टेलीसर्जरी ने रचा नया इतिहास: दिल्ली में विशेषज्ञों ने साझा की 20,000 किमी दूर से हुई रोबोटिक हार्ट सर्जरी की सफलता

टेलीसर्जरी

20,000 किमी दूर से हुई सफल रोबोटिक हार्ट सर्जरी ने एक नया इतिहास रचा है। सर्जरी से जुड़े विशेषज्ञों ने गुरुवार (4 जून) को दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान अपने अनुभव साझा किए। साथ ही उन्होंने भविष्य में इस तकनीक की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।

राजधानी दिल्ली के होटल ताज मानसिंह में गुरुवार (4 जून) को आयोजित एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में चिकित्सा जगत की एक ऐतिहासिक उपलब्धि को साझा किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हाल ही में स्थापित उस रिकॉर्ड की जानकारी देना था, जिसमें रोबोटिक तकनीक की मदद से लगभग 20,000 किलोमीटर दूर स्थित मरीज की सफल हार्ट सर्जरी की गई। इस उपलब्धि को वैश्विक स्वास्थ्य सेवा और टेलीमेडिसिन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में विश्वप्रसिद्ध कार्डियक सर्जन डॉ. सुधीर श्रीवास्तव, मणिपाल हॉस्पिटल जयपुर के चीफ कार्डियक सर्जन डॉ. ललित मलिक और IRCAD इंडिया के प्रेसिडेंट डॉ. मोहित भंडारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इसे अलावा कार्यक्रम में गुयाना सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. फ्रैंक एंथोनी भी जूम के माध्यम से ऑनलाइन जुड़े। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने न केवल इस रिकॉर्ड टेलीसर्जरी की तकनीकी और चिकित्सकीय विशेषताओं पर चर्चा की, बल्कि भविष्य में इसके संभावित प्रभावों और स्वास्थ्य सेवाओं में आने वाले बदलावों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।

दुनिया की सबसे लंबी दूरी की टेलीसर्जरी

विशेषज्ञों ने बताया कि हाल ही में गुयाना और भारत के बीच एक ऐतिहासिक कार्डियक टेलीसर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। इस प्रक्रिया में डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने गुयाना से बैठकर भारत के इंदौर में मौजूद एक मरीज की कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट (CABG) सर्जरी रोबोटिक सिस्टम की सहायता से की। यह ऑपरेशन लगभग 20,000 किलोमीटर की दूरी पर किया गया, जिसे अब तक की सबसे लंबी दूरी की सफल कार्डियक टेलीसर्जरी माना जा रहा है।

इस प्रक्रिया में विशेष रूप से विकसित SSI Mantra 3 रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम किया गया। हाई-स्पीड फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क, रियल-टाइम विजुअल फीड और अत्यंत कम विलंबता (Low Latency) ने इस जटिल ऑपरेशन को संभव बनाया।

डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने उपलब्धि को बताया महत्वपूर्ण

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि चिकित्सा विज्ञान अब उस दौर में प्रवेश कर रहा है जहां भौगोलिक दूरी मरीजों के उपचार में बाधा नहीं बनेगी। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में विशेषज्ञ सर्जनों की कमी है। ऐसे में टेलीसर्जरी तकनीक दूर-दराज के क्षेत्रों तक उच्च गुणवत्ता वाली सर्जिकल सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उनके अनुसार, यदि नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और रोबोटिक तकनीक का विस्तार होता है, तो भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टर एक देश में बैठकर दूसरे देश के मरीजों का इलाज कर सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह उपलब्धि केवल एक तकनीकी रिकॉर्ड नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

भारत में ऑन-साइट टीम की अहम भूमिका

डॉ. ललित मलिक ने बताया कि टेलीसर्जरी पूरी तरह से स्वचालित प्रक्रिया नहीं होती। ऑपरेशन के दौरान मरीज के पास एक प्रशिक्षित मेडिकल टीम का मौजूद रहना अनिवार्य होता है। ऑपरेशन से पहले भारत में मौजूद टीम ने मरीज की तैयारी, ऑपरेशन के दौरान जरूरी सहायता और सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली। उनके अनुसार, टेलीसर्जरी में रोबोटिक सिस्टम और मानव विशेषज्ञता दोनों का संतुलन बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने आगे कहा कि इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि सही तकनीक और प्रशिक्षित टीम के साथ जटिल हृदय सर्जरी भी हजारों किलोमीटर दूर से सफलतापूर्वक की जा सकती है।

डॉ. मोहित भंडारी ने बताया चिकित्सा शिक्षा में आएगा बड़ा बदलाव

IRCAD इंडिया के प्रेसिडेंट डॉ. मोहित भंडारी ने कहा कि टेलीसर्जरी केवल मरीजों के इलाज तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में दुनिया के किसी भी हिस्से में मौजूद सर्जन लाइव प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। इससे उन्नत सर्जिकल तकनीकों का प्रसार तेज होगा और विकासशील देशों में विशेषज्ञ सर्जनों की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। डॉ. भंडारी के अनुसार, रोबोटिक सर्जरी और टेलीसर्जरी मिलकर स्वास्थ्य सेवा के एक नए युग की शुरुआत कर रही हैं।

कैसे काम करती है टेलीसर्जरी?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद विशेषज्ञों ने बताया कि टेलीसर्जरी में सर्जन सीधे मरीज के पास मौजूद नहीं होता। इसके बजाय वह एक विशेष रोबोटिक कंसोल से ऑपरेशन को नियंत्रित करता है।

सर्जन द्वारा किए गए हर मूवमेंट को अत्यंत तेज गति से इंटरनेट और फाइबर नेटवर्क के माध्यम से मरीज के पास मौजूद रोबोटिक आर्म्स तक पहुंचाया जाता है। वहीं उच्च-रिज़ॉल्यूशन 3D विजुअल सिस्टम सर्जन को ऑपरेशन क्षेत्र की वास्तविक समय में स्पष्ट तस्वीर उपलब्ध कराता है। इस प्रक्रिया की सफलता के लिए कम नेटवर्क विलंबता, स्थिर कनेक्टिविटी और उन्नत रोबोटिक हार्डवेयर बेहद आवश्यक होते हैं।

दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वरदान बनती टेलीसर्जरी

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी चर्चा हुई कि भारत जैसे विशाल देश में जहां कई क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सीमित है, वहां टेलीसर्जरी एक बड़ी भूमिका निभा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में महानगरों में मौजूद अनुभवी सर्जन छोटे शहरों और दूरस्थ इलाकों के मरीजों का इलाज कर सकेंगे। इससे मरीजों को लंबी दूरी की यात्रा और उपचार में होने वाली देरी से राहत मिल सकती है।

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि विशेषज्ञों ने स्वीकार किया कि फिलहाल टेलीसर्जरी के व्यापक उपयोग से पहले उन्हें कई चुनौतियों का समाधान करना होगा।

इनमें मुख्य रूप से –  

  • हाई-स्पीड और विश्वसनीय इंटरनेट नेटवर्क
  • साइबर सुरक्षा
  • कानूनी और नियामकीय ढांचा
  • डॉक्टरों का विशेष प्रशिक्षण
  • रोबोटिक सिस्टम की लागत शामिल हैं

विशेषज्ञों ने कहा कि इन चुनौतियों पर काम किया जा रहा है और आने वाले वर्षों में तकनीक और अधिक सुलभ होने की उम्मीद है।

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