Wednesday, 19 August 2026
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जगन्नाथ रथ यात्रा 2025: भक्ति, परंपरा और आस्था का भव्य संगम, स्वर्ण झाड़ू से होगी सफाई, बारिश में निकलेगी यात्रा

नीम की लकड़ी की मूर्तियों से लेकर रथ के पहियों की नीलामी तक, जानिए पुरी की ऐतिहासिक यात्रा से जुड़ी अनोखी परंपराएं और मान्यताएं

ओडिशा के पुरी में हर साल की तरह इस बार भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा श्रद्धा, भव्यता और ऐतिहासिक परंपराओं के साथ निकलेगी। यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और सामाजिक एकता का प्रतीक है।

नीम की लकड़ी की मूर्तियां, हर 12 साल में होती हैं बदलाव
पुरी के जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की मूर्तियां पत्थर की नहीं, बल्कि नीम की लकड़ी से बनी होती हैं। हर 12 वर्ष में इन मूर्तियों को बदलने की परंपरा ‘नवकलेवर’ कहलाती है, जो जीवन के नवसृजन और आध्यात्मिक पुनर्जन्म का प्रतीक मानी जाती है।

बरसात के साथ आती है रथ यात्रा
एक रोचक मान्यता के अनुसार, रथ यात्रा के दिन हर वर्ष बारिश होती है। कहा जाता है कि कभी ऐसा नहीं हुआ कि रथ यात्रा बिना वर्षा के निकली हो—जैसे खुद प्रकृति भी इस उत्सव का हिस्सा बन जाती है।

सोने की झाड़ू से होती है पवित्र सफाई
यात्रा से पूर्व रथ मार्ग की सफाई सोने के हत्थों वाली झाड़ू से की जाती है। यह परंपरा केवल राजपरिवार के वंशजों द्वारा निभाई जाती है और प्रभु के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक मानी जाती है।

रथ निर्माण की खासियतें
भगवान के रथ विशेष लकड़ी ‘दारुक’ से बनाए जाते हैं और इनमें कील या धातु का उपयोग नहीं होता।

  • बलराम का रथ ‘तालध्वज’ (14 पहिए)
  • सुभद्रा का रथ ‘दर्पदलन’ (12 पहिए)
  • जगन्नाथ का रथ ‘नंदीघोष’ (16 पहिए)

प्रत्येक रथ को खींचने के लिए विशेष रस्सियों का प्रयोग होता है जैसे शंखाचूड़ा नाड़ी, बासुकी और स्वर्णचूड़ा नाड़ी।

रथ खींचना सबके लिए खुला
इस रथ यात्रा में कोई जाति, धर्म या वर्ग का भेद नहीं होता। कोई भी श्रद्धालु भगवान के रथ को खींच सकता है, यह एकता और सेवा की भावना का प्रतीक है।

पारंपरिक वस्त्र और बुनकरों की भूमिका
यात्रा के दौरान भगवान को विशेष रंग-बिरंगे रेशमी व सूती वस्त्र पहनाए जाते हैं। इन वस्त्रों को पुरी के रावतपाड़ा गांव के बुनकर पीढ़ियों से तैयार करते आ रहे हैं।

नीलामी से मिलती है भक्ति की विरासत
रथ यात्रा के बाद रथ के पुराने हिस्सों की नीलामी होती है। श्रद्धालु इन्हें आस्था से खरीदते हैं। 2024 की नीलामी से मंदिर प्रशासन को 55 लाख रुपये की आय हुई थी।

  • जगन्नाथ रथ का पहिया – ₹3 लाख
  • बलराम रथ का पहिया – ₹2 लाख
  • सुभद्रा रथ का पहिया – ₹1.5 लाख

अविवाहित जोड़ों का प्रवेश निषेध
पुरी मंदिर में अविवाहित जोड़ों का एक साथ प्रवेश वर्जित है। मान्यता है कि राधा रानी के श्राप के कारण यह परंपरा बनी हुई है—ऐसे जोड़ों का प्रेम सफल नहीं होता।

2025 में फिर उमड़ेगी भक्ति की गंगा
रथ यात्रा 2025 को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। एक बार फिर पुरी नगरी भक्ति, परंपरा और सांस्कृतिक गौरव की मिसाल बनेगी, जहां बारिश की बूंदें भी आस्था में भीगती नजर आएंगी।

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Aniket

लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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