पीयूष मिश्रा ने अपने वीडियो में नसीरुद्दीन शाह को संबोधित करते हुए कहा कि वह उनके बयानों पर जवाब देते रहेंगे। CJP प्रदर्शन में शाह की मौजूदगी के संदर्भ में मिश्रा ने दूसरे सामाजिक और छात्र मुद्दों पर भी उनकी प्रतिक्रिया की मांग की।
मुंबई: अभिनेता और लेखक पीयूष मिश्रा ने वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह पर एक बार फिर निशाना साधा है। इस बार विवाद की वजह शाह का मुंबई के शिवाजी पार्क में आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में शामिल होना है।
2 अक्टूबर को हुए इस प्रदर्शन में नसीरुद्दीन शाह के अलावा शबाना आजमी, विशाल ददलानी, विशाल भारद्वाज और अन्य फिल्मी हस्तियां भी नजर आईं। प्रदर्शन में मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर थी।
इसके बाद पीयूष मिश्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर नसीरुद्दीन शाह से कई सवाल किए। उन्होंने खास तौर पर फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी यानी LPU में छात्रों से जुड़े विवाद और झारखंड के छात्र आंदोलन का मुद्दा उठाया।
नसीरुद्दीन शाह के CJP प्रदर्शन में पहुंचने से शुरू हुआ विवाद
2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP की ओर से विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में मुख्य रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग उठाई गई। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
नसीरुद्दीन शाह भी इस प्रदर्शन से जुड़े नजर आए। उन्होंने CJP संस्थापक अभिजीत दीपके से मुलाकात की और उन्हें गले लगाया। दीपके ने इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, शाह ने दीपके से कहा कि वह उनसे मिलने, हाथ मिलाने और उनका शुक्रिया अदा करने आए हैं। दीपके ने खुद को शाह का प्रशंसक बताया, जिस पर शाह ने भी कहा कि वह दीपके के काम के प्रशंसक हैं।
शाह की इस मौजूदगी को CJP के आंदोलन के समर्थन के तौर पर देखा गया। प्रदर्शन में शबाना आजमी और विशाल ददलानी समेत मनोरंजन जगत की कई हस्तियां भी पहुंचीं। शबाना आजमी ने प्रदर्शन के दौरान लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने और अपनी आवाज उठाने के अधिकार की बात कही।
क्या है CJP का प्रदर्शन?
CJP के प्रदर्शन का केंद्र चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा था। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। इसके साथ ही SIR प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए।
प्रदर्शन के दौरान CJP की ओर से चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची में लोगों के नाम से जुड़े मुद्दों को उठाया गया। संगठन ने आगे आंदोलन को दूसरे शहरों तक ले जाने और बड़े स्तर पर विरोध जारी रखने की बात भी कही है।
इसी राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे पर नसीरुद्दीन शाह की मौजूदगी ने एक बार फिर यह बहस शुरू कर दी कि फिल्मी हस्तियों को सामाजिक और राजनीतिक मामलों में किस तरह अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
पीयूष मिश्रा ने स्मित मच्छार का मुद्दा उठाया
अपने वीडियो में पीयूष मिश्रा ने सबसे पहले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी का जिक्र किया। हाल ही में ‘फ्लाईदुबई’ की एक उड़ान में कॉकपिट के भीतर हुई गंभीर घटना के दौरान मच्छार घायल हो गए थे। इसके बावजूद उन्होंने स्थिति को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और विमान में सवार यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद की। इस घटना के बाद उन्हें व्यापक स्तर पर बहादुरी के लिए सराहा गया।
पीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह को संबोधित करते हुए सवाल किया कि उन्होंने मच्छार की बहादुरी पर सार्वजनिक रूप से कुछ क्यों नहीं कहा। मिश्रा ने उनसे मच्छार को बधाई देने और उनके साहस का उल्लेख करने की अपील की। उन्होंने अपने वीडियो में इस घटना को शाह के सामने एक उदाहरण के तौर पर रखा कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे दूसरे मुद्दों पर भी शाह को प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
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LPU छात्रों के प्रदर्शन का भी जिक्र
पीयूष मिश्रा ने अपने वीडियो में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के छात्रों से जुड़े विरोध प्रदर्शन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह से सवाल किया कि यदि वे छात्रों के अधिकारों और उनके आंदोलनों को महत्वपूर्ण मानते हैं, तो LPU के छात्रों के समर्थन में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई संदेश क्यों नहीं दिया।
मिश्रा ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और छात्राओं के साथ कथित बदसलूकी का भी जिक्र किया। उन्होंने शाह के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि अभिनेता ने कभी कहा था कि नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) और फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से जितना सीखा, उतना ही छात्रों से भी सीखा है।
इसी बात को आधार बनाकर मिश्रा ने सवाल किया कि जब छात्रों के आंदोलनों को सीखने और समझने का माध्यम माना जाता है, तो LPU के प्रदर्शनकारी छात्रों के मामले में भी उसी तरह समर्थन और चिंता क्यों नहीं दिखाई गई। उन्होंने शाह के रुख को लेकर सवाल खड़े करते हुए इसे उनके कथित दोहरे रवैये से जोड़कर देखा।
झारखंड छात्र आंदोलन से भी जुड़ा है विवाद
पीयूष मिश्रा और नसीरुद्दीन शाह के बीच यह पहली बार नहीं है जब छात्रों और सामाजिक मुद्दों को लेकर सार्वजनिक मतभेद सामने आया है।
अगस्त 2026 में झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान पीयूष मिश्रा प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच पहुंचे थे। उन्होंने छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से भी मुलाकात की थी। इसी दौरान उन्होंने नसीरुद्दीन शाह की उस टिप्पणी का जवाब दिया था, जिसमें शाह ने फिल्म इंडस्ट्री की ओर से छात्रों के आंदोलनों पर प्रतिक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे।
अब नए वीडियो में मिश्रा ने उसी पुराने घटनाक्रम को फिर से उठाया। उनका कहना था कि उन्होंने झारखंड के छात्रों के लिए मदद मांगी थी, लेकिन उन्हें कथित तौर पर मदद के बजाय एक पाकिस्तानी शायरा की नज्म भेजी गई।
मिश्रा ने इस बात पर तंज करते हुए कहा कि छात्रों को कविता नहीं बल्कि खाने-पीने की चीजों की जरूरत थी। उन्होंने रोटी, चावल, गुड़ और लिट्टी-चोखा जैसी चीजों का जिक्र किया और कहा कि छात्र किसी महंगी चीज की मांग नहीं कर रहे थे।
‘हर बयान पर मिलेगा जवाब’
अपने वीडियो में पीयूष मिश्रा का अंदाज काफी तीखा रहा। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह को संबोधित करते हुए खुद को उनका पुराना परिचित बताया और कहा कि वह उनके हर बयान का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
मिश्रा ने शाह की CJP प्रदर्शन में मौजूदगी पर सीधे सवाल उठाते हुए कहा कि अगर वह अभिजीत दीपके से मिलने और उनके आंदोलन का समर्थन करने पहुंचे हैं तो दूसरे छात्र आंदोलनों और घटनाओं पर भी अपनी प्रतिक्रिया दें।
उनकी आपत्ति मूल रूप से इस बात को लेकर दिखाई दी कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग कुछ मुद्दों पर खुलकर बोलते हैं लेकिन दूसरे मुद्दों पर चुप रहते हैं। मिश्रा ने इसी को ‘चयनात्मक’ प्रतिक्रिया के तौर पर पेश किया।
प्रदर्शन को लेकर विरोध भी हुआ
CJP के प्रदर्शन के दौरान मुंबई में विरोध की स्थिति भी देखने को मिली। शिवाजी पार्क के आसपास कुछ लोगों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान ‘अब वीजा वापस जाओ’ जैसे नारे भी लगाए गए। इससे प्रदर्शन के बीच राजनीतिक और सामाजिक विरोध का माहौल भी नजर आया।
प्रदर्शन को लेकर मुंबई पुलिस की अनुमति का मुद्दा भी चर्चा में रहा। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शन के लिए अनुमति देने से इनकार किया था। इसके बावजूद CJP से जुड़े बड़ी संख्या में लोग शिवाजी पार्क पहुंचे और प्रदर्शन किया। पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था भी की गई थी, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने।
CJP ने इस प्रदर्शन को अपने आंदोलन के दूसरे चरण यानी ‘Season 2’ की शुरुआत बताया। संगठन का कहना है कि वह SIR और उससे जुड़े मुद्दों को लेकर आगे भी अपना आंदोलन जारी रखेगा। संगठन ने मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और तेज करने की बात कही है। इसके तहत भविष्य में जेल भरो आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी गई है। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक गतिविधियां और बढ़ सकती हैं।
राजनीतिक मुद्दों पर बॉलीवुड की बढ़ती भूमिका
पिछले कुछ समय में बॉलीवुड कलाकारों की राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर सक्रियता लगातार चर्चा में रही है। कभी कलाकारों की चुप्पी सवालों के घेरे में आती है तो कभी किसी आंदोलन में उनकी मौजूदगी राजनीतिक बहस को तेज कर देती है।
CJP के मुंबई प्रदर्शन में नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी और विशाल ददलानी जैसे कलाकारों की मौजूदगी भी इसी व्यापक बहस का हिस्सा है। वहीं पीयूष मिश्रा का वीडियो इस बहस को एक कदम आगे ले जाता है, क्योंकि उन्होंने सवाल उठाया है कि अगर कलाकार किसी एक आंदोलन के समर्थन में सामने आते हैं तो दूसरे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी उनकी आवाज सुनाई देनी चाहिए।
फिलहाल पीयूष मिश्रा और नसीरुद्दीन शाह के बीच यह ताजा विवाद सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ शाह का CJP के आंदोलन में शामिल होना राजनीतिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता को दिखाता है, तो दूसरी तरफ मिश्रा के सवाल इस बात पर केंद्रित हैं कि ऐसी सक्रियता सभी मुद्दों पर समान रूप से शाह की तरफ से दिखाई नहीं देती।
