Friday, 02 October 2026
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दिल्ली में 4 साल की बच्ची से दरिंदगी: कोर्ट ने आरोपी को ठहराया दोषी, जज बोले- इतनी छोटी बच्ची के लिए चोटें जानलेवा थीं

मंदिर के पास ले जाकर किया था अपहरण और दुष्कर्म, मेडिकल रिपोर्ट ने खोली दरिंदगी की पूरी कहानी

नई दिल्ली, न्यूज ऑफ द डे

दिल्ली की एक अदालत ने चार साल की मासूम बच्ची के अपहरण और उसके साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपी को दोषी करार दिया है। अदालत ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि पीड़िता को जो अंदरूनी चोटें पहुंचीं, वे किसी सामान्य गिरने से नहीं बल्कि यौन हमले से ही संभव थीं। कोर्ट ने यह भी माना कि बच्ची की उम्र बेहद कम थी और उस पर की गई हिंसा जानलेवा साबित हो सकती थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित सहरावत की अदालत में इस मामले की सुनवाई चल रही थी। आरोपी सनी कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पोक्सो एक्ट के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। अदालत ने सुनाए गए आदेश में आरोपी को 12 वर्ष से कम उम्र की बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और गंभीर यौन हमले का दोषी ठहराया।

मंदिर के पास ले जाकर किया था दुष्कर्म

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 17 नवंबर 2025 को आरोपी बच्ची को बहला-फुसलाकर मंदिर के पास ले गया। वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसे घर के पास छोड़कर फरार हो गया। बच्ची जब घर पहुंची तो उसकी हालत गंभीर थी। परिवार ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने गंभीर अंदरूनी चोटों की पुष्टि की। मामले की जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी पहले से बच्ची के परिवार के संपर्क में था। वह अक्सर बच्ची को चॉकलेट, बिस्कुट और चिप्स दिलाने के बहाने दुकान तक ले जाया करता था। इसी वजह से परिवार को उस पर शक नहीं हुआ। अदालत ने भी अपने फैसले में कहा कि परिवार की सहमति केवल बच्ची को दुकान तक ले जाने के लिए थी, न कि किसी आपराधिक कृत्य के लिए।

मेडिकल रिपोर्ट बनी सबसे बड़ा सबूत

इस मामले में मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों की गवाही अदालत के फैसले में अहम साबित हुई। कोर्ट ने साफ कहा कि पीड़िता को लगी चोटें किसी वस्तु पर गिरने से नहीं हो सकती थीं, जैसा बचाव पक्ष दावा कर रहा था। अदालत ने कहा कि मेडिकल साक्ष्य यह साबित करते हैं कि बच्ची के साथ यौन हमला किया गया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता की उम्र घटना के समय सिर्फ चार साल और आठ महीने थी। इतनी कम उम्र में इस तरह की गंभीर चोटें किसी भी बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। अदालत ने आरोपी के कृत्य को अमानवीय और क्रूर करार दिया।

पोक्सो एक्ट के तहत दोषी करार

अदालत ने आरोपी को बीएनएस की धारा 137(2), 64(2)(1), 65(2) और पोक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी ठहराया। इन धाराओं में नाबालिग बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और गंभीर यौन उत्पीड़न के मामले शामिल हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में अदालतों का सख्त रुख समाज में एक मजबूत संदेश देता है। खासकर बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को देखते हुए पोक्सो कानून के तहत कठोर सजा को जरूरी माना जा रहा है।

बच्चों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

इस फैसले के बाद एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और समाज में बढ़ती यौन हिंसा को लेकर चिंता गहरा गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि परिवारों को बच्चों के आसपास आने-जाने वाले लोगों पर लगातार नजर रखने की जरूरत है। साथ ही बच्चों को ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ जैसी जरूरी जानकारियां देना भी बेहद जरूरी हो गया है।

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IK

Imran Khan

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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