मिडिल ईस्ट तनाव का असर: शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के

मिडिल ईस्ट

तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक अनिश्चितता से निवेशकों में घबराहट, बाजार में बिकवाली तेज

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखने लगा है। ईरान, इज़रायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने बाजार को दबाव में ला दिया है।

सोमवार दोपहर तक भारी बिकवाली के कारण सेंसेक्स करीब 2,300 अंक से ज्यादा गिरकर 77,000 के नीचे आ गया। वहीं निफ्टी लगभग 700 अंक टूटकर 23,800 के स्तर से नीचे पहुंच गया। यह स्तर पिछले करीब 11 महीनों का सबसे निचला माना जा रहा है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।

वैश्विक अनिश्चितता से बाजार में दबाव

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी है। हालांकि उनका मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव ज्यादा नहीं बढ़ता तो आने वाले समय में बाजार फिर से स्थिर हो सकता है।

पिछले सप्ताह भी बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया था।
5 मार्च को सेंसेक्स करीब 900 अंकों की तेजी के साथ 80,000 के पार पहुंच गया था। लेकिन अगले ही दिन 6 मार्च को 1,097 अंकों की गिरावट के साथ यह 78,918 के स्तर पर आ गया। सोमवार की गिरावट ने इस अस्थिरता को और बढ़ा दिया है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। ब्रेंट क्रूड सोमवार सुबह करीब 26% बढ़कर 117 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। हालांकि बाद में इसकी कीमत लगभग 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रही।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, संभावित सैन्य कार्रवाई और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है।

भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए यह स्थिति चिंता की बात है, क्योंकि देश अपनी करीब 85 प्रतिशत तेल जरूरत विदेशों से पूरी करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं तो महंगाई दर में करीब 0.8 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।

बाजार की दिशा को लेकर अनिश्चितता

तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी अपने 5 जनवरी के उच्चतम स्तर 26,373 से करीब 10 प्रतिशत नीचे आ चुका है, जिसे सामान्य बाजार करेक्शन माना जाता है।

विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा स्तरों पर बाजार ओवरसोल्ड स्थिति के करीब है, लेकिन फिलहाल तेजी के स्पष्ट संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं।

यदि निफ्टी 23,500 के सपोर्ट स्तर से नीचे जाता है तो गिरावट और गहरी हो सकती है। वहीं 24,000 के ऊपर टिकाव बाजार में सुधार की शुरुआत का संकेत माना जा सकता है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए

बाजार में जारी उतार-चढ़ाव से छोटे निवेशक और एसआईपी करने वाले निवेशक चिंतित हैं। हालांकि विशेषज्ञ लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने के बजाय धैर्य बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं।

उनका कहना है कि इतिहास बताता है कि भू-राजनीतिक संकटों का असर आमतौर पर सीमित समय तक ही रहता है और मजबूत कंपनियां ऐसे दौर से निकलकर फिर से बेहतर प्रदर्शन करती हैं।

किन सेक्टरों पर पड़ेगा असर

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से कई उद्योगों की लागत बढ़ सकती है। ऑयल मार्केटिंग, पेंट, टायर और केमिकल कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ने की आशंका है। एविएशन सेक्टर पर भी असर पड़ सकता है क्योंकि विमान ईंधन महंगा होने से संचालन लागत बढ़ जाती है।

हालांकि कुछ सेक्टर अपेक्षाकृत मजबूत बने रह सकते हैं। बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो, टेलीकॉम और सीमेंट जैसे घरेलू मांग आधारित क्षेत्रों पर असर सीमित रहने की संभावना है। इसके अलावा डिफेंस और फार्मा सेक्टर को अनिश्चित वैश्विक माहौल में अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्प माना जा रहा है।

आगे क्या हो सकता है

फिलहाल बाजार में अस्थिरता बने रहने की संभावना है। अगर मिडिल ईस्ट में कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं और तेल की कीमतें स्थिर होती हैं तो बाजार को राहत मिल सकती है।

विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे सतर्क रहें और मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि के निवेश पर ध्यान दें। आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम ही तय करेंगे कि बाजार जल्दी संभलेगा या अस्थिरता कुछ समय और जारी रहेगी।

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