“मेक इन इंडिया” को मिलेगा बढ़ावा, अगले 12–18 महीनों में पायलट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू करने की तैयारी
नई दिल्ली, 16 मई 2026
भारत के इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक निर्माण क्षेत्र के लिए एक अहम कदम उठाते हुए Intertech और यूके की कंपनी जेम्स ड्यूरन्स एंड संस ने भारत में ओरिजिनल मारकोनाइट अर्थिंग कंपाउंड के निर्माण की योजना की घोषणा की है। यह घोषणा ELASIA 2026 के दौरान की गई, जो पावर, इलेक्ट्रिकल, ऑटोमेशन और लाइटिंग इंडस्ट्री का दक्षिण एशिया का प्रमुख ट्रेड फेयर है।
कंपनियों के अनुसार, यह लोकल मैन्युफैक्चरिंग पहल भारत के तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ केंद्र सरकार के “मेक इन इंडिया” विजन को भी मजबूती देगी।
163 साल पुरानी यूके की कंपनी जेम्स ड्यूरन्स एंड संस दुनिया भर में मारकोनाइट तकनीक के लिए जानी जाती है। कंपनी 2011 से Intertech के साथ मिलकर भारत में इस तकनीक का विस्तार कर रही है। जेम्स ड्यूरन्स एंड संस के डेविड विल्सन ने कहा कि कंपनी ने करीब दो दशक पहले ही भारत को एक महत्वपूर्ण मार्केट के रूप में पहचान लिया था। इसके बाद Intertech के साथ साझेदारी कर देश में मारकोनाइट अर्थिंग कंपाउंड तकनीक को स्थापित किया गया।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में यह साझेदारी लगातार मजबूत हुई है और अब यह तकनीक सोलर एनर्जी, पावर यूटिलिटीज, ऑयल एंड गैस, रेलवे और मेट्रो इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई क्षेत्रों में इस्तेमाल की जा रही है।
कंपनियों ने यह भी बताया कि भारत में स्थानीय उत्पादन शुरू करने के लिए मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस, कच्चे माल की उपलब्धता और तकनीकी तैयारियों पर काम चल रहा है। पहले चरण में अगले 12 से 18 महीनों के भीतर एक पायलट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने की योजना है। इसके बाद भारतीय बाजार की जरूरतों के अनुसार उत्पादन क्षमता बढ़ाई जाएगी।
Intertech के सीईओ गुरुमोहित सिंह ने कहा कि कंपनी हमेशा भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से तैयार किए गए तकनीकी अर्थिंग सॉल्यूशंस पर काम करती रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी ग्राउंडिंग सिस्टम को लागू करने से पहले कंपनी मिट्टी की प्रतिरोधक क्षमता, फॉल्ट करंट कैलकुलेशन और साइट आधारित इंजीनियरिंग विश्लेषण जैसी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का पालन करती है।
मारकोनाइट को मूल रूप से सैन्य और रडार उपयोग के लिए विकसित किया गया था। यह एक कार्बन आधारित कंडक्टिव मटेरियल है, जिसका इस्तेमाल अर्थिंग और लाइटनिंग प्रोटेक्शन सिस्टम में किया जाता है। पारंपरिक ग्राउंडिंग कंपाउंड्स की तुलना में यह तकनीक पानी के बिना काम करने वाली और कम मेंटेनेंस वाली मानी जाती है, जिससे लंबे समय तक भरोसेमंद प्रदर्शन मिलता है।
जेम्स ड्यूरन्स द्वारा उपलब्ध कराई गई मारकोनाइट तकनीक का इस्तेमाल दुनिया भर में कई महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर और रक्षा परियोजनाओं में किया जा चुका है। इनमें ब्रिटिश टेलीकॉम, यूके मिनिस्ट्री ऑफ डिफेन्स, रॉयल एयर फोर्स और सऊदी अरामको जैसी संस्थाएं शामिल हैं।
भारत में Intertech ने औद्योगिक और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में मजबूत मौजूदगी बनाई है। कंपनी के प्रोजेक्ट्स और क्लाइंट्स में टाटा स्टील, अपोलो हॉस्पिटल्स, मदरसन सूमी, स्टड्स, अवाडा एनर्जी, भारतीय वायु सेना, भारतीय सेना और दिल्ली मेट्रो जैसी संस्थाएं शामिल हैं।
कंपनियों का कहना है कि भारत में ओरिजिनल मारकोनाइट अर्थिंग कंपाउंड के स्थानीय निर्माण से देश को विश्वस्तरीय अर्थिंग तकनीक की बेहतर पहुंच मिलेगी और साथ ही भारत के लंबे समय के इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग लक्ष्यों को भी मजबूती मिलेगी।
