Thursday, 22 October 2026
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लुटियंस दिल्ली में बड़ा एक्शन: पीएम आवास के पास 27 एकड़ का दिल्ली जिमखाना क्लब खाली करने का फरमान, सरकार ने कहा- राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी

5 जून तक जमीन नहीं सौंपी तो पुलिस बल के साथ कब्जा लेगी सरकार, 600 कर्मचारियों की नौकरी पर संकट, कोर्ट जाने की तैयारी में क्लब

नई दिल्ली।

देश के सबसे वीवीआईपी और रसूखदार इलाकों में शुमार लुटियंस दिल्ली का ‘दिल्ली जिमखाना क्लब’ अब इतिहास का हिस्सा बनने जा रहा है। केंद्र सरकार ने एक बेहद कड़ा और चौंकाने वाला आदेश जारी करते हुए क्लब प्रबंधन को 5 जून तक अपना पूरा 27.3 एकड़ का परिसर खाली करने को कहा है। सरकार इस जमीन का इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा, वीवीआईपी सुरक्षा और डिफेंस से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए करेगी। दिल्ली पुलिस को भी अलर्ट कर दिया गया है ताकि डेडलाइन खत्म होने के बाद अगर नियमों के तहत कब्जा लिया जाए, तो कानून-व्यवस्था न बिगड़े।

सुरक्षा का हवाला: पीएम आवास के ठीक बगल में है यह जमीन

दिल्ली जिमखाना क्लब लुटियंस दिल्ली के लोक कल्याण मार्ग पर स्थित है, जो सीधे प्रधानमंत्री आवास से सटा हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा के लिहाज से यह पूरा पॉकेट बेहद संवेदनशील है। सरकार इस 27 एकड़ जमीन को आसपास की अन्य सरकारी जमीनों के साथ जोड़कर एक हाई-सिक्योरिटी जोन और जनहित से जुड़े प्रोजेक्ट्स के रूप में विकसित करना चाहती है। कब्जा मिलते ही यहां की सभी इमारतें, आलीशान लॉन और अन्य संपत्तियां भारत सरकार के अधीन आ जाएंगी।

113 साल पुराने क्लब का इतिहास और विवाद

1913 में शुरुआत: ब्रिटिश काल में इसकी स्थापना ‘इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ के रूप में हुई थी। आजादी के बाद ‘इंपीरियल’ शब्द हटा दिया गया। 1928 की लीज: सफदरजंग रोड की यह कीमती जमीन 1928 में क्लब को खेल और सामाजिक गतिविधियों के लिए स्थायी लीज (Permanent Lease) पर दी गई थी। 2022 से विवाद: अप्रैल 2022 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने क्लब प्रबंधन में कथित गड़बड़ियों के बाद कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय को अपनी तरफ से डायरेक्टर नियुक्त करने का आदेश दिया था, जिसके बाद से ही सरकार और क्लब के बीच रार बढ़ गई थी।

पर्दे के पीछे की कहानी: सिर्फ जिमखाना नहीं, रडार पर हैं कई और ठिकाने

मध्य दिल्ली में लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) के पास चाणक्यपुरी, कनॉट प्लेस और जोर बाग जैसी करीब 19,995 एकड़ कीमती जमीन का जिम्मा है। पिछले कुछ महीनों में L&DO ने अपने कड़े तेवर दिखाए हैं। इसी साल मार्च में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद 9 रफी मार्ग पर स्थित यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया(UNI) के दफ्तर को सील किया गया था। लोक कल्याण मार्ग के आसपास की झुग्गियों को भी सुरक्षा कारणों से खाली कराया जा चुका है।

17 साल पुराने माली ने कहा- काम करते-करते मिली उजाड़े जाने की खबर

सरकार के इस फैसले से क्लब में काम करने वाले करीब 600 कर्मचारियों के चूल्हे बुझने की कगार पर आ गए हैं। पिछले 17 साल से क्लब के टेनिस लॉन की देखभाल कर रहे एक माली ने रुंधे गले से बताया, “हम रोज की तरह काम कर रहे थे, तभी अचानक पता चला कि अब यह जगह हमारी नहीं रही।” अधिकारियों का भी मानना है कि बिना किसी बैकअप प्लान के इतने बड़े और ऐतिहासिक संस्थान को अचानक बंद करना जमीन पर बहुत बड़ी मुश्किल खड़ी करेगा।

राजनीति और विरोध भी शुरू

इस फैसले पर सियासत भी गरमा गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सौरभ भारद्वाज ने तंज कसते हुए कहा कि अब देश का संभ्रांत और रसूखदार वर्ग भी सरकारी कार्रवाई की तपिश महसूस कर रहा है। वहीं, क्लब के कुछ सदस्यों ने सुरक्षा के तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि पास में ही इंदिरा गांधी मेमोरियल है जहां रोज हजारों सैलानी आते हैं, तो फिर सिर्फ क्लब से ही सुरक्षा को खतरा क्यों बताया जा रहा है? फिलहाल, क्लब की गवर्निंग काउंसिल ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है और वे इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

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IK

Imran Khan

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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