उत्तर प्रदेश में क्राइम रेट को लेकर बड़ा बदलाव, जानें क्या कहती है NCRB की नई रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश में क्राइम रेट को लेकर बड़ा बदलाव, जानें क्या कहती है NCRB की नई रिपोर्ट

देश भर में बढ़ रहे अपराधों के बीच उत्तर प्रदेश से एक राहत की खबर सामने आ रही है। NCRB की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक यूपी के क्राइम रेट में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं अपराध के मामले में भी यूपी की रैंकिंग में सुधार देखा गया है।

नई दिल्ली: हाल ही में NCRB(National Crime Records Bureau) की जारी रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि भारत की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में अपराध दर में बड़ी गिरावट आई है। हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 में देशभर के औसतन 252.3% के मुकाबले यूपी में अपराध 180.2% हुए हैं जो कि राष्ट्रीय औसत से 28.5% कम है। इसके अलावा अपराधों की संख्या के मामले में भी उत्तर प्रदेश की रैंकिंग में 6 स्थान का सुधार दर्ज किया गया है। 2023 में जहां अपराधों में सुधार के मामले में यूपी का 24वां स्थान था, वहीं 2024 में यह 18वें स्थान पर आ गया है।

2024 में नहीं हुआ कोई भी सांप्रदायिक दंगा


NCRB की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक उस साल प्रदेश में एक भी सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ। साथ ही यूपी में महिलाओं से जुड़े अपराध के मामले भी कम हुए हैं। इसके अलावा प्रदेश में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के खिलाफ भी अपराधों में कमी आई है। साल दर साल के बदलते आंकड़ों के मिजाज यह साफ बता रहे हैं कि यूपी की शासन व्यवस्था अपराध मुक्त प्रदेश के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।

महिला अपराध में भी आई कमी


NCRB की रिपोर्ट मानें तो अपराध में आई कमी का बड़ा कारण महिलाओं के खिलाफ हुए अपराध में आई कमी है। रिपोर्ट बताते हैं कि प्रदेश में दहेज हत्या जैसे संवेदनशील अपराधों में सबसे अधिक गिरावट देखने को मिली है। साल 2023 में प्रदेश भर में दहेज हत्या से जुड़े कुल 2122 मुकदमें दर्ज हुए थे, वहीं साल 2024 में यह आंकड़ा घटकर 1047 हो गया।

साइबर अपराध में फिलहाल सुधार नहीं


रिपोर्ट बताते हैं कि भले ही प्रदेश भर में अपराध से जुड़े मामलों में गिरावट आई है, लेकिन साइबर अपराध के मामले में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है। आंकड़े बताते हैं कि साल 2024 में साइबर क्राइम के मामले में यूपी देश में पांचवे पायदान में है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए, वहीं गाजियाबाद और कानपुर दूसरे और तीसरे नंबर पर है। अकेले सिर्फ लखनऊ में 898 पुराने केस लंबित है, जबकि कुल 2190 केस साइबर के विवेचना के लिए पेंडिंग हैं।

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