Tuesday, 23 June 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
प्रेस क्लबों का राष्ट्रीय मंच तैयार, फेडरेशन ऑफ प्रेस क्लब्स से पत्रकारों के हितों और प्रेस स्वतंत्रता को मिलेगा बल एक ऐसा Serial Killer जिसपर मरती थी लड़कियां, मौत के सबसे आकर्षक चेहरे Charles Sobhraj की कहानी WWE की इतिहास बदल देने वाली 7 सबसे बेहतरीन स्टोरीलाइन, जब रिंग में सिर्फ मुकाबले नहीं, बल्कि कहानियां भी लिखी गईं 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को मिली सीनियर टीम इंडिया की जर्सी, भावुक हुए युवा बल्लेबाज बोले- ‘जिस सपने के लिए बैट उठाया था, वह सच हो रहा है’ बिहार: जिसने दुनिया को ज्ञान दिया, वही आज पलायन और पिछड़ेपन का प्रतीक क्यों बन गया? International Olympic Day: 132 साल पहले शुरू हुई एक सोच जिसने दुनिया को खेलों के जरिए जोड़ दिया FIFA World Cup 2026: रोनाल्डो की पुर्तगाल पर नजरें, इंग्लैंड-घाना की कड़ी परीक्षा, जानिए फीफा वर्ल्ड कप में आज के सभी चार मुकाबले गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस पर सिक्का चैरिटेबल ट्रस्ट का गुरु का लंगर, सेवा और सामाजिक सद्भाव का दिया संदेश प्रेस क्लबों का राष्ट्रीय मंच तैयार, फेडरेशन ऑफ प्रेस क्लब्स से पत्रकारों के हितों और प्रेस स्वतंत्रता को मिलेगा बल एक ऐसा Serial Killer जिसपर मरती थी लड़कियां, मौत के सबसे आकर्षक चेहरे Charles Sobhraj की कहानी WWE की इतिहास बदल देने वाली 7 सबसे बेहतरीन स्टोरीलाइन, जब रिंग में सिर्फ मुकाबले नहीं, बल्कि कहानियां भी लिखी गईं 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को मिली सीनियर टीम इंडिया की जर्सी, भावुक हुए युवा बल्लेबाज बोले- ‘जिस सपने के लिए बैट उठाया था, वह सच हो रहा है’ बिहार: जिसने दुनिया को ज्ञान दिया, वही आज पलायन और पिछड़ेपन का प्रतीक क्यों बन गया? International Olympic Day: 132 साल पहले शुरू हुई एक सोच जिसने दुनिया को खेलों के जरिए जोड़ दिया FIFA World Cup 2026: रोनाल्डो की पुर्तगाल पर नजरें, इंग्लैंड-घाना की कड़ी परीक्षा, जानिए फीफा वर्ल्ड कप में आज के सभी चार मुकाबले गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस पर सिक्का चैरिटेबल ट्रस्ट का गुरु का लंगर, सेवा और सामाजिक सद्भाव का दिया संदेश

मक्का पर संग्राम: खेतों से शुरू होती आत्मनिर्भरता की जंग

श्री राम कौंडिन्य द्वारा द पायनियर (22 अक्टूबर 2025) में प्रकाशित लेख “Building a Resilient Maize Economy” में अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक का उल्लेख किया गया है, जिसमे उन्होंने कहा है कि “भारत जहाँ की आबादी 1.4 अरब से भी ज्यादा है वो अमेरिका से एक बोरी मक्का भी नहीं खरीदता।”

यह वक्तव्य सतही रूप से व्यापारिक तथ्य जैसा प्रतीत हो सकता है लेकिन भारत के मक्का की कहानी आयात या व्यापारिक निर्भरता की नहीं है; यह आत्मनिर्भरता, कृषि-नवाचार, और किसान-गरिमा की कथा है। भारत अब भी एक कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था है, जहाँ लगभग 45% जनसंख्या खेती पर निर्भर है। अधिकांश छोटे और सीमांत किसान सीमित संसाधनों के साथ मक्का जैसी नकदी फसलों से अपनी आजीविका सुरक्षित रखते हैं। पिछले एक दशक में मक्का की खेती में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है | आज भारत लगभग 10 मिलियन हेक्टेयर भूमि पर 40 मिलियन टन से अधिक मक्का का उत्पादन करता है, जिसकी औसत उत्पादकता 3.5 टन प्रति हेक्टेयर है। सरकार ने इसे 6 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

यह प्रगति सरकार, निजी क्षेत्र और किसानों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है |सिंगल क्रॉस हाइब्रिड बीजों, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, सिंचाई दक्षता, संतुलित पोषण और यंत्रीकरण जैसे उपायों से उत्पादकता में निरंतर वृद्धि हो रही है। इन प्रयासों ने मक्का उत्पादन को न केवल स्थिर किया है, बल्कि किसानों की आय और कृषि-लचीलापन भी बढ़ाया है। वर्तमान में भारत मक्का उत्पादन में आत्मनिर्भर है। यहाँ आयात केवल सीमित औद्योगिक या पशु-आहार उपयोग के लिए किया जाता है, न कि घरेलू मांग की कमी के कारण। ऐसे में सस्ते जीएम मक्का आयात से घरेलू मूल्य-संतुलन और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

वैश्विक स्तर पर मक्का व्यापार में बड़ा बदलाव हो रहा है। चीन, जो पहले अमेरिकी मक्का का प्रमुख खरीदार था, अब अपनी खरीद घटा चुका है। इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय जीएम मक्का निर्यातक नए बाज़ार खोज रहे हैं, जिनमें भारत एक संभावित लक्ष्य है। परंतु भारत अपने किसानों की आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रति संवेदनशील राष्ट्र है। यही कारण है कि वह जीएम मक्का के व्यापक आयात के प्रति नीतिगत सतर्कता बरत रहा है। भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट है: कृषक हित, खाद्य एवं चारा सुरक्षा, मूल्य स्थिरता और पर्यावरणीय संतुलन किसी भी व्यापारिक समझौते से अधिक महत्वपूर्ण हैं। व्यापारिक चर्चाओं में यह स्पष्ट है कि भारत गैर-जीएम अमेरिकी मक्का के आयात पर विचार कर सकता है, जो किसानों और पर्यावरणविदों दोनों की भावनाओं के अनुरूप है।

भारत में फ़िलहाल केवल एक जीएम खाद्य फसल को सीमित स्तर पर अनुमति है; मक्का की व्यावसायिक जीएम खेती अब भी निषिद्ध है। साथ ही, मक्का पर 15% तक आयात शुल्क तथा बड़े पैमाने पर जीएम आयात पर प्रतिबंध भारत की नीति की संरक्षणवादी रूपरेखा को दर्शाता है। यदि भारत ने जीएम मक्का आयात की अनुमति दी, तो यह कृषि मूल्य श्रृंखला, किसानों की आय और बाजार स्थिरता पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, बिहार जैसे राज्यों में मक्का खेती का रकबा तेजी से बढ़ा है। यह फसल किसानों के लिए वैकल्पिक आय स्रोत बन रही है। ऐसे में सस्ते आयातित मक्का से घरेलू मूल्य गिरना किसानों की निवेश क्षमता को कमजोर करेगा। डाउन टू अर्थ की एक रिपोर्ट में पाया गया कि भारत में परीक्षण किए गए 15% से अधिक मक्का खाद्य उत्पादों में जीएम अंश पाए गए, जबकि यह कानूनी रूप से वर्जित है। इससे स्पष्ट है कि यदि आयात नियंत्रण कमजोर हुआ तो खाद्य सुरक्षा, ट्रैसेबिलिटी और उपभोक्ता विश्वास पर गंभीर खतरा उत्पन्न होगा।

भारत के लिए गैर-जीएम, किसान-केंद्रित और उत्पादकता-आधारित नीति ही दीर्घकालिक समाधान है। बेहतर गैर-जीएम हाइब्रिड्स, यंत्रीकरण, पोषक संतुलन और उन्नत कृषि प्रथाओं से उत्पादकता में वृद्धि संभव है। इससे किसान आत्मनिर्भर रहेंगे और मूल्य श्रृंखला घरेलू बनी रहेगी। गैर-जीएम मक्का की वैश्विक मांग विशेष रूप से यूरोप और मध्य-पूर्व में बढ़ रही है। भारत इस अवसर का उपयोग उच्च मूल्य-वर्धित निर्यात के रूप में कर सकता है। साथ ही, गैर-जीएम कृषि भारत की जैव-सुरक्षा नीति, उपभोक्ता विश्वास और अंतरराष्ट्रीय छवि के अनुरूप है।

भारत को अपने गैर-जीएम मक्का क्षेत्र को सशक्त करने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने होंगे —
• स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार गैर-जीएम सिंगल क्रॉस हाइब्रिड्स विकसित और विस्तार करने में निवेश।
• किसानों को आधुनिक मशीनें, सिंचाई, कीट प्रबंधन और प्रशिक्षण की सुविधा देना।

• सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर फाइनेंसिंग और कृषि सेवाएँ सुलभ करें।
• आयात नीति में टैरिफ, कोटा और जीएम प्रमाणन प्रणाली के ज़रिए किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
• गैर-जीएम मक्का की पहचान संरक्षा प्रणाली (Identity Preservation) विकसित की जाए ताकि निर्यात में पारदर्शिता और भरोसा बना रहे।
इन कदमों से न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्थिरता भी सुनिश्चित होगी।भारत का मक्का क्षेत्र एक निर्णायक मोड़ पर है। बढ़ती वैश्विक मांग और व्यापारिक दबाव के बीच भारत को ऐसा संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा, जो कृषक हित, राष्ट्रीय सुरक्षा और गैर-जीएम पहचान तीनों को संरक्षित रखे।

भारत के लिए यह समय केवल एक बोरी मक्का आयात का नहीं, बल्कि एक आत्मनिर्भर कृषि मॉडल प्रस्तुत करने का है — जो दिखाए कि किस प्रकार एक प्रमुख कृषि राष्ट्र उच्च उत्पादकता, टिकाऊपन और गैर-जीएम अखंडता को एक साथ प्राप्त कर सकता है

शेयर करें: Facebook X WhatsApp

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।

Exit mobile version