Monday, 10 August 2026
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जंतर-मंतर के छात्रों पर विवादित बयान देने वाले टीजी मोहनदास को पुलिस ने हिरासत में लिया

दिल्ली के जंतर-मंतर में हुए छात्र आंदोलन पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर टीजी मोहनदास हिरासत में। केरल साइबर पुलिस ने उनके खिलाफ FIR दर्ज की है। जानिए क्या है पूरा विवाद।

कोच्चि/ नई दिल्ली: किसी लोकतांत्रिक देश में सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करना और उस प्रदर्शन पर अपनी राय रखना राजनीतिक बहस का हिस्सा हो सकता है। लेकिन जब किसी सार्वजनिक टिप्पणी में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा की बात सामने आए और महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियों के आरोप लगें, तो मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहता। ऐसा ही विवाद केरल के राजनीतिक टिप्पणीकार और हिंदुत्व विचारधारा से जुड़े टीजी मोहनदास को लेकर सामने आया है।

केरल पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने रविवार 9 अगस्त को उन्हें हिरासत में लिया। यह कार्रवाई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन को लेकर उनके कथित यूट्यूब बयानों के संबंध में दर्ज मामले की जांच के तहत हुई। पुलिस के अनुसार, मोहनदास के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए गए वीडियो में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और हिंसा भड़काने वाली बातें कही गई थीं। मामले की जांच तिरुवनंतपुरम सिटी साइबर पुलिस कर रही है।

कोच्चि में हुई पुलिस कार्रवाई

रविवार, 9 अगस्त को तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस की एक टीम कोच्चि के मट्टनचेरी इलाके में स्थित टीजी मोहनदास के आवास पर पहुंची। उनके घर की तलाशी स्थानीय पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में की गई और इसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया।

पुलिस अधिकारियों ने उनके यूट्यूब अकाउंट और कथित तौर पर वीडियो तैयार करने तथा अपलोड करने में इस्तेमाल किए गए डिजिटल उपकरणों से जुड़ी जानकारी भी जुटाई। जांचकर्ताओं का कहना है कि मोहनदास से मामले के संबंध में विस्तार से पूछताछ की जानी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, तिरुवनंतपुरम सिटी साइबर पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने के बाद राजधानी ले जाने की प्रक्रिया शुरू की है, जहां पूछताछ के बाद गिरफ्तारी की औपचारिक कार्रवाई की जाएगी।

आखिर किस बयान को लेकर शुरू हुआ विवाद?

पूरा विवाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन से जुड़ा है। यह प्रदर्शन कथित NEET पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि में हुआ था।

पुलिस में दर्ज शिकायत और एफआईआर के अनुसार, मोहनदास ने अपने यूट्यूब चैनल ‘Pathrika’ पर ऐसे वीडियो प्रकाशित किए जिनमें प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बारे में बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। पुलिस का आरोप है कि इन टिप्पणियों का उद्देश्य सार्वजनिक शांति को प्रभावित करना, भय पैदा करना और अशांति की स्थिति उत्पन्न करना था।

इन बयानों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग की वकालत किए जाने का आरोप है। इसके अलावा महिलाओं को लेकर भी ऐसी टिप्पणी किए जाने का आरोप है, जिसे व्यापक रूप से आपत्तिजनक और महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक बताया गया।

24 और 25 जुलाई को अपलोड किया आपत्तिजनक वीडियो

केरल पुलिस के अनुसार, मोहनदास के खिलाफ दर्ज एफआईआर में उनके यूट्यूब चैनल पर 24 और 25 जुलाई को अपलोड किए गए वीडियो का भी उल्लेख है।

पुलिस का आरोप है कि इन वीडियो में छात्रों के प्रदर्शन को लेकर ऐसी बातें कही गईं जो सार्वजनिक शांति और व्यवस्था को प्रभावित कर सकती थीं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि वीडियो किस संदर्भ में बनाए गए, कितने लोगों तक पहुंचे और क्या उनमें जानबूझकर तनाव अथवा भय पैदा करने की कोशिश की गई थी।

यही वजह है कि पुलिस ने केवल बयान की सामग्री पर ही नहीं, बल्कि संबंधित डिजिटल अकाउंट और उपकरणों से जुड़ी जानकारी भी जुटाई है।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?

इस मामले में तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता यानी BNS, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और केरल पुलिस अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एफआईआर में BNS की धारा 192 और 353(1)(b), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 तथा केरल पुलिस अधिनियम की धारा 120(o) का उल्लेख किया गया है। इन धाराओं का इस्तेमाल कथित तौर पर सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने, आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री और उससे जुड़े साइबर अपराध तथा सार्वजनिक शांति से संबंधित आरोपों की जांच के लिए किया गया है।

किसने की मोहनदास के खिलाफ शिकायत?

इस विवाद के बाद कई संगठनों ने मोहनदास के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं।

 रिपोर्टों के अनुसार, Students’ Federation of India (SFI) ने केरल के गृह मंत्री और पुलिस महानिदेशक के समक्ष शिकायत की थी।

इसके अलावा AIYF, Youth Congress और Youth League की ओर से भी शिकायतें किए जाने की जानकारी सामने आई है।

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मोहनदास के बयानों से छात्रों और महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक माहौल पैदा हुआ और सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।

मामले की शुरुआती जांच के बाद तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और आगे की कार्रवाई शुरू की।

RSS से टीजी मोहनदास का संबंध?

टीजी मोहनदास लंबे समय से केरल की सार्वजनिक और राजनीतिक बहस में सक्रिय रहे हैं। वे लेखक, राजनीतिक टिप्पणीकार और सार्वजनिक वक्ता के तौर पर जाने जाते हैं। उनका संबंध हिंदुत्व विचारधारा से भी रहा है और अतीत में उन्होंने बीजेपी तथा संघ परिवार से जुड़े विभिन्न संगठनों में जिम्मेदारियां निभाई हैं।

मोहनदास बीजेपी के केरल यूनिट के Intellectual Cell के राज्य संयोजक रह चुके हैं। वे भारतीय विचार केंद्रम से भी जुड़े रहे और संघ परिवार से संबंधित कुछ संस्थानों और प्रकाशनों में भूमिकाएं निभा चुके हैं।

हालांकि मौजूदा विवाद के बीच RSS ने स्पष्ट रूप से मोहनदास से दूरी बनाई है। 28 जुलाई को जारी बयान में RSS दक्षिण केरल प्रांत के सह कार्यवाह के. बी. श्रीकुमार ने कहा था कि मोहनदास की टिप्पणियां उनके व्यक्तिगत विचार हैं और वे RSS के किसी स्तर पर पदाधिकारी नहीं हैं। संगठन ने उनके विचारों से असहमति जताते हुए उनकी निंदा की थी।

बीजेपी ने भी बनाई दूरी

विवाद बढ़ने के बाद बीजेपी की केरल इकाई ने भी मोहनदास के बयानों से दूरी बनाई। एक महिला अधिकार समूह ने RSS और BJP से मोहनदास के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए यह भी कहा कि उनके पुराने संगठनात्मक संबंधों को देखते हुए दोनों संगठनों को अपनी स्थिति और स्पष्ट करनी चाहिए।

इस घटनाक्रम ने एक महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा किया है। किसी राजनीतिक या वैचारिक संगठन से जुड़े व्यक्ति की निजी टिप्पणी और उस संगठन की आधिकारिक स्थिति के बीच अंतर कैसे किया जाए। मौजूदा मामले में RSS ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि मोहनदास की टिप्पणियां संगठन की स्थिति का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं।

महिला संगठनों ने भी जताई आपत्ति

मोहनदास के कथित बयानों में महिलाओं को लेकर की गई टिप्पणी ने अलग विवाद पैदा किया। महिला अधिकार समूहों ने इसे केवल राजनीतिक प्रदर्शन पर टिप्पणी नहीं बल्कि महिलाओं के प्रति अपमानजनक और यौन हिंसा को लेकर असंवेदनशील भाषा के रूप में देखा।

ALIFA (Alliance for Intersectional Feminist Action) ने RSS और BJP से मोहनदास के खिलाफ सार्वजनिक रूप से निंदा करने तथा उनसे जुड़े मंचों और संस्थागत संबंधों की समीक्षा करने की मांग की। संगठन ने यह भी मांग रखी कि विवादित वीडियो को सार्वजनिक प्रसार से हटाया जाए, जबकि जांच के लिए उनकी प्रतियां सुरक्षित रखी जाएं।

इस प्रतिक्रिया ने विवाद को छात्र प्रदर्शन से आगे बढ़ाकर महिलाओं की गरिमा, राजनीतिक भाषा और सार्वजनिक संवाद के स्तर तक पहुंचा दिया।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम कानूनी जिम्मेदारी

इस पूरे मामले का एक बड़ा पहलू अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी है। लोकतंत्र में किसी व्यक्ति को सरकार, राजनीतिक दलों या आंदोलनों की आलोचना करने का अधिकार है। लेकिन यह अधिकार कानून की सीमाओं से परे नहीं नहीं होना चाहिए

विशेषकर तब जब किसी सार्वजनिक बयान पर हिंसा भड़काने, किसी समुदाय या समूह के खिलाफ नफरत फैलाने या सार्वजनिक शांति को खतरे में डालने का आरोप हो, तो पुलिस जांच की भूमिका सामने आती है।

मोहनदास के मामले में पुलिस का कहना है कि उनके वीडियो केवल आलोचनात्मक राजनीतिक टिप्पणी नहीं थे, बल्कि उनमें ऐसी बातें थीं जिनसे सार्वजनिक शांति प्रभावित हो सकती थी। इसी आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

हिरासत के बाद जांच तेज

9 अगस्त को हिरासत में लिए जाने के बाद जांच एजेंसियां मोहनदास से पूछताछ कर सकती हैं। पुलिस उनके डिजिटल अकाउंट, वीडियो की सामग्री और उससे संबंधित अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है।

इसके साथ ही पुलिस यह भी देख सकती है कि कथित वीडियो कब और किस संदर्भ में बनाए गए, उन्हें किस तरह प्रसारित किया गया और उनके खिलाफ दर्ज शिकायतों में लगाए गए आरोपों के समर्थन में क्या डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध हैं।

आगे की प्रक्रिया में पुलिस की जांच, गिरफ्तारी की औपचारिकता, अदालत के समक्ष पेशी और यदि आवश्यक हुआ तो जमानत से संबंधित न्यायिक प्रक्रिया शामिल हो सकती है। इन सभी चरणों में मोहनदास को कानून के तहत उपलब्ध अधिकार प्राप्त रहेंगे।

राजनीतिक भाषा पर छिड़ी बहस

टीजी मोहनदास प्रकरण केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी या हिरासत की खबर नहीं है। इसने भारत में राजनीतिक और सार्वजनिक संवाद की भाषा को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।

सोशल मीडिया और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म ने राजनीतिक टिप्पणी को पहले से कहीं ज्यादा व्यापक बना दिया है। अब किसी सार्वजनिक व्यक्ति की कही बात कुछ ही मिनटों में हजारों या लाखों लोगों तक पहुंच सकती है। ऐसे में शब्दों की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है।

विपक्षी विचारों की आलोचना करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन आलोचना और हिंसा के आह्वान के बीच की सीमा को लेकर कानून अपनी अलग कसौटी रखता है। इसी सीमा की जांच अब केरल पुलिस कर रही है।

ये भी पढ़ें :- 13 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर लग सकती है रोक, संसद में उठी SHIELD बिल की चर्चा

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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