Saturday, 12 September 2026
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क्या बदलते मौसम और बारिश के पीछे है Bill Gates का हाथ? जानें वायरल दावों की सच्चाई

वायरल वीडियो में Bill Gates पर बड़े आरोप, लेकिन सच्चाई कुछ और जानें SCoPEx और मौसम बदलाव का पूरा सच

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि दुनिया के बड़े कारोबारी और माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स (Bill Gates) एक गुप्त वैश्विक प्रयोग चला रहे हैं। वीडियो में कहा जा रहा है कि ‘Solar Geoengineering’ के तहत हवाई जहाजों से आसमान में केमिकल्स छोड़कर मौसम को नियंत्रित किया जा रहा है, जिससे सूरज की रोशनी प्रभावित हो रही है और अलग-अलग देशों में मौसम बिगड़ रहा है।

हालांकि, जब इस दावे की पड़ताल की गई तो सामने आया कि इसमें कई बातें बढ़ा-चढ़ाकर या गलत तरीके से पेश की गई हैं। जिस SCoPEx प्रोजेक्ट का जिक्र किया जा रहा है, वह अब बंद हो चुका है और इसमें कभी भी बड़े स्तर पर कोई केमिकल स्प्रे नहीं किया गया।

क्या था SCoPEx प्रोजेक्ट?

SCoPEx एक रिसर्च प्रोजेक्ट था, जिसे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने कुछ साल पहले शुरू किया था। इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे के बीच यह समझना था कि क्या सूर्य की किरणों को थोड़ा कम करके पृथ्वी का तापमान नियंत्रित किया जा सकता है।

इसमें किसी बड़े ऑपरेशन की योजना नहीं थी, बल्कि सीमित स्तर पर, वह भी मौसम गुब्बारे के जरिए बहुत कम मात्रा में कैल्शियम कार्बोनेट जैसे कणों के परीक्षण की बात थी। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह प्रयोग कभी जमीन पर लागू ही नहीं हो पाया।

विरोध के चलते रुक गया प्रोजेक्ट

इस प्रोजेक्ट का परीक्षण 2021 में स्वीडन में किया जाना था, लेकिन वहां के स्थानीय समुदायों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद इसे रोक दिया गया। बाद में 2023 में इसे स्थगित कर दिया गया और 2024 में आधिकारिक तौर पर बंद करने का फैसला लिया गया।

भारत के मौसम से जोड़ना गलत

वायरल वीडियो में भारत में हाल ही में हुई असामान्य बारिश और मौसम बदलाव को भी इसी प्रोजेक्ट से जोड़ा जा रहा है। लेकिन मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इसका इस रिसर्च से कोई लेना-देना नहीं है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि इस तरह के प्रयोग स्ट्रैटोस्फियर में प्रस्तावित थे, जबकि बारिश और मौसम से जुड़े बदलाव ट्रोपोस्फियर में होते हैं। भारत में हाल की बारिश प्री-मानसून गतिविधियों, नमी और तापमान में बदलाव का नतीजा है।

क्यों हो रही है बहस?

Solar Geoengineering को लेकर वैज्ञानिकों के बीच भी मतभेद हैं। कुछ का मानना है कि यह भविष्य में एक विकल्प हो सकता है, जबकि कई विशेषज्ञ इसके संभावित दुष्प्रभावों को लेकर चिंतित हैं जैसे बारिश के पैटर्न में बदलाव या पर्यावरण पर असर।

कुल मिलाकर, सोशल मीडिया पर फैल रहे दावे पूरी तरह सटीक नहीं हैं। SCoPEx जैसे प्रोजेक्ट अभी रिसर्च के स्तर तक ही सीमित रहे हैं और इन्हें बड़े पैमाने पर लागू नहीं किया गया है। ऐसे में किसी भी वायरल जानकारी पर भरोसा करने से पहले तथ्यों की जांच करना जरूरी है।

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Shweta Gupta

Shweta Gupta

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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