Bose के नए वायर्ड ईयरबड्स में न Bluetooth पेयरिंग की जरूरत है और न चार्जिंग केस की। USB-C डिवाइस से कनेक्ट करते ही ये इस्तेमाल किए जा सकते हैं। जानिए यह सिस्टम कैसे काम करता है।
नई दिल्ली: वायरलेस ईयरबड्स के दौर में अमेरिकी ऑडियो कंपनी Bose ने एक ऐसा प्रोडक्ट पेश किया है, जो पुराने जमाने के वायर्ड ईयरफोन की याद दिलाता है, लेकिन इसमें आधुनिक फीचर्स भी दिए गए हैं। कंपनी ने सोमवार, 28 सितंबर को Bose Noise Cancelling Wired Earbuds लॉन्च किए हैं।
खास बात यह है कि इनमें ब्लूटूथ या चार्जिंग की जरूरत नहीं है, इसके बावजूद उनमें एक्टिव नॉइस कैंसिलेशन (ANC) की सुविधा दी गई है। ईयरबड्स में 3.5mm हेडफोन जैक के बजाय USB-C कनेक्टर दिया गया है।
Bose के नए वायर्ड ईयरबड्स की अमेरिकी कीमत 99 डॉलर रखी गई है, जो कि भारतीय मुद्रा में करीब 9,500 रुपये बैठती है। हालांकि भारत में लॉन्च और आधिकारिक कीमत को लेकर कंपनी की ओर से फिलहाल अलग घोषणा सामने नहीं आई है। अमेरिका में इसकी शिपिंग 15 अक्टूबर से शुरू होगी और फिलहाल Bose तथा Best Buy पर प्री-ऑर्डर उपलब्ध है।
11 साल बाद ‘वायर्ड ईयरबड्स’ में वापसी
पिछले कुछ वर्षों में ऑडियो बाजार का बड़ा हिस्सा वायरलेस ईयरबड्स की तरफ चला गया है। ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, चार्जिंग केस, टच कंट्रोल और स्मार्टफोन के साथ ऑटोमैटिक पेयरिंग जैसे फीचर्स ने वायरलेस मॉडल को आम बना दिया है।
इसके बावजूद वायर्ड ईयरफोन की मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई। 2026 में इस कैटेगरी में दोबारा दिलचस्पी देखने को मिली है।
Circana के एक अध्ययन में 2026 की शुरुआत में वायर्ड हेडफोन की बिक्री में तेजी दर्ज की गई थी। इसी बदलते ट्रेंड के बीच Bose ने अपनी वापसी की है।
3.5mm जैक नहीं, USB-C से होगा कनेक्शन
नए Bose ईयरबड्स की सबसे बड़ी खासियत इसका कनेक्शन है। इनमें पारंपरिक 3.5mm हेडफोन जैक नहीं दिया गया है। इसके बजाय कंपनी ने USB-C कनेक्टर का इस्तेमाल किया है। केबल की लंबाई करीब 4.2 फीट है।
इसका मतलब है कि यूजर इसे ऐसे फोन, टैबलेट या कंप्यूटर से सीधे कनेक्ट कर सकता है, जिसमें USB-C ऑडियो सपोर्ट मौजूद हो। कनेक्शन के लिए ब्लूटूथ पेयरिंग की जरूरत नहीं है और न ही किसी ऐप को इंस्टॉल करना पड़ता है।
ANC सबसे खास फीचर
वायर्ड ईयरबड्स में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला फीचर Active Noise Cancellation है। आमतौर पर ANC को वायरलेस और बैटरी से चलने वाले ईयरबड्स से जोड़ा जाता है। Bose ने यहां अलग तरीका अपनाया है।
कंपनी की QuietControl तकनीक चार माइक्रोफोन का इस्तेमाल करती है। प्रत्येक ईयरबड में दो माइक्रोफोन दिए गए हैं, जो आसपास की आवाजों को लगातार मॉनिटर करते हैं और अनचाही आवाज को कम करने में मदद करते हैं।
इसमें तीन अलग-अलग सुनने के मोड मिलते हैं।
Quiet Mode: आसपास के शोर को कम करने के लिए।
Aware Mode: बाहर की आवाज को सुनने की अनुमति देता है, ताकि यूजर अपने आसपास की गतिविधियों से जुड़ा रह सके।
ANC Off: नॉइस कैंसिलेशन को पूरी तरह बंद करके सामान्य वायर्ड ऑडियो का इस्तेमाल किया जा सकता है।
ANC के लिए बैटरी की जरूरत नहीं
यहां Bose का डिजाइन थोड़ा अलग है। सामान्य ANC ईयरबड्स में नॉइस कैंसिलेशन चलाने के लिए अलग बैटरी होती है। नए Bose वायर्ड ईयरबड्स में कोई इंटरनल बैटरी नहीं है। ये सीधे कनेक्टेड USB-C डिवाइस से पावर लेते हैं। इसलिए इन्हें अलग से चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती।
इसका एक सीधा फायदा यह है कि यूजर को यह चिंता नहीं करनी होगी कि ईयरबड्स की बैटरी खत्म होने के कारण संगीत या ANC बंद हो जाएगा।
दूसरी ओर, इसका मतलब यह भी है कि ईयरबड्स इस्तेमाल करते समय उन्हें USB-C पोर्ट से कनेक्ट रखना जरूरी होगा।
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24-bit/48kHz तक ऑडियो आउटपुट
Bose ने ईयरबड्स में अपने Sound Design डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया है। कंपनी के मुताबिक, डिवाइस USB Audio Class 2 (UAC2) प्रोटोकॉल को सपोर्ट करता है और अलग-अलग सैंपल रेट और बिट रेट वाले ऑडियो सोर्स इनपुट को स्वीकार कर सकता है। यह फीचर उन यूजर्स के लिए उपयोगी हो सकता है जो स्ट्रीमिंग के साथ-साथ हाई-क्वालिटी ऑडियो फाइल्स सुनना पसंद करते हैं।
ईयरबड्स में Lossless Audio Listening का सपोर्ट भी दिया गया है। कंपनी का कहना है कि वायर्ड कनेक्शन के जरिए ऑडियो सिग्नल को डिजिटल रूप में सीधे डिवाइस तक पहुंचाया जा सकता है। इसका एक फायदा कम लेटेंसी के रूप में मिल सकता है। यानी वीडियो देखते समय ऑडियो और विजुअल के बीच देरी कम रखने में मदद मिल सकती है। यह फीचर गेमिंग और कंटेंट क्रिएशन जैसे इस्तेमाल में भी उपयोगी हो सकता है, जहां ऑडियो सिंक महत्वपूर्ण होता है।
तार पर मिलेगा फिजिकल कंट्रोल
आज के दौर में ज्यादातर वायरलेस ईयरबड्स और हेडफोन्स टच कंट्रोल के साथ आते हैं, लेकिन Bose ने अपने नए वायर्ड मॉडल में पारंपरिक फिजिकल बटन और Inline Remote को जगह दी है। कंपनी का यह डिजाइन उन यूजर्स के लिए उपयोगी हो सकता है, जो टच कंट्रोल के बजाय बटन दबाकर फीचर्स को नियंत्रित करना पसंद करते हैं।
Inline Remote में दिए गए फिजिकल बटनों की मदद से यूजर्स वॉल्यूम बढ़ाने या घटाने, म्यूजिक प्लेबैक कंट्रोल करने, कॉल रिसीव या मैनेज करने और ANC मोड बदलने जैसे काम कर सकते हैं। यानी इसके लिए फोन या दूसरे कनेक्टेड डिवाइस की स्क्रीन पर जाने की जरूरत नहीं होगी।
रिमोट की एक खासियत इसमें दिया गया अलग माइक्रोफोन भी है। Bose के अनुसार, इसे खास तौर पर कॉल के दौरान आवाज को स्पष्ट तरीके से रिकॉर्ड करने के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह माइक्रोफोन कपड़ों से रिमोट के संपर्क में आने पर पैदा होने वाले शोर को भी कम करने में मदद करता है।
इस तरह वायर्ड कनेक्शन के साथ फिजिकल कंट्रोल और अलग माइक्रोफोन को जोड़कर Bose ने रोजमर्रा के म्यूजिक और कॉलिंग अनुभव को अधिक सुविधाजनक बनाने की कोशिश की है।
IPX4 रेटिंग और कैरी केस
Bose Noise Cancelling Wired Earbuds को IPX4 water-resistance rating के साथ पेश किया गया है। यह रेटिंग बताती है कि ईयरबड्स सामान्य इस्तेमाल के दौरान पानी के हल्के छींटों और पसीने जैसी स्थितियों का सामना कर सकते हैं। यानी वॉकिंग, यात्रा या हल्की एक्सरसाइज के दौरान पसीने की वजह से ईयरबड्स को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, IPX4 रेटिंग का मतलब यह नहीं है कि ईयरबड्स पूरी तरह वाटरप्रूफ हैं। इन्हें पानी में डुबाने या तेज पानी की धार के संपर्क में लाने से बचना चाहिए।
ईयरबड्स के साथ zippered carry case भी मिलता है। यह केस डिवाइस को सुरक्षित तरीके से रखने और यात्रा के दौरान आसानी से साथ ले जाने में मदद करता है। केस की वजह से ईयरबड्स को बैग या जेब में रखते समय उनके उलझने या बाहरी खरोंच से बचाने में भी सुविधा मिलती है।
वायरलेस दौर में वायर्ड ईयरबड्स क्यों?
Bose का यह प्रोडक्ट ऐसे समय में पेश किया गया है, जब ऑडियो मार्केट में वायरलेस ईयरबड्स का दबदबा है। इसके बावजूद वायर्ड ईयरबड्स की वापसी के पीछे कुछ व्यावहारिक वजहें हैं। Bose ने पारंपरिक वायर्ड कनेक्शन को एक्टिव नॉइज कैंसलेशन (ANC) जैसे आधुनिक फीचर के साथ जोड़ने की कोशिश की है।
सबसे बड़ा फायदा चार्जिंग से छुटकारा है। वायरलेस ईयरबड्स की तरह इनमें अलग बैटरी या चार्जिंग केस की जरूरत नहीं होती। डिवाइस को USB-C पोर्ट से कनेक्ट करके सीधे इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे लंबे समय तक इस्तेमाल के दौरान बैटरी खत्म होने की चिंता भी नहीं रहती।
दूसरा फायदा कम लेटेंसी का है। सीधे वायर्ड कनेक्शन में वायरलेस ट्रांसमिशन की प्रक्रिया शामिल नहीं होती, इसलिए ऑडियो और वीडियो के बीच देरी कम रखने में मदद मिल सकती है। गेमिंग, वीडियो एडिटिंग और फिल्में देखने जैसे मामलों में यह खास तौर पर उपयोगी हो सकता है। Bose भी इस मॉडल में लो-लेटेंसी वायर्ड कनेक्शन को प्रमुख फीचर के तौर पर पेश कर रही है।
तीसरा फायदा वायर्ड ईयरबड्स का इस्तेमाल अपेक्षाकृत सरल है। न पेयरिंग की जरूरत, न ब्लूटूथ कनेक्शन और न ही अलग चार्जिंग केस। USB-C पोर्ट में प्लग करें और इस्तेमाल शुरू करें। यानी Bose ने पुराने वायर्ड डिजाइन को आधुनिक ऑडियो फीचर्स के साथ जोड़कर उन यूजर्स को ध्यान में रखा है, जो सुविधा के साथ-साथ लगातार और स्थिर कनेक्शन चाहते हैं।
लेकिन कुछ सीमाएं भी हैं
वायर्ड ईयरफोन का सबसे बड़ा फायदा इसकी सीधी और आसान कनेक्टिविटी है, लेकिन इसके साथ कुछ सीमाएं भी जुड़ी हैं। Bose के इस मॉडल को इस्तेमाल करने के लिए फोन, टैबलेट या दूसरे डिवाइस में USB-C ऑडियो सपोर्ट होना जरूरी है। अगर डिवाइस USB-C के जरिए ऑडियो आउटपुट सपोर्ट नहीं करता, तो ईयरफोन सीधे काम नहीं करेगा।
इसके अलावा, केबल की मौजूदगी उन यूजर्स को थोड़ी असुविधाजनक लग सकती है जो वायरलेस ईयरबड्स के आदी हैं। चलते-फिरते या एक्सरसाइज के दौरान तार उलझने या खिंचने की समस्या हो सकती है। इनलाइन रिमोट और केबल का वजन भी वायरलेस ईयरबड्स से अलग अनुभव देता है।
एक और महत्वपूर्ण अंतर यह है कि यह मॉडल Bluetooth या किसी ऐप पर निर्भर नहीं करता। इसलिए वायरलेस ईयरबड्स में मिलने वाले कुछ अतिरिक्त फीचर्स इसमें उपलब्ध नहीं हैं।
उदाहरण के लिए, Bluetooth multipoint और ऐप के जरिए ऑडियो कस्टमाइजेशन जैसे विकल्प यहां नहीं मिलते। ऐसे में यह ईयरफोन उन यूजर्स के लिए ज्यादा उपयुक्त हो सकता है जो सीधी USB-C कनेक्टिविटी और वायर्ड ऑडियो अनुभव को प्राथमिकता देते हैं, जबकि स्मार्ट फीचर्स चाहने वालों को कुछ समझौते करने पड़ सकते हैं।


