Friday, 07 August 2026
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मोहन भागवत ने Gen Z को बताया ईमानदार, प्रियंका गांधी बोलीं- “उन्हें आपके सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं!”

मुंबई के युवा सम्मेलन में मोहन भागवत ने Gen Z की तारीफ करते हुए उन्हें ईमानदार बताया। प्रियंका गांधी ने पलटवार करते हुए कहा कि युवाओं को उनके प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है।

नई दिल्ली/मुंबई: भारत में युवाओं और राजनीति के बीच बढ़ती दूरी को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में Gen Z को लेकर देश की राजनीतिक चर्चा अचानक तेज हो गई है। छात्र आंदोलनों, शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों और सरकार के खिलाफ युवाओं की नाराजगी के बीच अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने Gen Z और Gen Alpha को लेकर ऐसी टिप्पणी की है, जिसने नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है।

गुरुवार, 6 अगस्त को मुंबई में आयोजित एक युवा सम्मेलन के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि नई पीढ़ी पिछली पीढ़ियों की तुलना में ज्यादा ईमानदार है और वह देशभक्ति तथा सेवा की अपीलों पर स्वाभाविक रूप से प्रतिक्रिया देती है। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं के विरोध-प्रदर्शन को केवल इस आधार पर देशविरोधी नहीं कहा जा सकता कि वे सरकार या व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

भागवत के इस बयान के बाद कांग्रेस महासचिव और लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने उन पर निशाना साधते हुए कहा कि Gen Z को भागवत के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है। उनके इस बयान ने मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है। अब सवाल केवल यह नहीं है कि Gen Z कितना ईमानदार है, बल्कि यह भी है कि देश की युवा पीढ़ी को राजनीतिक दल और वैचारिक संगठन किस तरह देख रहे हैं और उनसे संवाद स्थापित करने की कोशिश क्यों बढ़ रही है।

सम्मेलन में क्या बोले मोहन भागवत?

मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित ‘The Role of Youth in Uniting the World, the Indian Way’ विषय पर हुए सम्मेलन में युवाओं और विशेष रूप से Gen Z को लेकर विस्तार से बातचीत की। यह कार्यक्रम IIMUN के 15वें स्थापना वर्ष से जुड़े आयोजन का हिस्सा था।

भागवत ने इस सम्मेलन में कहा कि आज की नई पीढ़ी सवाल पूछती है और किसी बात को केवल इसलिए स्वीकार नहीं करती क्योंकि उसे किसी बड़े या बुजुर्ग ने कहा है। उनके अनुसार उनकी पीढ़ी में लोग अक्सर बड़ों की बात मान लेते थे, जबकि Gen Z और Gen Alpha तार्किक जवाब चाहती हैं।

उन्होंने युवाओं को लेकर कहा कि नई पीढ़ी अधिक ईमानदार है और देशभक्ति तथा सेवा से जुड़े संदेशों को गंभीरता से लेती है। भागवत ने यह भी कहा कि अगर उनसे पूछा जाए कि वह किस पर आंख मूंदकर भरोसा करेंगे, तो वह Gen Z पर भरोसा करेंगे।

यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कुछ ही समय पहले देश में युवाओं के नेतृत्व में बड़े छात्र विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले थे।

प्रदर्शन करना देशविरोधी होना नहीं है

भागवत के बयान का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि Gen Z अपनी समस्याओं को लेकर प्रदर्शन करती है तो उसे देशविरोधी नहीं कहा जाना चाहिए।

उन्होंने Gen Z को देश की अपनी अगली पीढ़ी बताते हुए कहा कि युवाओं की शिकायतों को संवाद, तार्किक जवाब और अपनापन देकर समझने की जरूरत है। उनके मुताबिक लोकतंत्र में विरोध भी संवाद का एक माध्यम है और जब किसी व्यक्ति या समूह की बात दूसरे तरीकों से नहीं सुनी जाती, तो वह विरोध का रास्ता अपना सकता है।

भागवत ने हालांकि यह भी कहा कि विरोध का उद्देश्य किसी व्यक्ति को निशाना बनाना या समाज को बांटना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार और सहमति बनाने की दिशा में होना चाहिए। इस तरह उनका बयान केवल Gen Z की तारीफ तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने युवाओं और व्यवस्था के बीच संवाद की जरूरत पर भी जोर दिया।

प्रियंका गांधी का जवाब

मोहन भागवत के बयान के बाद कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि Gen Z को उनके प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है।

प्रियंका गांधी की टिप्पणी का सीधा निशाना भागवत का वह बयान था जिसमें उन्होंने युवाओं को ईमानदार और देशभक्ति की भावना रखने वाला बताया था। उनका तर्क था कि युवाओं की ईमानदारी या देशभक्ति को किसी राजनीतिक या वैचारिक व्यक्ति की स्वीकृति की जरूरत नहीं है।

इस प्रतिक्रिया ने राजनीतिक बहस को एक अलग दिशा दे दी। जहां भागवत का बयान युवाओं के प्रति सकारात्मक स्वीकार्यता के तौर पर देखा गया, वहीं कांग्रेस ने इसे युवाओं को प्रमाणपत्र देने की कोशिश के रूप में पेश किया।

इतनी महत्वपूर्ण क्यों हो गई है Gen Z?

Gen Z आम तौर पर उस पीढ़ी को कहा जाता है, जिनका जन्म 1997 या उसके बाद हुआ है। ये पीढ़ी इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के दौर में बड़ी हुई है। भारत जैसे युवा देश में इस पीढ़ी की राजनीतिक और सामाजिक भूमिका आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण हो सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार भारत की 1.4 अरब से अधिक आबादी में आधे से ज्यादा लोग 35 वर्ष से कम उम्र के हैं। ऐसे में युवाओं की राजनीतिक पसंद और उनकी प्राथमिकताएं आने वाले चुनावों को प्रभावित कर सकती हैं।

2029 के आम चुनाव को देखते हुए युवा मतदाता राजनीतिक दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण वर्ग हैं। लेकिन Gen Z को केवल वोट बैंक के रूप में देखना राजनीतिक दलों के लिए पर्याप्त नहीं होगा।

रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, डिजिटल स्वतंत्रता, मानसिक स्वास्थ्य, महंगाई, जलवायु परिवर्तन और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा जैसे मुद्दे इस पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण हैं।

यही वजह है कि अब राजनीतिक दलों और वैचारिक संगठनों की कोशिश केवल पारंपरिक रैलियों तक सीमित नहीं रह गई है। सोशल मीडिया, डिजिटल कंटेंट और युवा सम्मेलनों के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश बढ़ रही है।

Gen Z और पुरानी पीढ़ी में अंतर

भागवत ने अपने बयान में जिस अंतर की ओर इशारा किया, वह केवल राजनीतिक नहीं है। Gen Z की सामाजिक और डिजिटल परवरिश पिछली पीढ़ियों से काफी अलग रही है।

आज का युवा किसी नेता या संस्था के बयान को केवल इसलिए स्वीकार नहीं करता क्योंकि वह किसी प्रतिष्ठित पद पर है। वह सवाल करता है, अलग-अलग स्रोतों से जानकारी जुटाता है और सोशल मीडिया पर अपनी राय सार्वजनिक करने में भी संकोच नहीं करता।

यही वजह है कि आज के समय में राजनीतिक संवाद एकतरफा भाषण से दोतरफा बातचीत में बदल रहा है।

भागवत ने भी अपने संबोधन में इसी बदलाव को स्वीकार करते हुए कहा कि नई पीढ़ी सवाल पूछती है और तार्किक जवाब चाहती है।

लेकिन यही प्रवृत्ति राजनीतिक संस्थाओं के लिए चुनौती भी बन सकती है। यदि युवाओं को किसी मुद्दे पर पर्याप्त जानकारी, जवाब या भरोसा नहीं मिलता, तो वे ऑनलाइन कैंपेन से लेकर सड़कों पर प्रदर्शन तक अलग-अलग तरीके अपना सकते हैं।

क्या Gen Z तक पहुंचना चाहती है RSS?

भागवत के हालिया बयानों को RSS के युवाओं तक पहुंच बनाने की व्यापक कोशिश के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों में उनके मुंबई कार्यक्रम को RSS की Gen Z outreach से जोड़कर देखा गया है।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर युवा RSS की विचारधारा से सहमत है या भागवत की बात को समर्थन देता है। बल्कि इसका महत्व इस बात में है कि देश का एक बड़ा वैचारिक संगठन उस पीढ़ी से संवाद की जरूरत को सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर रहा है, जो पारंपरिक राजनीतिक भाषा से हमेशा प्रभावित नहीं होती।

Gen Z के साथ संवाद स्थापित करना किसी भी संगठन के लिए आसान नहीं होगा। इस पीढ़ी के पास सवाल ज्यादा हैं और वह केवल विचारधारा की बुनियाद पर किसी पक्ष के साथ खड़ी होने के बजाय मुद्दे के आधार पर राय बदल सकती है।

क्या युवाओं की राजनीति बदल रही है?

हालिया घटनाओं को देखें तो भारतीय युवाओं की राजनीतिक भागीदारी के तरीकों में बदलाव साफ दिखाई देता है। सोशल मीडिया ने युवाओं को किसी राजनीतिक संगठन का हिस्सा बने बिना भी अपनी बात रखने का मंच दिया है।

अब कोई छात्र किसी परीक्षा नीति से असहमत है तो वह केवल कॉलेज परिसर तक सीमित नहीं रहता। सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो, हैशटैग, ऑनलाइन याचिका और सामूहिक प्रदर्शन के जरिए उसकी आवाज राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन सकती है। यही बदलाव राजनीतिक दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

Gen Z किसी एक राजनीतिक विचारधारा की स्थायी समर्थक हो, यह जरूरी नहीं। वह एक मुद्दे पर सरकार के साथ और दूसरे मुद्दे पर उसके खिलाफ खड़ी हो सकती है। इसलिए इस पीढ़ी को समझने के लिए पारंपरिक राजनीतिक समीकरण पर्याप्त नहीं होंगे।

सवाल ‘सर्टिफिकेट’ का नहीं, भरोसे का है

मोहन भागवत का Gen Z को ईमानदार बताना और प्रियंका गांधी का यह कहना कि युवाओं को उनके प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है, फिलहाल राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बन चुका है। लेकिन इस बहस के पीछे एक बड़ा सवाल छिपा है, “क्या देश की युवा पीढ़ी को वास्तव में सुना जा रहा है?”

भागवत ने युवाओं के सवाल पूछने और विरोध जताने के अधिकार को स्वीकार किया है। प्रियंका गांधी ने युवाओं की स्वतंत्र पहचान और राजनीतिक प्रमाणपत्र से उनकी स्वतंत्रता पर जोर दिया है। दोनों बयानों के बीच राजनीतिक मतभेद जरूर हैं, लेकिन यह साफ है कि Gen Z अब भारतीय राजनीति में ऐसा वर्ग बन चुका है जिसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।

आने वाले वर्षों में युवा केवल चुनाव में वोट डालने वाला वर्ग नहीं रहेगा। वह नीतियों पर सवाल पूछेगा, नेताओं से जवाब मांगेगा और जरूरत पड़ने पर सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक अपनी आवाज उठाएगा।

इसलिए असली चुनौती किसी नेता से Gen Z को प्रमाणपत्र दिलाने की नहीं, बल्कि उस पीढ़ी का भरोसा जीतने की है। और यह भरोसा भाषणों से नहीं, बल्कि जवाबदेही, पारदर्शिता और वास्तविक संवाद से ही हासिल किया जा सकेगा।

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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