Friday, 11 September 2026
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EPS-95 योजना: श्रम मंत्री ने दिया था आश्वसान, तब भी पूरी नहीं हुईं पेंशनभोगियों की मांगे, दोबारा अनशन शुरू करने पर हैं मजबूर

न्यूनतम पेंशन 7,500 रुपये करने की मांग को लेकर पेंशनभोगी शुरू करेंगे आमरण अनशन, पहले प्रांतवार क्रमिक अनशन से शुरूआत करने की चेतावनी

31 जनवरी से जंतर मंतर पर स्थगित अनशन किया जाएगा शुरू

पेंशनभोगी महंगाई भत्ते के साथ मूल पेंशन 7,500 मासिक करने और मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं देने समेत अन्य मांग भी कर रहे

नई दिल्ली।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ( ईपीएफओ) की EPS-95 योजना के दायरे में आने वाले कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की न्यूनतम पेंशन 7,500 रुपये मासिक किये जाने समेत अन्य मांगों को लेकर पेंशनभोगी ईपीएस 95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति के नेतृत्व में राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर दोबारा आमरण अनशन शुरू करेंगे। पेंशनभोगियों को श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव ने आश्वासन दिया था कि उनकी मांगों पर जल्द ही कुछ किया जाएगा लेकिन अभी तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जा सका। इस वजह से पेंशनभोगी नाराज हैं। अगर उनकी मांगों को अब भी नहीं पूरा किया गया तो 31 जनवरी से दोबारा से अनशन शुरू करने की चेतावनी है। समिति का कहना है कि पहले प्रांत वार क्रमिक अनशन से शुरूआत की जाएगी, अगर मांगों पर तत्काल कोई निर्णय नही लिया गया तो फिर इस आंदोलन को आमरण अनशन में बदल दिया जाएगा। इस आंदोलन में देश भर के 50 हजार से अधिक पेंशनभोगी शामिल होंगे।

पेंशनभोगी महंगाई भत्ते के साथ मूल पेंशन 7,500 रुपये मासिक करने, पेंशनभोगियों के पति या पत्नी को मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं देने समेत अन्य मांग कर रहे हैं। वर्तमान में कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस)-95 के तहत न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये महीना है। समिति के अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत (सेवानिवृत्त) ने कहा, ‘‘ यह हमारी अंतिम चेतावनी है। बार-बार आश्वासन के बाद भी हमारी मांगों को लेकर अभी तक कुछ कार्रवाई नहीं की गई है। अगर हमारी मांगे नहीं मांगी गईं तो हम आमरण अनशन करेंगे। उससे पहले 31 जनवरी से प्रांत वार क्रमिक अनशन से आंदोलन की शुरूआत की जाएगी। अगर उसके बाद भी सरकार ने कोई एक्शन नहीं लिया तो फिर आमरण अनशन के अलावा कोई चारा नहीं है। “

उल्लेखनीय है कि ईपीएस (कर्मचारी पेंशन योजना) 95 के तहत आने वाले कर्मचारियों के मूल वेतन का 12 प्रतिशत हिस्सा भविष्य निधि में जाता है। वहीं नियोक्ता के 12 प्रतिशत हिस्से में से 8.33 प्रतिशत कर्मचारी पेंशन योजना में जाता है। इसके अलावा पेंशन कोष में सरकार भी 1.16 प्रतिशत का योगदान करती है। कमांडर अशोक राउत का दावा है, ‘‘तीस–तीस साल काम करने और ईपीएस आधारित पेंशन मद में निरंतर योगदान करने के बाद भी कर्मचारियों को मासिक पेंशन के रूप में इतनी कम राशि मिल रही है, जिससे कर्मचारियों और उनके परिजनों की गुजर–बसर करना कठिन है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की सही व्याख्या न करते हुए दिनांक 01.09.2014 के पहले के सेवा निवृत्त पेंशनर्स को उच्च पेंशन लाभ से वंचित रखा जा रहा है

इसलिए सरकार से एक बार फिर अनुरोध किया जाएगा कि 75 लाख वृद्धजनों को भयंकर ठंड में सड़कों पर बैठने को मजबूर न करें, तत्काल न्यूनतम पेंशन में बढ़ोत्तरी की घोषणा इसी बजट में कर दें। ’’

बता दें कि पिछले 7 वर्षों से देश भर के 28 राज्यों में ईपीएस 95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग के लिए हर प्रकार का आंदोलन, धरना-प्रदर्शन कर चुकी है। सड़क से लेकर संसद तक पेंशनों की मांगों को पुरजोर तरीके से उठाया गया। प्रधानमंत्री से लेकर सभी केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, पक्ष-विपक्ष के सांसदों के सामने पेंशनों की आर्थिक बदहाली का खुलासा कर ज्ञापन दिया गया। 7 दिसंबर 2023 को रामलीला मैदान में विशाल रैली की गई, 8 दिसंबर को जंतर मंतर पर क्रमिक अनशन किया गया और 13 दिसंबर को यह आमरण अनशन में बदल गया। श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव ने 14 दिसंबर 2023 को प्रतिनिधि मंडल को बुलाकर शीध्र समाधान करने का आश्वासन दिया। उस आश्वासन के बाद आमरण अनशन स्थगित कर दिया गया था। लेकिन उस आश्वासन के बाद भी पेंशनर्स की मांगों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिससे पेंशनर्स के सब्र का बांध टूट गया। सरकार को इस जनवरी की शुरूआत में नोटिस देने के बाद देशभर के 110 ईपीएफओ कार्यालयों पर जोरदार प्रदर्शन भी किया गया। लेकिन मांगे पूरी नहीं होने पर अब 31 जनवरी से दोबारा स्थगित अनशन शुरू करने की सरकार को चेतावनी दी गई है।

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लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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