Saturday, 25 July 2026
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CJP Founder अभिजीत दीपके को टाइफाइड, बीमारी के बीच क्या जारी रह सकेगा आंदोनल?

अभिजीत दीपके ने वीडियो जारी कर टाइफाइड होने की पुष्टि की है। इलाज के बीच उन्होंने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। जानिए बीमारी के बावजूद CJP आंदोलन पर क्या असर पड़ सकता है।

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा Cockroach Janta Party (CJP) का छात्र आंदोलन अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शनिवार, 25 जुलाई को बताया कि उनकी तबीयत पिछले कुछ दिनों से खराब थी और जांच के बाद उन्हें टाइफाइड होने की पुष्टि हुई है।

उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि उनका इलाज चल रहा है और उन्हें रोजाना IV ड्रिप दी जा रही है। इसके बावजूद उन्होंने साफ किया कि बीमारी की वजह से आंदोलन रुकेगा नहीं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जारी रहेगी।

Dipke की तबीयत खराब होने की खबर ऐसे समय सामने आई है, जब CJP का प्रदर्शन कई हफ्तों से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। आंदोलन की शुरुआत शिक्षा व्यवस्था, NEET-UG से जुड़े विवाद और कथित पेपर लीक के मुद्दों को लेकर हुई थी, लेकिन अब इसका मुख्य राजनीतिक केंद्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग बन चुका है।

कई दिनों से खराब थी तबीयत

25 जुलाई को जारी वीडियो संदेश में दीपके ने बताया कि वह पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ महसूस कर रहे थे। जांच के बाद उनकी ब्लड रिपोर्ट में टाइफाइड की पुष्टि हुई है।

उन्होंने कहा कि उनका इलाज चल रहा है और उन्हें सुबह-शाम IV ड्रिप दी जा रही है। इसके बावजूद उन्होंने CJP समर्थकों और प्रदर्शनकारियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी हैं और आंदोलन अपने उद्देश्य की ओर बढ़ रहा है।

इससे पहले 23 जुलाई को भी दीपके ने अपनी खराब तबीयत के कारण जंतर-मंतर से कुछ घंटों के लिए दूर रहने की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि वह कई दिनों से बुखार और शरीर में तेज दर्द से परेशान थे, लेकिन दर्द निवारक दवाओं के सहारे प्रदर्शन में शामिल हो रहे थे। उस समय उन्होंने कुछ घंटे आराम करने की जरूरत बताई थी।

अब टाइफाइड की पुष्टि होने के बाद यह साफ है कि उनकी बीमारी अचानक सामने आई कोई मामूली स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि उन्हें उपचार की आवश्यकता पड़ रही है।

टाइफाइड के बावजूद जारी रहेगा आंदोलन

दीपके ने अपने संदेश में कहा कि उनकी बीमारी के कारण आंदोलन किसी भी तरह प्रभावित नहीं होगा। उनका कहना है कि CJP का विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते।

उनका यह रुख उस समय सामने आया है, जब सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध खत्म करने की कोशिशें भी हुई हैं। 25 जुलाई की रिपोर्टों के अनुसार, CJP के प्रतिनिधियों आशुतोष रांका और सौरव दास ने शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रियों के साथ करीब दो घंटे तक बातचीत की थी, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मुख्य मांग से पीछे नहीं हटे।

दूसरी ओर, सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ कड़े कानून, National Testing Agency से जुड़े शीर्ष अधिकारियों में बदलाव और विशेषज्ञों की नियुक्ति जैसे कदम आगे बढ़ाए हैं।

CJP का कहना है कि ये कदम पर्याप्त नहीं हैं। संगठन धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है और उनके इस्तीफे की मांग पर कायम है।

20 जुलाई को खत्म किया था भूख हड़ताल

दीपके ने आंदोलन के दौरान भूख हड़ताल भी शुरू की थी। लेकिन 20 जुलाई 2026 को उन्होंने सोनम वांगचुक की अपील के बाद अपना उपवास समाप्त कर दिया था। इसके बाद वह CJP के संसद मार्च में भी शामिल हुए।

इससे एक दिन पहले दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी थी। इसके बाद दीपके ने कहा था कि CJP संसद की ओर एक और मार्च नहीं करेगा, क्योंकि वह नहीं चाहते कि और युवा घायल हों। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि संसद मार्च रोकने का अर्थ आंदोलन समाप्त करना नहीं है। CJP अपनी मांगों को लेकर विरोध जारी रखेगा।

इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट हुआ कि CJP की रणनीति में बदलाव जरूर आया, लेकिन संगठन ने अपने मुख्य राजनीतिक लक्ष्य से पीछे हटने का संकेत नहीं दिया।

दीपके की बीमारी का आंदोलन पर क्या असर पड़ेगा?

1) नेतृत्व की सक्रियता

अभिजीत दीपके इस आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। ऐसे में उनकी शारीरिक अनुपस्थिति से प्रदर्शन की दैनिक गतिविधियों पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, CJP के पास अन्य प्रमुख चेहरे भी हैं। आशुतोष रांका और सौरव दास जैसे नेताओं ने सरकार के साथ बातचीत में संगठन का प्रतिनिधित्व किया है। इससे संकेत मिलता है कि आंदोलन पूरी तरह एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है।

2)  समर्थकों में भावनात्मक प्रतिक्रिया

किसी आंदोलन के प्रमुख नेता के बीमार पड़ने से समर्थकों के बीच भावनात्मक प्रतिक्रिया भी पैदा हो सकती है। दीपके ने खुद अपने वीडियो संदेश में समर्थकों को धन्यवाद दिया और आंदोलन जारी रखने की बात कही। इससे उनके समर्थकों में यह संदेश जा सकता है कि नेतृत्व स्वास्थ्य संबंधी कठिनाई के बावजूद अपने मुद्दे से पीछे नहीं हट रहा।

हालांकि, यह भी संभव है कि उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़े और आंदोलन के आयोजकों को उनकी सुरक्षा तथा चिकित्सा देखभाल को प्राथमिकता देनी पड़े।

3) सरकार पर राजनीतिक दबाव

दीपके की बीमारी आंदोलन को नया राजनीतिक और मीडिया ध्यान दे सकती है। पहले ही CJP प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार पर विपक्ष और प्रदर्शनकारियों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। अब आंदोलन के संस्थापक का टाइफाइड से पीड़ित होना और इसके बावजूद विरोध जारी रखने की घोषणा आंदोलन को और सुर्खियों में ला सकती है।

लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि बीमारी अपने आप आंदोलन को मजबूत या कमजोर कर देगी। इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले दिनों में प्रदर्शन में कितनी भागीदारी बनी रहती है और सरकार तथा CJP के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है।

सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?

CJP के आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं पर कार्रवाई के संकेत दिए हैं। सरकार की ओर से पेपर लीक मामलों के लिए कड़े कानूनी प्रावधानों और तेज कार्रवाई की बात सामने आई है।

इसके अलावा, National Testing Agency की कार्यप्रणाली को लेकर भी बदलाव और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की चर्चा हुई है। सरकार की ओर से उठाए गए कदमों को प्रदर्शनकारी पर्याप्त नहीं मान रहे हैं क्योंकि उनकी मुख्य मांग अब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़ी है।

यानी दोनों पक्षों के बीच सबसे बड़ा अंतर यही है कि सरकार संस्थागत और प्रशासनिक सुधारों पर जोर दे रही है, जबकि CJP राजनीतिक जवाबदेही के तौर पर मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

CJP की मांग सिर्फ NEET तक सीमित नहीं

हालांकि आंदोलन की पृष्ठभूमि में NEET और परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवाद महत्वपूर्ण हैं, लेकिन CJP का वर्तमान विरोध केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है।

प्रदर्शनकारी पेपर लीक, परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता, छात्रों के भविष्य और सरकारी जवाबदेही जैसे व्यापक मुद्दे उठा रहे हैं। उनका कहना है कि लाखों छात्रों की मेहनत और करियर से जुड़े मामलों में सरकार को स्पष्ट जवाबदेही तय करनी चाहिए।

इसी वजह से आंदोलन अब शिक्षा नीति से आगे बढ़कर राजनीतिक जवाबदेही के मुद्दे से जुड़ गया है।

क्या आंदोलन कमजोर पड़ जायेगा

अभिजीत दीपके की बीमारी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि CJP का आंदोलन अब किस दिशा में जाएगा।

एक संभावना यह है कि आंदोलन का नेतृत्व सामूहिक रूप से आगे बढ़े और दीपके इलाज के दौरान भी दूर से रणनीति तय करते रहें। CJP के अन्य नेता पहले से ही सरकार के साथ बातचीत में शामिल हैं, इसलिए संगठन के पास वैकल्पिक नेतृत्व संरचना मौजूद दिखाई देती है।

दूसरी संभावना यह है कि दीपके की बीमारी के कारण कुछ समय के लिए आंदोलन की गतिविधियां धीमी पड़ें। लेकिन उनके ताजा बयान से फिलहाल ऐसा संकेत नहीं मिलता कि संगठन आंदोलन वापस लेने की तैयारी कर रहा है।

CJP ने साफ किया है कि दीपके की स्वास्थ्य समस्या के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। शनिवार को संगठन की ओर से यह भी कहा गया कि यदि सरकार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर स्पष्ट जवाब नहीं देती है, तो वह आगे कड़ा रुख अपना सकता है।

स्वास्थ्य और आंदोलन के बीच संतुलन बड़ी चुनौती

हालांकि आंदोलन जारी रखने की राजनीतिक प्रतिबद्धता अपनी जगह है, लेकिन दिपके के लिए फिलहाल स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा। टाइफाइड के इलाज के दौरान डॉक्टरों की सलाह, पर्याप्त आराम और नियमित उपचार महत्वपूर्ण होते हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, दिपके को IV ड्रिप दी जा रही है और उनका इलाज चल रहा है।

ऐसे में आंदोलन के आयोजकों के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ प्रदर्शन की गति बनाए रखना और दूसरी तरफ अपने प्रमुख नेता की स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान रखना।

यदि दीपके जंतर-मंतर पर लगातार मौजूद नहीं रह पाते हैं, तो आंदोलन की कमान अन्य नेताओं को अधिक सक्रिय रूप से संभालनी पड़ सकती है। इससे CJP के भीतर सामूहिक नेतृत्व की भूमिका भी बढ़ सकती है।

ये भी पढ़ें :- हिमाचल के लाहौल-स्पीति में दर्दनाक हादसा, चट्टान गिरने से 13 लोगों की मौत

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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