Sunday, 11 October 2026
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डॉ. के. ए. पॉल ने मोदी-शाह से एफसीआरए संशोधन विधेयक वापस लेने की मांग की

डॉ. के. ए. पॉल ने कहा कि अमेरिकी सांसद राइली मूर की टिप्पणी एफसीआरए संशोधनों पर बढ़ती वैश्विक चिंता का संकेत है और सरकार से पुनर्विचार की अपील की

नई दिल्ली: ग्लोबल पीस इनिशिएटिव के संस्थापक डॉ. के. ए. पॉल ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधनों को वापस लेने की अपील की। उनका कहना है कि यह विधेयक भारत की अर्थव्यवस्था, लोकतांत्रिक संस्थाओं और वैश्विक छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

एक सार्वजनिक वीडियो संदेश में डॉ. पॉल ने सरकार से विधेयक को फिलहाल आगे न बढ़ाने और सभी संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा के बाद ही निर्णय लेने का आग्रह किया। उनके अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों से नागरिक समाज संगठनों, धर्मार्थ संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के बीच अनिश्चितता बढ़ सकती है।

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डॉ. पॉल ने दावा किया कि इस विधेयक को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता व्यक्त की जा रही है। उन्होंने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं, अमेरिकी सांसदों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और भारतीय गैर-सरकारी संगठनों ने इस पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, इससे धार्मिक और धर्मार्थ संस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं, विदेशी निवेश पर असर पड़ सकता है और भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है।

उन्होंने अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद राइली मूर की टिप्पणी का भी उल्लेख किया। डॉ. पॉल के अनुसार, मूर ने प्रस्तावित संशोधनों पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि किसी संस्था का एफसीआरए पंजीकरण समाप्त होता है, तो उसकी संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं। वहीं, भारत सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य विदेशी अनुदान प्राप्त संस्थाओं की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना और कानूनी प्रावधानों को स्पष्ट करना है।

डॉ. पॉल ने कहा कि यदि विधेयक मौजूदा स्वरूप में पारित हुआ तो निवेश, रोजगार और दीर्घकालिक आर्थिक विकास प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने सरकार से संवाद, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए पुनर्विचार करने की अपील की।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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