‘The Orange Plague’ करीब 2.5 से 2.6 मीटर ऊंची है और कलाकार के मुताबिक इस पर 23 कैरेट सोने की परत चढ़ाई गई है। सोने की चमक को भी कलाकृति के व्यंग्यात्मक संदेश का हिस्सा बनाया गया है।
स्ट्रासबर्ग: यूरोपीय संसद की इमारत में इन दिनों एक ऐसा राजनीतिक आर्टवर्क चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जिसे देखकर लोग हैरान भी हो रहे हैं और इसके संदेश पर बहस भी कर रहे हैं। डेनमार्क के कलाकार जेंस गाल्शियोत (Jens Galschiøt) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक नग्न और 23 कैरेट सोने की परत चढ़ी विशाल प्रतिमा तैयार की है। ‘The Orange Plague’ नाम की यह मूर्ति ट्रंप को एक कमजोर व्यक्ति के कंधों पर बैठे हुए दिखाती है। इसके आधार पर उन्हें ‘The King of Injustice’ यानी ‘अन्याय का राजा’ कहा गया है।
यह मूर्ति स्ट्रासबर्ग स्थित यूरोपीय संसद भवन में एक अस्थायी प्रदर्शनी का हिस्सा है। इसे डेनिश यूरोपीय सांसद पेर क्लॉसन (Per Clausen) के निमंत्रण पर वहां प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी गुरुवार, 8 अक्टूबर तक चलने वाली है। इसके बाद कलाकार इसे नवंबर में तुर्किये में होने वाले COP31 जलवायु सम्मेलन के दौरान भी प्रदर्शित करने की योजना बना रहे हैं।
कैसा है ट्रंप का ‘The Orange Plague’ स्टैच्यू?
यह मूर्ति पहली नजर में ही अपने आकार और अनोखी प्रस्तुति की वजह से ध्यान खींचती है। इसमें डोनाल्ड ट्रंप को बिना कपड़ों के एक बेहद छोटे और कमजोर दिखाए गए व्यक्ति के कंधों पर बैठे हुए दर्शाया गया है। पूरी मूर्ति पर 23 कैरेट सोने की पत्तियों की परत चढ़ाई गई है, जिससे इसका रूप और भी आकर्षक नजर आता है।
मूर्ति में दिखाई गई चीजें भी इसके व्यंग्यात्मक संदेश का हिस्सा हैं। ट्रंप के एक हाथ में न्याय का तराजू है, जबकि दूसरे हाथ में गोल्फ क्लब नजर आता है। उनके पैरों के पास रखा गोलाकार ग्लोब गोल्फ बॉल जैसा दिखाई देता है। इन प्रतीकों के जरिए कलाकार ने ट्रंप की सार्वजनिक छवि, सत्ता, न्याय व्यवस्था और उनके गोल्फ प्रेम को एक ही दृश्य में जोड़ने की कोशिश की है।
मूर्ति के नीचे बने प्लेटफॉर्म पर ‘The Orange Plague’ लिखा गया है। इसके साथ एक व्यंग्यात्मक संदेश भी दिया गया है, जो इस पूरे आर्टवर्क के राजनीतिक अर्थ को और स्पष्ट करता है। मूर्ति इस तरह सिर्फ ट्रंप के चित्रण तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसके जरिए कलाकार सत्ता, राजनीतिक प्रभाव और उसके दिखावे पर अपनी टिप्पणी पेश करता है।
‘The Orange Plague’ नाम क्यों रखा गया?
‘Orange Plague’ का हिंदी अर्थ मोटे तौर पर ‘नारंगी महामारी’ या ‘नारंगी प्लेग’ समझा जा सकता है। यहां ‘Orange’ का संबंध ट्रंप की सार्वजनिक छवि से जोड़ा गया है, जबकि ‘Plague’ यानी महामारी शब्द के जरिए कलाकार यह संदेश देना चाहते हैं कि उन्हें ट्रंप की राजनीतिक नीतियों का प्रभाव व्यापक और नुकसानदेह लगता है।
कलाकार जेंस गाल्शियोत ने ट्रंप की नीतियों को खास तौर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने की कोशिशों और नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था के संदर्भ में निशाना बनाया है। उनकी वेबसाइट पर भी इस मूर्ति को ट्रंप और अमेरिका की ग्रीन ट्रांजिशन तथा नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर उनके दृष्टिकोण के खिलाफ व्यंग्यात्मक विरोध के रूप में पेश किया गया है।
गाल्शियोत के मुताबिक, ट्रंप दुनिया में सत्ता और प्रभाव के ऐसे प्रतीक बन गए हैं, जिनके फैसलों का असर अमेरिका की सीमाओं से बाहर भी पड़ता है। इसलिए उन्होंने मूर्ति को किसी बंद गैलरी के बजाय राजनीतिक गतिविधियों के बीच प्रदर्शित करने का रास्ता चुना।
मूर्ति के नीचे लिखी लाइनें क्या कहती हैं?
इस आर्टवर्क का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सिर्फ ट्रंप की आकृति नहीं, बल्कि उसके नीचे लिखा संदेश भी है:
“मैं एक आदमी की पीठ पर बैठा हूं। वह मेरे बोझ के नीचे डूब रहा है। मैं उसकी मदद के लिए कुछ भी करूंगा। बस उसकी पीठ से नीचे नहीं उतरूंगा।”
इसके नीचे “The King of Injustice” यानी अन्याय का राजा लिखा है।

यहां ‘आदमी’ उस छोटे और कमजोर व्यक्ति का प्रतीक है, जिसके ऊपर ट्रंप बैठे हैं। कलाकार का संदेश यह है कि सत्ता में बैठा व्यक्ति या शक्तिशाली व्यवस्था अपने प्रभाव का बोझ आम लोगों और कमजोर वर्गों पर डाल सकती है, लेकिन अपनी स्थिति या विशेषाधिकार छोड़ने को तैयार नहीं होती।
गोल्फ क्लब और ग्लोब का क्या मतलब है?
मूर्ति में गोल्फ क्लब का इस्तेमाल भी जानबूझकर किया गया है। गोल्फ ट्रंप की सार्वजनिक पहचान से जुड़ा हुआ है और वह लंबे समय से इस खेल के प्रति अपने लगाव के लिए जाने जाते हैं।
लेकिन यहां गोल्फ क्लब को दुनिया के आकार वाले गोल्फ बॉल के साथ रखना एक अतिरिक्त अर्थ पैदा करता है। कलाकार के अनुसार, इससे यह संकेत मिलता है कि दुनिया को भी एक ऐसे खेल की वस्तु की तरह देखा जा रहा है, जिस पर शक्तिशाली व्यक्ति अपना प्रभाव डाल सकता है।
वहीं दूसरे हाथ में रखा न्याय का तराजू सत्ता और न्याय के बीच संबंध पर सवाल उठाता है। ‘King of Injustice’ का शीर्षक और तराजू का इस्तेमाल मिलकर एक विरोधाभास बनाते हैं जिस व्यक्ति को न्याय का प्रतीक होना चाहिए, वही कलाकार की कल्पना में ‘अन्याय का राजा’ बना दिया गया है।
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ट्रंप को नग्न क्यों दिखाया गया?
मूर्ति में डोनाल्ड ट्रंप को नग्न दिखाना भी कलाकार की व्यंग्यात्मक राजनीतिक शैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कलाकार जेन्स गाल्शियोत ने इस प्रस्तुति के लिए हैंस क्रिश्चियन एंडरसन की प्रसिद्ध कहानी ‘द एम्परर्स न्यू क्लोथ्स’ से प्रेरणा ली है। कहानी में एक राजा ऐसे कपड़े पहनने का दावा करता है, जो वास्तव में मौजूद ही नहीं होते। दरबारियों और आम लोगों में उसके डर या चापलूसी के कारण कोई भी सच बताने की हिम्मत नहीं करता। आखिरकार एक बच्चा यह कह देता है कि राजा के शरीर पर कोई कपड़े नहीं हैं।
गाल्शियोत ने इसी कहानी के मूल विचार को आधुनिक राजनीतिक संदर्भ में इस्तेमाल किया है। मूर्ति में नग्नता को केवल शारीरिक प्रस्तुति के तौर पर नहीं, बल्कि सत्ता और उसके दिखावे पर टिप्पणी के रूप में देखा गया है। कलाकार के अनुसार, यह प्रतीक उस स्थिति की ओर इशारा करता है, जब किसी शक्तिशाली नेता की छवि, प्रभाव और प्रतिष्ठा के सामने लोग उसके बारे में खुलकर सवाल उठाने से बचते हैं।
इस तरह नग्न आकृति के जरिए कलाकार सत्ता की चमकदार छवि और उसके पीछे मौजूद विरोधाभासों के बीच अंतर को सामने लाने की कोशिश करते हैं। आर्टवर्क का यह हिस्सा एंडरसन की कहानी के जरिए आज की राजनीति पर व्यंग्यात्मक सवाल खड़ा करता है।
यूरोपीय संसद में इसे लगाने की अनुमति कैसे मिली?
आपको बता दें कि, यह यूरोपीय संसद का आधिकारिक आर्टवर्क या संस्थान की आधिकारिक राजनीतिक स्थिति नहीं है। यह एक अस्थायी प्रदर्शनी है, जिसे डेनिश MEP पेर क्लॉसन ने आमंत्रित किया है। संसद के सदस्य कुछ शर्तों के तहत परिसर में प्रदर्शनियों की मेजबानी कर सकते हैं।
क्लॉसन ने मूर्ति के प्रदर्शन का बचाव करते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति इस तरह की मूर्ति को सहन नहीं कर सकता तो उसके लिए दुनिया के राजनीतिक मंच पर जगह नहीं होनी चाहिए।
इससे यह बहस भी शुरू होती है कि राजनीतिक संस्थानों में कला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा क्या होनी चाहिए।
पहले भी हुई है ‘Orange Plague’ की चर्चा
‘The Orange Plague’ कोई ऐसी मूर्ति नहीं है, जो पहली बार सामने आई हो। इसे पहले भी अंतरराष्ट्रीय आयोजनों और विरोध प्रदर्शनों में प्रदर्शित किया जा चुका है।
यह मूर्ति 2025 में ब्राजील के बेलें में COP30 के दौरान दिखाई गई थी। इसके बाद इसे 2026 में म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस और डेनमार्क में भी प्रदर्शित किया गया। कलाकार की योजना इसे COP31 के दौरान तुर्किये के अंताल्या में दोबारा सामने लाने की है।
यानी कलाकार ने इस मूर्ति को सिर्फ एक प्रदर्शनी की वस्तु नहीं बनाया है। वह इसे अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक मंचों तक ले जाकर अपने संदेश को लगातार सामने रखने की कोशिश कर रहे हैं।
कौन हैं कलाकार जेंस गाल्शियोत?
जेंस गाल्शियोत डेनमार्क के ऐसे कलाकार हैं, जिनकी पहचान राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर आधारित बड़े पैमाने की मूर्तियों के लिए है। उनके काम में मानवाधिकार, असमानता, शरणार्थी संकट, जलवायु न्याय और सत्ता के दुरुपयोग जैसे विषय बार-बार दिखाई देते हैं।

उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में ‘’पिलर ऑफ शेम’ (Pillar of Shame) शामिल है। यह मूर्ति 1989 के तियानआनमेन स्क्वायर नरसंहार में मारे गए लोगों की स्मृति से जुड़ी है। इस काम ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक कला के प्रमुख नामों में शामिल किया।
‘द ऑरेंज प्लेग’ भी इसी परंपरा का हिस्सा है, लेकिन इस बार कलाकार ने किसी अमूर्त राजनीतिक व्यवस्था के बजाय सीधे एक मौजूदा वैश्विक नेता को अपनी कला के केंद्र में रखा है।
कला, राजनीति और विरोध का नया मंच
‘द ऑरेंज प्लेग’ की खासियत यह है कि इसे केवल एक विवादित मूर्ति के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि राजनीतिक कला के एक प्रतीक के रूप में भी पेश किया गया है। यह ऐसे समय में सामने आई है, जब जलवायु परिवर्तन, अमेरिका की विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका और बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन को लेकर बहस तेज है।
कलाकार के मुताबिक, सरकारें और गैर-सरकारी संगठन कई बार राजनीतिक या आर्थिक दबावों के चलते कुछ संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखने से बचते हैं। ऐसे माहौल में कलाकारों की भूमिका केवल कला तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे सार्वजनिक बहस में वैकल्पिक आवाज सामने रखने की कोशिश करते हैं।
‘द ऑरेंज प्लेग’ इसी सोच के तहत कला और राजनीतिक टिप्पणी के बीच की सीमा को धुंधला करती है। इसके जरिए कलाकार ने सत्ता, नीतियों और वैश्विक व्यवस्था से जुड़े सवालों को एक दृश्य प्रतीक के माध्यम से सामने रखने की कोशिश की है।

