Monday, 05 October 2026
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MPSC Paper Leak Row: अभ्यर्थियों के आंदोलन में शामिल होगी CJP, चेयरमैन-सेक्रेटरी के इस्तीफे की मांग के साथ दिया अल्टीमेटम

MPSC विवाद के बीच अभ्यर्थियों ने अक्टूबर 2026 में होने वाली ग्रुप-C प्रारंभिक परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी तरीके से कराने की मांग की है। पेपर लीक के बाद छात्र भविष्य की भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

मुंबई/छत्रपति संभाजीनगर: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध लगातार तेज हो रहा है। अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी आंदोलनरत अभ्यर्थियों को समर्थन देने का ऐलान किया है। CJP ने MPSC के चेयरमैन और सचिव के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा है कि अगर 24 सितंबर तक कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन राज्यभर में आंदोलन करेगा।

यह विवाद खास तौर पर MPSC की ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-B) भर्ती परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक के बाद गंभीर हुआ है। इस मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें MPSC के तीन अधिकारी और परीक्षा में सातवीं रैंक हासिल करने वाली एक अभ्यर्थी भी शामिल है। इसके बाद से अभ्यर्थी सिर्फ एक परीक्षा में हुई गड़बड़ी की जांच नहीं, बल्कि आयोग की पूरी परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठा रहे हैं।

अभिजीत दीपके ने क्या ऐलान किया?

CJP की ओर से जारी बयान के मुताबिक, MPSC अभ्यर्थियों का एक समूह छत्रपति संभाजीनगर के वालुज स्थित अभिजीत दीपके के आवास पर उनसे मिला। मुलाकात के बाद दीपके ने आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि CJP और वह खुद अभ्यर्थियों के साथ खड़े रहेंगे और जब तक आयोग के शीर्ष अधिकारियों के इस्तीफे की मांग पूरी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

CJP ने सरकार और संबंधित अधिकारियों के सामने कार्रवाई के लिए 24 सितंबर की समयसीमा रखी है। संगठन के अनुसार, यदि तब तक मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वह अभ्यर्थियों के साथ राज्यव्यापी दौरा और आंदोलन करेगा। इसका उद्देश्य अलग-अलग शहरों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों से संवाद करना और उनके मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाना है।

इस घोषणा के बाद MPSC विवाद को एक नया राजनीतिक आयाम भी मिला है। हालांकि, आंदोलन की शुरुआत अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में की थी।

ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा से हुई विवाद की शुरुआत

MPSC की ड्रग इंस्पेक्टर ग्रुप-B स्क्रीनिंग परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक इस पूरे विवाद का प्रमुख केंद्र है। परीक्षा 22 मार्च 2026 को आयोजित हुई थी। बाद में प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले कुछ लोगों तक पहुंचने के आरोप सामने आए। जांच के बाद MPSC ने भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया।

मुंबई क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच शुरू की। अगस्त के अंत में छह लोगों की गिरफ्तारी की गई, जिनमें MPSC के तीन अधिकारी शामिल थे। इसके बाद परीक्षा में सातवीं रैंक हासिल करने वाली अभ्यर्थी ऋतुजा पाटील को भी गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र तक पहुंच बनाई, उसे अलग सेट के रूप में तैयार किया और कथित तौर पर अनधिकृत लोगों तक पहुंचाया। पुलिस का आरोप है कि सातवीं रैंक वाली अभ्यर्थी को भी परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र मिला था और संदेह से बचने के लिए उसे 10 प्रश्न जानबूझकर गलत करने की सलाह दी गई थी।

तीन MPSC अधिकारी भी गिरफ्तार

इस मामले ने इसलिए ज्यादा गंभीर रूप लिया क्योंकि गिरफ्तार लोगों में आयोग के अधिकारी भी शामिल हैं। पुलिस ने MPSC के अवर सचिव अभिजीत गणपतराव लेंडवे के अलावा सहायक अनुभाग अधिकारियों विश्वेश्वर दत्तात्रेय नकटे और गोपाल भट्टू मराठे को गिरफ्तार किया था।

अन्य आरोपियों में नंदुरबार की कौटिल्य अकादमी के निदेशक प्रवीण दिलीप पाटील तथा अमृत नामदेव पाटील और लोकेश उर्फ गौरव राजेंद्र पाटील शामिल बताए गए हैं। बाद में अभ्यर्थी ऋतुजा पाटील की गिरफ्तारी हुई।

इस मामले ने आयोग की उस गोपनीय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं जिसके तहत प्रश्नपत्र तैयार करने, सुरक्षित रखने और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया होती है। अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर आयोग के अंदर से ही प्रश्नपत्र बाहर पहुंचता है तो पूरी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

पुणे से नागपुर तक सड़कों पर उतरे अभ्यर्थी

पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन केवल एक शहर तक सीमित नहीं रहा। पुणे में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने मार्च निकाला और MPSC चेयरमैन तथा सचिव के इस्तीफे की मांग की। आंदोलन में विपक्षी नेताओं ने भी हिस्सा लिया।

अभ्यर्थियों ने ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा के अलावा दूसरी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और परिणामों को लेकर भी सवाल उठाए। उनकी मांग है कि परीक्षा प्रक्रिया की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

नागपुर में भी अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया। विदर्भ स्पर्धा परीक्षा समन्वय समिति से जुड़े छात्रों ने उच्चस्तरीय जांच और आयोग के चेयरमैन के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

नाशिक में भी सैकड़ों अभ्यर्थी जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर जुटे और कथित पेपर लीक की स्वतंत्र जांच की मांग की। उन्होंने सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग के साथ आयोग के चेयरमैन और सचिव के इस्तीफे की मांग रखी।

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क्या हैं अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें?

आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की मांग केवल चेयरमैन और सचिव के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। वे भर्ती परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता चाहते हैं।

प्रमुख मांगों में ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा में कथित पेपर लीक की जांच, मुंबई क्राइम ब्रांच की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करना और आरोपी अधिकारी अभिजीत लेंडवे के कार्यकाल में हुई परीक्षाओं का फोरेंसिक ऑडिट शामिल है।

अभ्यर्थियों ने 2025 की राज्य सेवा मुख्य परीक्षा और कृषि सेवा परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में कथित गड़बड़ियों की भी जांच की मांग की है। इसके अलावा वे अन्य परीक्षाओं के संदिग्ध परिणामों और चयनित अभ्यर्थियों की भी जांच चाहते हैं।

आंदोलनकारियों ने अक्टूबर 2026 में होने वाली ग्रुप-C प्रारंभिक परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी तरीके से कराने की मांग भी रखी है।

MPSC चेयरमैन ने आरोपों को किया खारिज

अभ्यर्थियों के निशाने पर MPSC चेयरमैन विवेक भीमनवार भी हैं। हालांकि भीमनवार ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है।

2 सितंबर को जारी बयान में उन्होंने कहा था कि ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा में कथित अनियमितता जनवरी 2026 में हुई थी, जबकि उन्होंने 18 फरवरी 2026 को चेयरमैन पद की शपथ ली और 3 मार्च को पदभार संभाला। इसलिए उनका कहना है कि जिस घटना को लेकर उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, वह उनके कार्यभार संभालने से पहले की है।

उन्होंने यह भी कहा कि आयोग ने मामले को गंभीरता से लिया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक आंतरिक उच्चस्तरीय समिति भी गठित की है।

यानी अभ्यर्थियों की जवाबदेही की मांग और चेयरमैन का यह तर्क फिलहाल इस विवाद के दो प्रमुख पक्ष हैं।

सचिव पर काली स्याही फेंकने की घटना

11 सितंबर को नवी मुंबई स्थित MPSC मुख्यालय में सचिव महेंद्र हरपाळकर के चेहरे पर काला पाउडर फेंके जाने की घटना ने विवाद को और बढ़ा दिया। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया।

यह घटना कथित पेपर लीक के खिलाफ चल रहे विरोध के दौरान हुई। हालांकि विभिन्न छात्र संगठनों ने भी इस तरह की कार्रवाई का विरोध किया और कहा कि पेपर लीक का मुद्दा गंभीर है, लेकिन आंदोलन लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से होना चाहिए।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिशों के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि सरकार अभ्यर्थियों के मुद्दों को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने परीक्षा में अनियमितता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली विकसित करने की बात कही।

सरकार ने क्या कदम उठाए?

लगातार हो रहे प्रदर्शनों के बीच महाराष्ट्र सरकार ने भर्ती परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अभ्यर्थियों के साथ बैठक के बाद उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच, पेपर लीक मामलों की जांच और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया।

सरकार ने परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए वरिष्ठ नौकरशाह वी. राधा की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की है। समिति का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और अभ्यर्थी-केंद्रित बनाने के उपाय सुझाना है। इसके लिए छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और अन्य हितधारकों से सुझाव लिए जा रहे हैं।

समिति राज्य के अलग-अलग राजस्व संभागों का दौरा कर रही है। नागपुर में भी समिति के दौरे की तैयारी की जा रही है और 16 सितंबर को वहां पहुंचने की योजना है।

CJP के जुड़ने से क्या बदलेगा?

MPSC अभ्यर्थियों के आंदोलन में CJP और अभिजीत दीपके के शामिल होने से दबाव बढ़ सकता है। दीपके इससे पहले प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर चुके हैं और अब उन्होंने MPSC अभ्यर्थियों के साथ खड़े रहने की घोषणा की है।

CJP का कहना है कि यदि 24 सितंबर तक MPSC के चेयरमैन और सचिव के इस्तीफे की मांग पर कार्रवाई नहीं होती है तो संगठन राज्यभर में आंदोलन करेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में पुणे, नागपुर, नाशिक, छत्रपति संभाजीनगर और दूसरे शहरों में प्रदर्शन का दायरा बढ़ सकता है।

हालांकि सरकार पहले ही परीक्षा सुधारों के लिए समिति बना चुकी है, इसलिए अब बड़ा सवाल यह है कि क्या अभ्यर्थी केवल सुधारों के आश्वासन से संतुष्ट होंगे या वे शीर्ष अधिकारियों के इस्तीफे की मांग पर आंदोलन जारी रखेंगे।

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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