EPS-95 पेंशनरों ने जंतर-मंतर का प्रदर्शन समाप्त किया, सांसदों की अपील के बाद प्रतिनिधिमंडल ने निर्मला सीतारमण से की मुलाकात

नई दिल्ली, 11 मार्च 2026:

न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर धरना दे रहे EPS-95 पेंशनरों ने बुधवार को अपना तीन दिन का प्रदर्शन समाप्त किया। कई सांसदों द्वारा आंदोलन समाप्त करने की अपील और मांगों को उठाने के आश्वासन के बाद पेंशनरों ने यह फैसला लिया है। इस प्रदर्शन में देश के विभिन्न राज्यों से आए वृद्ध पेंशनर शामिल हुए, जो न्यूनतम मासिक पेंशन ₹7,500, महंगाई भत्ता और मुफ्त चिकित्सा सुविधा की मांग कर रहे हैं।

सभा को संबोधित करते हुए EPS-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत और राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह राजावत ने कहा कि देश में करीब 81 लाख पेंशनर इस योजना के तहत आते हैं और उन्हें वर्तमान में 1,000 रुपये प्रतिमाह की न्यूनतम पेंशन मिलती है, जो आज की महंगाई के दौर में बेहद कम है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि मौजूदा संसद सत्र के दौरान ही पेंशन बढ़ोतरी पर फैसला किया जाए।

प्रदर्शन स्थल पर कई सांसदों ने पहुंचकर पेंशनरों की मांगों के प्रति समर्थन व्यक्त किया। राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी (भाजपा, पुणे), शिवसेना सांसद भाव राव वाकचौरे (शिरडी), कांग्रेस सांसद सागर ईश्वर खुर्दे (बीदर, कर्नाटक) और कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह (प्रयागराज) ने सभा को संबोधित किया। सांसदों ने पेंशनरों से आंदोलन समाप्त करने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि वे इस मुद्दे को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाएंगे और उनकी मांगों को आगे बढ़ाने में सहयोग करेंगे।

इन आश्वासनों के बाद पेंशनरों ने आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया।

इससे पहले दिन में EPS-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति का एक प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से लगभग 3:30 बजे मिला। सांसद साहू जी महाराज के नेतृत्व में गए इस प्रतिनिधिमंडल में कमांडर अशोक राउत और वीरेंद्र सिंह राजावत भी शामिल थे। बैठक के दौरान वित्त मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि श्रम मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुरूप पेंशन बढ़ोतरी के मुद्दे पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी।

EPS-95 के तहत पेंशनरों के लिए न्यूनतम पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रतिमाह करने की मांग को लेकर 9 मार्च से 11 मार्च तक जंतर-मंतर पर यह धरना दिया जा रहा था।

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