Monday, 13 July 2026
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डॉ. के.ए. पॉल ने 8 करोड़ के आयकर नोटिस को बताया ‘राजनीतिक उत्पीड़न’, तत्काल वापसी की मांग

नोटिस न लौटाने पर अनिश्चितकालीन उपवास की चेतावनी, कहा – न्याय न मिला तो सड़कों पर उतरूंगा

नई दिल्ली: वैश्विक शांति दूत और समाजसेवी डॉ. के.ए. पॉल ने विशाखापट्टनम के आयकर आयुक्त द्वारा उनकी संस्था पर ₹8 करोड़ के ब्याज का नोटिस भेजे जाने को राजनीतिक उत्पीड़न बताया है।

डॉ. पॉल ने कहा कि उनकी संस्था एक पंजीकृत गैर-लाभकारी चैरिटेबल संगठन है, जिसे भारतीय कानून के तहत कर से छूट प्राप्त है। यह संस्था पिछले चार दशकों से लाखों अनाथों, विधवाओं और गरीब तबकों की सेवा कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला न्यायालय में लंबित है, तो विभाग इतनी जल्दबाजी में कार्रवाई क्यों कर रहा है।

उन्होंने बताया कि विशाखापट्टनम की ही कुछ अन्य संस्थाओं जैसे शंकरा मठ को 25 वर्षों की देरी के मामलों में छूट दी गई है, जबकि उनका मामला सिर्फ छह साल की देरी का है। इसके बावजूद इसे दोबारा खोला गया, जो साफ तौर पर चयनात्मक उत्पीड़न और राजनीतिक दबाव का संकेत देता है।

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डॉ. पॉल ने यह भी कहा कि यह कार्रवाई संभवतः आंध्र प्रदेश की राजनीतिक ताकतों द्वारा उनकी जुबली हिल्स से प्रस्तावित चुनावी उम्मीदवारी को रोकने के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा, “यह लोगों की आवाज़ को दबाने की सुनियोजित कोशिश है।”

उन्होंने सरकार पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब लगातार सरकारें बड़े कॉरपोरेट घरानों के ₹15 लाख करोड़ से अधिक के कर्ज माफ कर चुकी हैं, तब गरीबों की सेवा करने वाली संस्थाओं को परेशान किया जा रहा है।

डॉ. पॉल ने 21 सितंबर 2025 को दर्ज एक मानहानि शिकायत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप निष्पक्ष मीडिया रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिए कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा, “जो लोग झूठ फैलाते हैं, उन्हें न्याय का सामना करना पड़ेगा।”

उन्होंने नागरिकों और खासकर जुबली हिल्स के युवाओं से भ्रष्टाचार और राजनीतिक प्रतिशोध के खिलाफ बूथ स्तर पर संगठित होने की अपील की। उन्होंने कहा, “मैंने भारत के लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और अर्थव्यवस्था के लिए संघर्ष किया है — विजाग स्टील प्लांट को बचाने से लेकर किसानों, महिलाओं और बेरोजगारों के हक की लड़ाई तक। मुझे डराया नहीं जा सकता।”

डॉ. पॉल ने आयकर आयुक्त से पांच दिनों के भीतर नोटिस वापस लेने की मांग की और कहा कि अगर न्याय नहीं मिला तो वे शांतिपूर्ण विरोध और अनिश्चितकालीन उपवास करेंगे। उन्होंने बताया कि यह मामला 2007 की उस घटना की याद दिलाता है, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के शासनकाल में राजनीतिक दान न देने के कारण ₹22 करोड़ का मनमाना कर दावा लगाया गया था।

अंत में डॉ. पॉल ने कहा, “मेरा जीवन गरीबों की सेवा और अन्याय के खिलाफ संघर्ष के लिए समर्पित है। कोई भी धमकी या दबाव मुझे रोक नहीं सकता। मैं सभी भारतीयों से इस न्याय की लड़ाई में साथ आने की अपील करता हूं।”

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Mansi Sharma

लेखक

Mansi Sharma is a journalist covering Global Affairs, and wellness, known for turning complex ideas into sharp, engaging narratives. Her work is driven by curiosity, depth, and a constant urge to question and explore. When she’s not writing, you’ll often find her diving into new ideas—preferably with a cup of coffee in hand, one sip at a time.

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