Saturday, 24 October 2026
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अवैध रेत खनन की रिपोर्टिंग पर पत्रकारों से मारपीट का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने एमपी सरकार को भेजा नोटिस

  • सुप्रीम कोर्ट में दो पत्रकारों की याचिका पर सुनवाई शुरू
  • अगली सुनवाई 9 जून को, गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग
  • दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही पत्रकार को दी थी दो माह की सुरक्षा

नई दिल्ली, मध्य प्रदेश में अवैध रेत खनन पर रिपोर्टिंग करने वाले दो पत्रकारों के साथ पुलिस द्वारा की गई कथित मारपीट और प्रताड़ना को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुरू कर दी है। मुख्य न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मामले में मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ता पत्रकार शशिकांत जाटव और अमरकांत सिंह चौहान ने सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी से अंतरिम राहत और व्यक्तिगत सुरक्षा की मांग की है। उनका आरोप है कि रिपोर्टिंग के चलते उन्हें जान का खतरा है और राज्य पुलिस उनके पत्रकारिता कार्य को कुचलने की कोशिश कर रही है।

यह मामला उस पृष्ठभूमि में सामने आया है जब दिल्ली हाई कोर्ट ने मई में अमरकांत सिंह चौहान को दो माह की सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया था। चौहान ने बताया था कि पुलिस की लगातार धमकियों से परेशान होकर उन्हें मध्य प्रदेश छोड़ना पड़ा। वे स्वराज एक्सप्रेस के भिंड ब्यूरो प्रमुख हैं और चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन पर रिपोर्टिंग कर रहे थे।

दिल्ली हाई कोर्ट की एकल पीठ के न्यायाधीश रविंदर दुजेडा ने दिल्ली पुलिस को चौहान को सुरक्षा देने का निर्देश देते हुए उन्हें सलाह दी थी कि आगे की राहत के लिए वे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख करें। इस याचिका में चौहान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वरीशा फ़ारसत, तमन्ना पंकज, अनिरुद्ध रमणाथन और प्रिया वत्स ने पैरवी की।

चौहान की याचिका में यह भी कहा गया है कि मध्य प्रदेश में स्वतंत्र पत्रकारों को लक्षित कर के डराने और धमकाने का संगठित प्रयास किया जा रहा है। याचिका में धर्मेंद्र ओझा (न्यूज़ 24), शशिकांत जाटव (बेजोड़ रत्न), और प्रीतम सिंह (NTV भारत) जैसे पत्रकारों के नाम भी शामिल हैं जिन्हें भिंड एसपी कार्यालय में बुलाकर शारीरिक उत्पीड़न, कपड़े उतरवाने, मोबाइल जब्त करने और जबरन वीडियो बयान देने के लिए मजबूर किया गया।

याचिकाकर्ताओं ने यह गंभीर आरोप भी लगाए हैं कि जाटव और चौहान को पुलिस ने पीटकर उनसे जबरन यह बयान दिलवाया कि “मामला सुलझा लिया गया है।”

पत्रकार शशिकांत जाटव ने इस घटनाक्रम पर कहा,
“मुझे भारत की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। हम अपना कर्तव्य निभा रहे थे, एक ऐसे भ्रष्टाचार को उजागर कर रहे थे जो पर्यावरण और आम लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है। अब उम्मीद है कि हमें न्याय मिलेगा।”

वहीं वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार शर्मा ने कहा,
“यह केवल पत्रकारों पर हमला नहीं है, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा प्रहार है। ऐसे में न्यायपालिका की भूमिका अहम हो जाती है, जो आम लोगों में न्याय की उम्मीद बनाए रखती है।”

यह मामला देश में पत्रकारों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगातार बढ़ते संकट की ओर इशारा करता है। सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका और उनकी निष्पक्षता की एक बड़ी परीक्षा के रूप में देखी जा रही है।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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