन में पहुंचना भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक नई शुरुआत माना जा रहा है।

मोनाको में हुआ ऐतिहासिक मुकाबला

Monaco Diamond League 2026 का आयोजन Stade Louis II, Monaco में हुआ, जहां दुनिया के कई शीर्ष हाई जम्पर मैदान में उतरे। प्रतियोगिता की शुरुआत अपेक्षाकृत आसान ऊंचाइयों से हुई, जिन्हें सर्वेश ने बिना किसी कठिनाई के पार कर लिया।

जैसे-जैसे बार की ऊंचाई बढ़ती गई, मुकाबला और कठिन होता गया। सर्वेश ने दबाव के बीच लगातार संयम बनाए रखा और एक-एक ऊंचाई पार करते हुए खुद को पदक की दौड़ में बनाए रखा। अंततः उन्होंने 2.26 मीटर की सफल छलांग लगाकर तीसरा स्थान सुनिश्चित किया।

हालांकि इसके बाद वह 2.30 मीटर की ऊंचाई पार नहीं कर सके, लेकिन तब तक उनका पोडियम स्थान सुरक्षित हो चुका था। यह उनके करियर की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों में शामिल हो गया।

किसने जीता मुकाबला?

मोनाको हाई जंप प्रतियोगिता में यूक्रेन के ओलेह डोरोशचुक (2.32 मीटर) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया। उन्होंने

दूसरे स्थान पर  ग्रेट ब्रिटेन के जैक किमानी रहे, जिन्होंने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 2.30 मीटर तक पहुंच बनाई। प्रयासों की संख्या के आधार पर उन्हें दूसरा स्थान मिला, जबकि Sarvesh Kushare 2.26 मीटर के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

इन दोनों खिलाड़ियों का नाम पिछले कुछ वर्षों से विश्व हाई जंप के सबसे मजबूत खिलाड़ियों में लिया जाता रहा है। ऐसे एथलीटों के बीच सर्वेश का पोडियम तक पहुंचना उनकी निरंतर प्रगति का संकेत माना जा सकता है।

क्यों खास है यह उपलब्धि?

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में भाला फेंक, लंबी कूद, ट्रिपल जंप और पैदल चाल जैसे इवेंट्स में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, लेकिन हाई जंप में अब तक कोई भारतीय डायमंड लीग के शीर्ष तीन खिलाड़ियों में जगह नहीं बना पाया था।

Sarvesh Kushare ने यह रिकॉर्ड तोड़ते हुए नया इतिहास रच दिया। इससे पहले वह कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फाइनल तक पहुंचे थे, लेकिन डायमंड लीग जैसे बड़े मंच पर पोडियम तक पहुंचना भारतीय हाई जंप के लिए पहली बार हुआ।

सर्वेश की यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में भारतीय हाई जंप खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और इस इवेंट में भारत की मौजूदगी और मजबूत होगी।

कौन हैं सर्वेश कुशारे?

महाराष्ट्र के नासिक से आने वाले सर्वेश कुशारे भारतीय एथलेटिक्स का जाना-पहचाना नाम हैं। उन्होंने कम उम्र में ही हाई जंप को अपना मुख्य इवेंट चुना और घरेलू स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन किया।

राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता मिलने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अपनी तकनीक, फिटनेस और निरंतरता पर काफी काम किया, जिसका परिणाम अब डायमंड लीग के पोडियम के रूप में सामने आया है।

सर्वेश ने 2023 एशियाई खेल (Hangzhou Asian Games) में भारत का प्रतिनिधित्व किया था और इसके बाद भी कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार हिस्सा लेते रहे। मोनाको में मिला यह परिणाम उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

भारतीय हाई जंप के लिए क्यों ऐतिहासिक है यह उपलब्धि?

Sarvesh Kushare का मोनाको डायमंड लीग में तीसरे स्थान पर रहना केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब तक भारत की पहचान मुख्य रूप से भाला फेंक, लंबी कूद, ट्रिपल जंप और वॉकिंग इवेंट्स में बन रही थी, लेकिन हाई जंप में किसी भारतीय एथलीट ने डायमंड लीग जैसे प्रतिष्ठित मंच पर पोडियम तक पहुंचने का कारनामा नहीं किया था।

इससे पहले भारतीय हाई जंपरों ने एशियाई स्तर पर अच्छे प्रदर्शन जरूर किए थे, लेकिन विश्व के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच शीर्ष तीन में जगह बनाना संभव नहीं हो पाया था। सर्वेश ने इस कमी को पूरा करते हुए यह साबित कर दिया कि भारतीय खिलाड़ी अब तकनीकी इवेंट्स में भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ एथलीटों को कड़ी चुनौती देने की क्षमता रखते हैं।

डायमंड लीग की प्रतिष्ठा

Diamond League विश्व एथलेटिक्स की सबसे प्रतिष्ठित वार्षिक ट्रैक एंड फील्ड प्रतियोगिता मानी जाती है। इसकी शुरुआत 2010 में हुई थी और इसका उद्देश्य दुनिया के सर्वश्रेष्ठ एथलीटों को एक ही मंच पर प्रतिस्पर्धा का अवसर देना है।

हर सीजन में अलग-अलग देशों में प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं। दोहा, शंघाई, रोम, ओस्लो, स्टॉकहोम, पेरिस, मोनाको, लंदन, ज्यूरिख और ब्रुसेल्स जैसे शहर इसके प्रमुख मेजबान रहे हैं।

हर प्रतियोगिता में खिलाड़ियों को अंक मिलते हैं और सीजन के अंत में सर्वाधिक अंक जुटाने वाले खिलाड़ी डायमंड लीग फाइनल में पहुंचते हैं।

ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप के अलावा डायमंड लीग को एथलेटिक्स का सबसे कठिन और प्रतिष्ठित सर्किट माना जाता है। इसलिए यहां पोडियम फिनिश करना किसी भी खिलाड़ी के करियर की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।

लगातार बेहतर हो रहा है सर्वेश का प्रदर्शन

Sarvesh Kushare पिछले कुछ वर्षों से लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार करते रहे हैं। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रभुत्व स्थापित करने के बाद उन्होंने एशियाई स्तर पर अपनी पहचान बनाई और फिर विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में भी नियमित रूप से हिस्सा लेना शुरू किया।

उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2.26 मीटर है, जो अब भी भारतीय हाई जंप के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में शामिल है। मोनाको डायमंड लीग में भी उन्होंने इसी ऊंचाई को सफलतापूर्वक पार किया और दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच अपनी जगह बनाई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सर्वेश अपनी तकनीक और फिटनेस में इसी तरह सुधार जारी रखते हैं तो आने वाले वर्षों में वे 2.30 मीटर या उससे अधिक की छलांग लगाने में भी सफल हो सकते हैं। यह स्तर उन्हें विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक पदक की दौड़ में भी मजबूत दावेदार बना सकता है।

2028 ओलंपिक की उम्मीदें बढ़ीं

मोनाको डायमंड लीग में मिला यह परिणाम केवल वर्तमान सफलता नहीं, बल्कि भविष्य के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। Los Angeles 2028 Olympic Games को ध्यान में रखते हुए भारतीय एथलेटिक्स महासंघ और कोचिंग स्टाफ ऐसे खिलाड़ियों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, जिनमें विश्व स्तर पर पदक जीतने की क्षमता दिखाई देती है।

Sarvesh Kushare अब उन्हीं खिलाड़ियों में शामिल हो चुके हैं। विश्व स्तर के जम्परों के बीच पोडियम तक पहुंचना यह दर्शाता है कि वह बड़े मंच के दबाव को संभाल सकते हैं। यदि अगले दो वर्षों में उनका प्रदर्शन इसी तरह बेहतर होता रहा तो वे लॉस एंजिलिस ओलंपिक में भारत की सबसे बड़ी उम्मीदों में शामिल हो सकते हैं।

मोनाको में मिला यह कांस्य पदक आने वाले वर्षों में भारतीय हाई जंप के विकास की मजबूत नींव बन सकता है। यदि युवा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव और आधुनिक सुविधाएं मिलती रहीं, तो भविष्य में भारत इस स्पर्धा में भी विश्व स्तर पर नियमित पदक जीतने वाले देशों में शामिल हो सकता है। यही कारण है कि Sarvesh Kushare की यह उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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