मनरेगा की जगह लागू VB-G RAM G के पहले महीने में रोजगार 50% तक घट गया। 125 दिन की गारंटी के बावजूद जुलाई के आंकड़े क्या कहते हैं? जानिए पूरी कहानी।
नई दिल्ली: ग्रामीण भारत में रोजगार की गारंटी देने वाली देश की सबसे बड़ी योजनाओं में शामिल रही मनरेगा अब इतिहास का हिस्सा बन चुकी है। इसकी जगह 1 जुलाई 2026 से ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM G लागू हो चुका है।
सरकार ने इसे केवल नाम बदलने वाली योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़े सुधार के तौर पर पेश किया था। इसके तहत रोजगार की कानूनी गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन करने, गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियां बनाने, तकनीक के इस्तेमाल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का दावा किया गया।
लेकिन नई व्यवस्था के पहले ही महीने के आंकड़े ने सरकार के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आधिकारिक ग्रामीण रोजगार डैशबोर्ड पर रविवार, 9 अगस्त तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में VB-G RAM G के तहत 7.67 करोड़ व्यक्ति-दिवस (person-days) का रोजगार दर्ज हुआ। जुलाई 2025 में पुराने मनरेगा के तहत यह आंकड़ा 15.33 करोड़ व्यक्ति-दिवस था। यानी सालाना आधार पर करीब 49.94 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।
रोजगार पाने वाले ग्रामीण परिवारों की संख्या में भी बड़ी कमी दिखी। जुलाई 2026 में करीब 68.94 लाख परिवारों ने इस योजना के तहत काम किया, जबकि जुलाई 2025 में मनरेगा के तहत यह संख्या लगभग 1.42 करोड़ परिवार थी। यानी इसमें करीब 51.45 फीसदी की गिरावट आई।
आखिर क्या है VB-G RAM G?
VB-G RAM G यानी विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025 को ग्रामीण रोजगार की पुरानी व्यवस्था में व्यापक बदलाव के रूप में लाया गया। संसद ने दिसंबर 2025 में इसे पारित किया और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद यह कानून बन गया।
इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ गांवों में ऐसी परिसंपत्तियां तैयार करना है जो लंबे समय तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकें।
इस कानून के तहत प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक के मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है। इसके लिए परिवार के वयस्क सदस्यों को अकुशल शारीरिक श्रम करने की इच्छा जतानी होगी। रोजगार मांगने के बाद 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध नहीं कराने पर बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान भी बरकरार रखा गया है।
सरकार के अनुसार नई व्यवस्था का लक्ष्य सिर्फ मजदूरी देना नहीं, बल्कि रोजगार को ग्रामीण विकास से जोड़ना है। इसके तहत पानी की सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, आजीविका से जुड़े कार्य और अत्यधिक मौसम व आपदा से निपटने वाली परिसंपत्तियों पर ज्यादा जोर दिया गया है।
क्या थी मनरेगा स्कीम?
VB-G RAM G से पहले ग्रामीण रोजगार की व्यवस्था महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत चलती थी। इसे 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के रूप में लागू किया गया था और बाद में 2009 में इसका नाम बदलकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) किया गया।
मनरेगा का मूल उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को साल में कम से कम 100 दिनों के अकुशल मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी देना था। योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका मांग-आधारित स्वरूप था। यानी ग्रामीण परिवार काम की मांग कर सकता था और निर्धारित समय में रोजगार उपलब्ध नहीं होने पर बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान था।
समय के साथ मनरेगा के जरिए ग्रामीण सड़कों, तालाबों, जल संरक्षण, भूमि विकास और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों से जुड़े हजारों काम किए गए। हालांकि सरकार ने इसके क्रियान्वयन में कई कमियां भी गिनाईं। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में काम की गुणवत्ता, खर्च और जमीन पर काम की स्थिति के बीच अंतर, मशीनों के इस्तेमाल तथा डिजिटल उपस्थिति व्यवस्था को दरकिनार करने जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया।
मनरेगा का नाम क्यों बदला गया?
यह बदलाव सिर्फ प्रशासनिक नहीं था, बल्कि राजनीतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बना। दिसंबर 2025 में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में VB-G RAM G विधेयक पेश किया था। सरकार ने इसे “विकसित भारत@2047” के लक्ष्य के साथ जोड़ते हुए ग्रामीण रोजगार और विकास को एक साथ आगे बढ़ाने वाला कानून बताया।
सरकार का कहना था कि नई व्यवस्था ग्रामीण परिवारों को अधिक रोजगार, बेहतर आय सुरक्षा और टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण से जोड़ेगी। साथ ही रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करना भी सरकार के प्रमुख दावों में शामिल रहा।
लेकिन विपक्ष ने MGNREGA से महात्मा गांधी का नाम हटाने पर कड़ी आपत्ति जताई। विधेयक पारित होने के दौरान नाम को लेकर संसद में विरोध भी हुआ। आलोचकों ने सवाल उठाया कि यदि सरकार वास्तव में रोजगार गारंटी को मजबूत करना चाहती है तो नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी।
125 दिनों की रोजगार गारंटी
नई योजना का सबसे बड़ा वादा 100 की जगह 125 दिन का रोजगार था। लेकिन जुलाई के आंकड़े इस वादे के सामने शुरुआती चुनौती पेश कर रहे हैं।
जुलाई 2026 में VB-G RAM G के तहत 7.67 करोड़ व्यक्ति-दिवस दर्ज हुए, जबकि जुलाई 2025 में MGNREGS के तहत 15.33 करोड़ व्यक्ति-दिवस थे। इसका मतलब है कि रोजगार के कुल व्यक्ति-दिवस लगभग आधे रह गए।
और यह सिर्फ पिछले साल के जुलाई से तुलना नहीं है। पिछले चार वर्षों में जुलाई के दौरान औसतन करीब 21.56 करोड़ व्यक्ति-दिवस रोजगार दर्ज हुआ था। इसके मुकाबले जुलाई 2026 का आंकड़ा काफी कम है। रोजगार पाने वाले परिवारों का चार साल का औसत करीब 1.72 करोड़ था, जबकि इस साल जुलाई में यह संख्या 68.94 लाख रही।
क्या इसे सरकार की नाकामी माना जाए?
पहले महीने के आंकड़ों को देखते हुए सवाल उठना स्वाभाविक है, लेकिन इसे अभी सीधे योजना की “विफलता” कहना जल्दबाजी होगी।
सबसे पहली वजह है कि VB-G RAM G अभी 1 जुलाई 2026 से ही लागू हुई है। केंद्र सरकार के मुताबिक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी-अपनी योजनाओं को अधिसूचित कर दिया था और नई व्यवस्था के लिए प्रशासनिक तथा डिजिटल ढांचा तैयार किया गया था।
दूसरी वजह कृषि गतिविधि की है। जुलाई खरीफ फसलों की बुवाई का महत्वपूर्ण समय होता है। नई व्यवस्था में राज्यों को कृषि के व्यस्त बुवाई और कटाई मौसम के दौरान कुल मिलाकर 60 दिनों तक रोजगार कार्य रोकने की अनुमति है। सरकार का तर्क है कि इससे खेतों में मजदूरों की उपलब्धता और ग्रामीण रोजगार योजना के बीच संतुलन बनाया जा सकेगा।
हालांकि इस साल की करीब 50 फीसदी गिरावट में मौसमी रोक का कितना योगदान है, इसका स्पष्ट आंकड़ा अभी सार्वजनिक नहीं है। इसलिए पूरी गिरावट को केवल कृषि सीजन से जोड़ना भी सही नहीं होगा।
बारिश, बाढ़ का ग्रामीण काम पर असर
जुलाई के आंकड़ों पर मौसम का असर भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक 1 जून से 3 अगस्त के बीच देश के 741 जिलों में से करीब आधे जिलों में सामान्य से कम या गंभीर रूप से कम बारिश दर्ज की गई थी। वहीं खरीफ फसल के तहत 31 जुलाई तक बोया गया क्षेत्र 894.22 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 920.72 लाख हेक्टेयर से 26.5 फीसदी कम था।
ऐसी परिस्थितियों में ग्रामीण मजदूरों की रोजगार मांग और काम की उपलब्धता दोनों प्रभावित हो सकते हैं। कुछ इलाकों में खेती का काम बढ़ सकता है, जबकि कुछ जगह बारिश या बाढ़ के कारण सरकारी कार्यों की गति धीमी हो सकती है।
नई योजना में कितनी मजदूरी मिलेगी?
सरकार ने नई योजना के तहत मजदूरी दरों को भी संशोधित किया है। 1 जुलाई 2026 से VB-G RAM G के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नई मजदूरी दर लागू हुई। सरकार के मुताबिक किसी भी राज्य में अधिसूचित दर 300 रुपये प्रतिदिन से कम नहीं है और औसत वृद्धि 10 फीसदी से अधिक रही। कुछ राज्यों में वृद्धि 15 से 25 फीसदी तक रही।
नई दरें राज्य के हिसाब से अलग हैं। कई दक्षिणी राज्यों में दैनिक मजदूरी 360 रुपये से ऊपर है और कुछ जगह यह 409 रुपये तक पहुंचती है। वहीं कई ऐसे राज्य हैं जहां नई दर 300 रुपये तय की गई है।
केंद्र और राज्यों की जिम्मेदारी
नई व्यवस्था और मनरेगा के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर फंडिंग मॉडल है।
VB-G RAM G एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है। सामान्य राज्यों के लिए केंद्र और राज्य के बीच फंडिंग अनुपात 60:40 रखा गया है। उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों तथा विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह अनुपात 90:10 है, जबकि बिना विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्र 100 फीसदी फंड देता है।
यही व्यवस्था राज्यों पर पहले की तुलना में अधिक वित्तीय जिम्मेदारी डालती है। भविष्य में यदि किसी राज्य में रोजगार की मांग तेजी से बढ़ती है, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य अपने हिस्से का पैसा कितनी तेजी से उपलब्ध करा पाता है।
यानी 125 दिनों की कानूनी गारंटी और वास्तव में 125 दिन काम उपलब्ध होने के बीच वित्तीय क्षमता और प्रशासनिक क्रियान्वयन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
सरकार ने 95,692 करोड़ रुपये का बजट रखा
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए VB-G RAM G के लिए 95,692 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इसे ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए अब तक का सबसे बड़ा आवंटन बताया है।
सरकार का कहना है कि यह राशि ग्रामीण रोजगार की मांग पूरी करने और योजना को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए पर्याप्त आधार देती है।
मंत्रालय के मुताबिक 1 जुलाई से योजना लागू होने के बाद 98 फीसदी से अधिक रोजगार मांगने वाले ग्रामीण परिवारों को काम ऑफर किया गया और 1.33 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण श्रमिकों को उनकी मांग के आधार पर रोजगार की पेशकश की गई। नौ लाख से ज्यादा सक्रिय कार्यस्थलों पर काम चलने की बात भी मंत्रालय ने कही है।
महिलाओं की भागीदारी भी अहम
ग्रामीण रोजगार योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी हमेशा महत्वपूर्ण रही है। सरकार के अनुसार VB-G RAM G के तहत अब तक पैदा हुए व्यक्ति-दिवसों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 63 फीसदी रही है। कानून में महिलाओं की कम से कम एक-तिहाई भागीदारी का प्रावधान है।

अगर यह भागीदारी लंबे समय तक बनी रहती है, तो नई योजना ग्रामीण महिलाओं की आय और आर्थिक भागीदारी बढ़ाने का माध्यम बन सकती है।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
VB-G RAM G के सामने असली परीक्षा आने वाले महीनों में होगी। जुलाई का आंकड़ा कमजोर जरूर है, लेकिन यह योजना के शुरुआती संक्रमण काल का आंकड़ा भी है।
सरकार को यह साबित करना होगा कि 125 दिन की कानूनी गारंटी केवल कागज पर मौजूद संख्या नहीं है। ग्रामीण परिवार जब काम मांगें, तब उन्हें समय पर काम मिले, मजदूरी समय पर मिले और राज्य सरकारें अपने हिस्से का वित्तीय योगदान उपलब्ध करा सकें। यही इस योजना की वास्तविक सफलता मानी जायेगी।
इसके साथ यह भी जरूरी होगा कि कृषि सीजन में रोजगार रोकने की व्यवस्था का इस्तेमाल स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार हो और इसका असर उन परिवारों पर न पड़े जिनके पास खेती के अलावा आय का दूसरा स्रोत नहीं है।
आने वाले महीनों के रोजगार आंकड़े बताएंगे कि जुलाई की गिरावट केवल संक्रमण और मौसमी परिस्थितियों का असर थी या ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में वास्तव में कोई बड़ा बदलाव आ रहा है। फिलहाल 125 दिन के वादे और जमीन पर मिल रहे रोजगार के बीच का अंतर ही VB-G RAM G की सबसे बड़ी परीक्षा है।
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