Saturday, 24 October 2026
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Jamia Protest: जामिया में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर बढ़ता विवाद, प्रशासन ने कक्षाएं ऑनलाइन संचालित करने के आदेश दिए

जामिया में छात्र 2006 में भंग किए गए छात्रसंघ की बहाली और 2026-27 के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा चाहते हैं। प्रशासन ने संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए समिति बनाई है, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्र चुनाव की तारीख जारी करने की मांग पर अड़े हैं।

नई दिल्ली: दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ की बहाली को लेकर जारी आंदोलन के बीच शनिवार, 24 अक्टूबर को छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच टकराव की खबर सामने आई। हालात को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑनलाइन संचालित करने का फैसला लिया है।

इससे पहले प्रशासन 106वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले ‘तालीमी मेला 2026’ को भी रद्द कर चुका है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी छात्र छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित करने और आंदोलन से जुड़े छात्रों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग पर अड़े हैं।

इस विवाद ने उस समय राजनीतिक रंग भी ले लिया, जब शुक्रवार को प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने पहुंचे कांग्रेस सांसद इमरान मसूद समेत 10 लोगों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया।

जामिया में क्यों हो रहा है विरोध प्रदर्शन?

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में मौजूदा आंदोलन की मुख्य मांग विश्वविद्यालय के छात्रसंघ को बहाल करने और चुनाव कराने की है। छात्रों का कहना है कि परिसर में लंबे समय से निर्वाचित छात्र प्रतिनिधित्व की व्यवस्था नहीं है और अब छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।

प्रदर्शन 12 अक्टूबर 2026 को पांच छात्रों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के साथ शुरू हुआ था। इन छात्रों में एबिन बेसिल, मोहम्मद जासिम खान, रेहान हैदर, रेहान पवार और फैजान अली खान के नाम शामिल हैं।

इसके बाद परिसर में धरना, प्रदर्शन और अन्य विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए। छात्रों ने छात्रसंघ चुनाव की अधिसूचना जारी करने के साथ-साथ आंदोलन के दौरान की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग भी उठाई।

छात्रों के अनुसार, उनका उद्देश्य विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि संस्था को दोबारा स्थापित करना है। उनका तर्क है कि छात्रसंघ के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाने और विश्वविद्यालय से जुड़े फैसलों पर अपनी बात रखने के लिए एक औपचारिक मंच मिलता है।

2006 में भंग हुआ था जामिया का छात्रसंघ

इस विवाद की पृष्ठभूमि समझने के लिए छात्रसंघ के इतिहास पर नजर डालना जरूरी है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया का छात्रसंघ मार्च 2006 में भंग कर दिया गया था। इसके बाद से विश्वविद्यालय में छात्रसंघ के नियमित चुनाव नहीं हुए हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, उस समय परिसर में हिंसा और शैक्षणिक गतिविधियों में व्यवधान की घटनाओं के बाद छात्रसंघ को भंग किया गया था। अब करीब दो दशक बाद छात्र संगठन इसकी बहाली की मांग कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि छात्रसंघ को बहाल करने के लिए केवल एक समिति गठित करना पर्याप्त नहीं है। वे चाहते हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन चुनाव कराने की औपचारिक घोषणा करे और चुनाव कार्यक्रम जारी करे। इसी मांग को लेकर भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन जारी है।

प्रशासन ने छात्रसंघ के संविधान के लिए बनाई समिति

छात्रों के आंदोलन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रसंघ की बहाली की दिशा में एक प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। 21 अक्टूबर को जामिया ने छात्रसंघ का संविधान तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की। इससे पहले 18 अक्टूबर को छात्रों की मांगों पर बातचीत करने के लिए सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई गई थी।

नई समिति को छात्रसंघ के संविधान का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। उसे वर्ष 2006 में छात्रसंघ भंग किए जाने की परिस्थितियों, संबंधित न्यायिक फैसलों, विश्वविद्यालय के नियमों और 2007 में गठित लिंगदोह समिति की सिफारिशों का अध्ययन करना है। लिंगदोह समिति की सिफारिशें देश में छात्रसंघ चुनावों से जुड़े दिशा-निर्देशों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

विश्वविद्यालय की अधिसूचना के अनुसार, समिति को छात्रों सहित संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श करने और 20 दिसंबर 2026 तक संविधान का मसौदा प्रस्तुत करने को कहा गया है।

हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों ने समिति गठित किए जाने को अपनी मुख्य मांग का समाधान नहीं माना। उनका कहना है कि उन्हें छात्रसंघ चुनाव की अधिसूचना और तारीख चाहिए। प्रशासन की ओर से संविधान तैयार करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बावजूद भूख हड़ताल समाप्त नहीं हुई है।

छात्रों की तीन प्रमुख मांगें क्या हैं?

1) छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित करना: छात्र चाहते हैं कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्रसंघ (JMISU) के 2026-27 चुनावों का कार्यक्रम जल्द जारी किया जाए। वे चाहते हैं कि चुनाव में छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित हो और छात्र प्रतिनिधियों को पूरी प्रक्रिया में शामिल किया जाए।

2) अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेना: प्रदर्शनकारी आंदोलन से जुड़े छात्रों पर की गई कार्रवाई को लिखित रूप में वापस लेने की मांग कर रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 12 से 21 अक्टूबर के बीच आंदोलन से संबंधित मामलों में की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई की समीक्षा करने की बात कही है।

3) मुख्य प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार को हटाना: छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार को उनके पदों से हटाने की मांग भी की है। उनका आरोप है कि आंदोलन के दौरान छात्रों के साथ प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था का रवैया उचित नहीं रहा।

इसके अतिरिक्त, भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस की उपलब्धता और उन्हें डराने-धमकाने से सुरक्षा देने की मांग भी उठाई गई है।

ऑनलाइन हुईं कक्षाएं

24 अक्टूबर को छात्रों और विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों के बीच टकराव की खबर सामने आने के बाद जामिया प्रशासन ने कक्षाएं ऑनलाइन संचालित करने का निर्णय लिया। परिसर में जारी प्रदर्शन और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया है।

विश्वविद्यालय के इस कदम से फिलहाल पढ़ाई को ऑनलाइन माध्यम से जारी रखने की व्यवस्था की गई है। हालांकि, प्रत्यक्ष कक्षाएं दोबारा कब शुरू होंगी, इस बारे में उपलब्ध रिपोर्टों में कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है।

ऑनलाइन कक्षाओं का फैसला ऐसे समय आया है, जब परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। छात्रों को विभागों और केंद्रों में प्रवेश देने से पहले उनकी जांच की जा रही है। इससे पहले सुरक्षा संबंधी चिंताओं के चलते विश्वविद्यालय के डॉ. जाकिर हुसैन पुस्तकालय और पुराने पुस्तकालय को भी एक दिन के लिए बंद किया गया था।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन समाप्त कर सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां बहाल करने की अपील की है। दूसरी ओर, छात्रों की मांगों पर सहमति नहीं बनने से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

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‘फ्री कश्मीर’ के कथित नारों पर विवाद

जामिया में छात्रसंघ की बहाली को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच कथित तौर पर ‘फ्री कश्मीर’ के नारे लगाए जाने की खबरों ने विवाद को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान ऐसे नारे लगाए जाने का दावा किया गया, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्रों ने इससे इनकार किया है।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी इस दावे को खारिज किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान ‘फ्री कश्मीर’ के नारे नहीं लगाए गए। उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और उन्होंने ऐसे नारों की निंदा की।

इसी दौरान विश्वविद्यालय परिसर की दीवारों पर ‘वीसी गो बैक’ जैसे नारे लिखे जाने की भी खबर सामने आई। प्रशासन ने इन नारों की निंदा की और उन्हें लिखने वालों की पहचान करने की बात कही। अधिकारियों ने कुछ स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों के साथ छेड़छाड़ और उनकी वायरिंग को नुकसान पहुंचाए जाने की बात भी कही है।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद समेत 10 लोग हिरासत में

जामिया में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच शुक्रवार, 23 अक्टूबर को कांग्रेस सांसद इमरान मसूद समेत 10 लोगों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। यह कार्रवाई उस समय हुई, जब वे प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने के लिए विश्वविद्यालय के पास पहुंचे थे।

समाजवादी पार्टी के सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी को भी हिरासत में लिए जाने का उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों सांसदों को शाम के समय विश्वविद्यालय के बाहर हिरासत में लिया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वे कथित तौर पर अनुमति के बिना परिसर में प्रवेश कर प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश कर रहे थे।

इस घटनाक्रम पर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार महताब आलम रिजवी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद एक दिन पहले दीवार फांदकर परिसर में दाखिल हुए थे और उनके आने से छात्रों के बीच तनाव बढ़ा। रजिस्ट्रार ने बताया कि इस मामले में दिल्ली पुलिस को शिकायत दी गई है।

‘तालीमी मेला’ भी रद्द

छात्र आंदोलन का असर विश्वविद्यालय के वार्षिक कार्यक्रमों पर भी पड़ा है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने अपने 106वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले ‘तालीमी मेला 2026’ को रद्द कर दिया है।

यह कार्यक्रम 29 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक आयोजित किया जाना था। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करना था। लेकिन परिसर में जारी विरोध प्रदर्शन और सामान्य स्थिति बहाल नहीं होने के कारण प्रशासन ने इसे रद्द करने का निर्णय लिया।

डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर की ओर से 21 अक्टूबर को जारी आंतरिक संदेश में कहा गया कि प्रदर्शनकारी छात्र प्रस्तावित समाधान पर सहमत नहीं हुए हैं और परिसर में सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो सकी है। संदेश में छात्रों, मेहमानों और कार्यक्रम में भाग लेने वालों की सुरक्षा को निर्णय की प्रमुख वजह बताया गया।

तालीमी मेला रद्द किए जाने से यह स्पष्ट है कि छात्रसंघ की बहाली को लेकर जारी गतिरोध का असर अब विश्वविद्यालय की सामान्य गतिविधियों और उसके वार्षिक कार्यक्रमों पर भी पड़ रहा है।

बातचीत से भी नहीं निकला समाधान

प्रशासन ने आंदोलन को समाप्त कराने और छात्रों की शिकायतों पर चर्चा करने के लिए कई स्तरों पर बातचीत की है। 18 अक्टूबर को गठित उच्चस्तरीय समिति ने प्रदर्शनकारी छात्रों से संपर्क किया और 19 अक्टूबर को प्रदर्शन स्थल पर जाकर संवाद शुरू किया। इसके बाद 20 अक्टूबर को छात्र प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी हुई।

विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, बैठक में छात्रों की शिकायतों पर चर्चा की गई, लेकिन बातचीत के बाद तैयार कार्यवाही विवरण पर छात्र प्रतिनिधियों ने सहमति नहीं दी। इसके बाद छात्रसंघ का संविधान तैयार करने के लिए अलग समिति गठित की गई।

प्रशासन का कहना है कि छात्रसंघ की बहाली के लिए कानूनी प्रावधानों, पुराने फैसलों और चुनाव संबंधी नियमों की समीक्षा जरूरी है। वहीं, प्रदर्शनकारी छात्रों का तर्क है कि चुनाव की तारीख घोषित किए बिना संविधान तैयार करने की प्रक्रिया में लंबा समय लग सकता है।

विश्वविद्यालय की ओर से 12 से 21 अक्टूबर के बीच आंदोलन से जुड़े मामलों में की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई की समीक्षा करने की बात भी कही गई है। हालांकि, छात्रों की मांगों और प्रशासन के प्रस्तावों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण आंदोलन जारी है।

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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