Tuesday, 13 October 2026
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सरकारी पॉलिटेक्निकों की मूल व्यवस्था बहाल करने की मांग, गोफ्टेड ने राष्ट्रपति से मांगा हस्तक्षेप

राष्ट्रपति को भेजे अंतिम निवेदन में डी-मर्जर, सेवा-पेंशन लाभों की सुरक्षा, नियामकीय समीक्षा और कमेटी की रिपोर्ट पर कार्रवाई का अनुरोध

नई दिल्ली: दिल्ली के राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों को डीएसईयू के अधीन लाए जाने के करीब पाँच वर्ष बाद भी कर्मचारियों की सेवा-स्थिति और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर असमंजस बने रहने का दावा किया गया है। गजेटेड ऑफिसर फोरम फॉर टेक्निकल एजुकेशन, दिल्ली (गोफ्टेड) ने अब राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को अंतिम निवेदन भेजकर मामले में हस्तक्षेप और सरकारी पॉलिटेक्निकों को पुनः डीटीटीई तथा बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन के अधीन लाने की मांग की है।

गजेटेड ऑफिसर फोरम फॉर टेक्निकल एजुकेशन, दिल्ली (गोफ्टेड) ने इस संबंध में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को एक विस्तृत अंतिम निवेदन भेजकर पूरे मामले में संवैधानिक और प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप की अपील की है। संगठन का कहना है कि पिछले लगभग पाँच वर्षों से राजकीय पॉलिटेक्निकों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा-स्थिति, प्रशासनिक नियंत्रण तथा भविष्य को लेकर गंभीर असमंजस बना हुआ है।

संगठन के अनुसार, दिल्ली के राजकीय पॉलिटेक्निक दशकों से डीटीटीई और बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन के अधीन संचालित होते रहे हैं। इन संस्थानों का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर तथा निम्न और मध्यम आय वर्ग के विद्यार्थियों को सस्ती और रोजगारपरक तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराना रहा है। गोफ्टेड का कहना है कि डीएसईयू के अधीन आने के बाद इन संस्थानों की प्रशासनिक, शैक्षणिक और सेवा-संबंधी व्यवस्था में व्यापक बदलाव हुए हैं।

पाँच वर्षों से सेवा-स्थिति स्पष्ट नहीं होने का दावा

गोफ्टेड ने अपने निवेदन में कर्मचारियों की सेवा-स्थिति को सबसे गंभीर मुद्दों में से एक बताया है। संगठन का दावा है कि कर्मचारियों को उनकी स्पष्ट और स्वतंत्र सहमति अथवा विकल्प के बिना अलग विश्वविद्यालयीय ढाँचे से जोड़ा गया तथा लंबे समय तक “डीम्ड डेप्युटेशन” जैसी व्यवस्था में रखा गया।

संगठन के अनुसार, इस व्यवस्था के कारण कर्मचारियों के कैडर, कंट्रोलिंग अथॉरिटी, सीनियरिटी, प्रमोशन, पेंशन, ट्रांसफर/पोस्टिंग और करियर प्रोग्रेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर लगातार असमंजस बना रहा है।

गोफ्टेड ने मांग की है कि कर्मचारियों की सीनियरिटी, लियन, क्वालिफाइंग सर्विस, पेंशनरी बेनिफिट्स, पे, प्रमोशन और करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) सहित सभी सेवा-संबंधी अधिकारों को पूरी तरह सुरक्षित किया जाए। साथ ही पिछले पाँच वर्षों की संक्रमणकालीन व्यवस्था और “डीम्ड डेप्युटेशन” की वैधानिक स्थिति की स्वतंत्र जाँच कराई जाए।

पेंशन और सेवा लाभों को लेकर भी चिंता

गोफ्टेड ने सीसीएस पेंशन रूल्स से जुड़े पहलुओं का उल्लेख करते हुए कहा है कि कर्मचारियों की पूर्व सरकारी सेवा, क्वालिफाइंग सर्विस और भविष्य के पेंशनरी बेनिफिट्स को लेकर स्पष्ट वैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।

संगठन ने पूरे मामले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जाँच की मांग की है, ताकि किसी भी कर्मचारी के अब तक अर्जित सेवा अधिकार प्रभावित न हों और उनकी सेवा से जुड़े सभी वैधानिक लाभ सुरक्षित रहें।

एआईसीटीई और तकनीकी शिक्षा के नियामकीय ढाँचे की समीक्षा की मांग

संगठन का कहना है कि राजकीय पॉलिटेक्निक केवल स्किल-ट्रेनिंग सेंटर नहीं हैं, बल्कि तकनीकी शिक्षा प्रदान करने वाले महत्वपूर्ण संस्थान हैं। इसलिए इनके करिकुलम स्टैंडर्ड्स, फैकल्टी नॉर्म्स, एक्रेडिटेशन/अप्रूवल, स्टूडेंट वेलफेयर और डिप्लोमा की रिकग्निशन सहित सभी नियामकीय पहलुओं की स्वतंत्र समीक्षा की जानी चाहिए।

एआईसीटीई से संबंधित स्थिति को लेकर भी संगठन ने स्पष्टता की मांग की है। गोफ्टेड का कहना है कि विद्यार्थियों के डिप्लोमा की रिकग्निशन, रोजगार के अवसर और हायर एजुकेशन की संभावनाओं पर किसी भी स्थिति में प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।

मामला केवल कर्मचारियों का नहीं, विद्यार्थियों के भविष्य का भी

गोफ्टेड ने अपने निवेदन में कहा है कि यह मामला केवल कर्मचारियों की सेवा-शर्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली के हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से भी सीधे जुड़ा हुआ है।

संगठन के अनुसार, राजकीय पॉलिटेक्निकों की मूल भावना विद्यार्थियों को अफोर्डेबल टेक्निकल एजुकेशन उपलब्ध कराना रही है। ऐसे में फीस, स्कॉलरशिप, कन्सेशन, एडमिशन स्ट्रक्चर और अन्य स्टूडेंट-सपोर्ट मैकेनिज्म में किसी भी बदलाव का सीधा असर आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों पर पड़ सकता है।

छह महीने में बनी हाई-लेवल कमेटी की रिपोर्ट पर कार्रवाई की मांग

गोफ्टेड ने बताया कि वर्तमान सरकार द्वारा इस विषय पर एक हाई-लेवल कमेटी गठित की गई थी। संगठन के अनुसार, कमेटी ने लगभग छह महीने तक मामले का परीक्षण करने के बाद अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, लेकिन रिपोर्ट पर अब तक ऐसा प्रभावी निर्णय सामने नहीं आया है, जिससे इस विवाद का स्थायी समाधान हो सके।

संगठन ने राष्ट्रपति से कमेटी की रिपोर्ट, उसके निष्कर्षों तथा रिपोर्ट पर अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी प्राप्त करने और आवश्यक हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।

“हमारा उद्देश्य संघर्ष नहीं, समाधान है”

गोफ्टेड ने कहा कि पिछले पाँच वर्षों के दौरान संगठन ने विभिन्न विभागों, अधिकारियों, मंत्रियों और सरकार के समक्ष कई बार अपनी समस्याएँ रखीं तथा लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण माध्यमों से समाधान का प्रयास किया।

संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध कार्रवाई करना नहीं है। वह केवल राजकीय पॉलिटेक्निकों के मूल सरकारी स्वरूप की बहाली और कर्मचारियों की सेवा-सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है।

मुख्य मांग — डीएसईयू से डी-मर्जर

गोफ्टेड ने राष्ट्रपति से मुख्य रूप से मांग की है कि दिल्ली के राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों का डीएसईयू से डी-मर्जर कर उन्हें पुनः डीटीटीई/बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, गवर्नमेंट ऑफ एनसीटी ऑफ दिल्ली के अधीन लाने की प्रक्रिया शुरू की जाए।

इसके साथ ही संगठन ने कर्मचारियों की सरकारी सेवा-स्थिति स्पष्ट करने, पिछले पाँच वर्षों की डीम्ड डेप्युटेशन व्यवस्था की वैधानिकता की स्वतंत्र जाँच कराने, सभी सेवा और पेंशन अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा टेक्निकल एजुकेशन प्रोग्राम्स की रेगुलेटरी कम्प्लायंस की समीक्षा करने की मांग की है।

गोफ्टेड ने विद्यार्थियों की फीस और स्कॉलरशिप व्यवस्था की भी समीक्षा करने तथा हाई-लेवल कमेटी की रिपोर्ट पर समयबद्ध निर्णय लेने का अनुरोध किया है।

संगठन ने कहा कि वह इसे अपना “अंतिम संवैधानिक निवेदन” मानते हुए राष्ट्रपति से पूरे मामले पर तथ्यात्मक रिपोर्ट मंगाने और आवश्यक हस्तक्षेप की अपेक्षा कर रहा है।

गोफ्टेड का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी राजनीतिक संघर्ष को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि दिल्ली में राजकीय तकनीकी शिक्षा की मूल व्यवस्था, कर्मचारियों की सेवा-सुरक्षा और विद्यार्थियों के हितों को सुनिश्चित करना है।

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BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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