चकदह गांव के आदिवासी परिवारों को ‘हासिर आलो’ योजना के तहत बिजली कनेक्शन मिलने शुरू हुए हैं। विधायक संतु पान ने बताया कि बीपीएल परिवारों को मुफ्त कनेक्शन देने की व्यवस्था की जाएगी।
हुगली: देश को आजाद हुए करीब 79 साल हो चुके हैं। इस दौरान शहरों से लेकर दूर-दराज के गांवों तक बिजली पहुंचाने के लिए कई योजनाएं चलाई गईं। लेकिन पश्चिम बंगाल के हुगली जिले का एक आदिवासी गांव ‘चकदह’ ऐसा भी रहा, जहां आजादी के बाद से घरों में बिजली नहीं पहुंची थी। आसपास के इलाकों में रोशनी थी, लेकिन इस गांव के लोगों को शाम ढलने के बाद अंधेरे में ही गुजारा करना पड़ता था।
अब दिवाली से ठीक पहले इस गांव के लोगों के लिए लंबे इंतजार का अंत हुआ है। गांव में पहली बार बिजली की आपूर्ति शुरू हुई है। घरों में बिजली पहुंचने से ग्रामीणों के बीच खुशी है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर रोजमर्रा के कामों तक, लोगों को उम्मीद है कि अब उनकी जिंदगी पहले से आसान होगी। हालांकि, इस बदलाव के साथ गांव में बिजली की सुविधा लंबे समय तक नहीं पहुंचने को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए हैं।
कहां स्थित है चकदह गांव?
यह गांव पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में स्थित है। चकदह गांव आस्तारा दत्तपुर ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है। यह मुख्य रूप से आदिवासी बहुल इलाका है, जहां रहने वाले परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार खेती है।
गांव में आजादी के बाद से अब तक घरों में बिजली नहीं पहुंची थी। आसपास के गांवों में बिजली की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन चकदह के लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा था। यही वजह है कि दिवाली से पहले गांव में बिजली की आपूर्ति शुरू होना स्थानीय निवासियों के लिए खास महत्व रखता है।
गांव में रहने वाले लोगों के लिए यह सिर्फ बिजली का कनेक्शन मिलने की बात नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की उन परेशानियों से राहत की उम्मीद भी है, जिनका सामना वे लंबे समय से कर रहे थे।
400 आदिवासी परिवारों को मिली नई उम्मीद
रिपोर्ट के मुताबिक, चकदह गांव में करीब 400 आदिवासी परिवार रहते हैं। ये परिवार लंबे समय से बिजली की सुविधा से वंचित थे। बिजली नहीं होने के कारण शाम के बाद घरों में रोशनी की व्यवस्था करना मुश्किल होता था। बच्चों को पढ़ाई करने में परेशानी होती थी और घरेलू कामों के लिए भी वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ता था।
फिलहाल, बिजली पहुंचने की खबर से गांव के लोगों में उत्साह है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि अब उन्हें रात में पढ़ाई, घरेलू कामकाज और अन्य जरूरी गतिविधियों के लिए पहले की तरह अंधेरे पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
बिजली के खंभों के बावजूद नहीं पहुंची थी बिजली
इस पूरे मामले का एक अहम पहलू यह है कि गांव में बिजली के खंभे कई साल पहले ही लगा दिए गए थे। इसके बावजूद उन पर बिजली की तारें नहीं बिछाई गई थीं। नतीजतन, बुनियादी ढांचे का एक हिस्सा मौजूद होने के बाद भी ग्रामीणों को बिजली का लाभ नहीं मिल पाया।
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, खंभे लगने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही तार बिछाए जाएंगे और घरों में कनेक्शन मिलने लगेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। खंभे लंबे समय तक खड़े रहे और गांव के घर बिजली से दूर रहे। आसपास के क्षेत्रों में बिजली की सुविधा होने के बावजूद चकदह के लोगों को इस बुनियादी सुविधा के लिए इंतजार करना पड़ा।
बिजली के खंभे और घरों तक वास्तविक कनेक्शन के बीच का यह अंतर ग्रामीण विद्युतीकरण की प्रक्रिया में अधूरे काम की ओर भी ध्यान खींचता है। केवल खंभे लगा देना किसी गांव तक बिजली पहुंचने का प्रमाण नहीं है। इसके लिए तार बिछाना, आपूर्ति व्यवस्था तैयार करना, घरों में मीटर लगाना और कनेक्शन चालू करना भी जरूरी होता है।
चकदह में अब इसी अधूरे काम को पूरा करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। बिजली विभाग ने घरों में मीटर लगाने का काम शुरू किया और कुछ घरों में नए मीटर बॉक्स भी लगाए गए हैं।
‘हासिर आलो‘ योजना के तहत मिले बिजली कनेक्शन
चकदह के आदिवासी पाड़े में बिजली की आपूर्ति ‘हासिर आलो’ योजना के तहत शुरू की गई है। इस योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बिजली की सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बिजली विभाग ने घरों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम भी शुरू किया है। स्थानीय विधायक संतु पान के मुताबिक, विभाग ने करीब एक महीने पहले घरों में मीटर लगाने की प्रक्रिया शुरू की थी। अब तक 50 घरों में नए मीटर बॉक्स लगाए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 100 से अधिक परिवारों तक बिजली कनेक्शन पहुंचाने का काम चल रहा है।
विधायक के अनुसार, गरीबी रेखा से नीचे (BPL) की श्रेणी में आने वाले परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे। हालांकि, मुफ्त कनेक्शन और बिजली की नियमित खपत से जुड़े शुल्क की शर्तों के बारे में उपलब्ध रिपोर्टों में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।
विधायक संतु पान ने क्या बताया?
तारकेश्वर के बीजेपी विधायक संतु पान ने गांव में बिजली पहुंचने को लेकर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार चकदह गांव में बिजली पहुंची है और इससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। उनके मुताबिक, उन्होंने इस समस्या को मुख्यमंत्री के सामने भी उठाया था और गांव में बिजली पहुंचाने की मांग की थी।
विधायक ने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें गांव में बिजली की समस्या के बारे में जानकारी मिली थी। उन्होंने चुनाव जीतने के बाद इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने का वादा किया था। उनके अनुसार, बिजली विभाग ने करीब एक महीने पहले मीटर लगाने का काम शुरू किया और अब घरों को कनेक्शन देने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
संतु पान ने यह भी कहा कि दिवाली से पहले गांव में बिजली पहुंचना स्थानीय लोगों के लिए खुशी की बात है। उनके मुताबिक, लंबे समय से बिजली से वंचित आदिवासी परिवारों को अब सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलना शुरू हुआ है।
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बच्चों की पढ़ाई और घरेलू कामों में मिलेगी राहत
गांव में बिजली नहीं होने का असर सबसे ज्यादा बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता था। शाम होने के बाद पर्याप्त रोशनी नहीं मिलने से विद्यार्थियों को पढ़ने में दिक्कत होती थी। ऐसे में उन्हें वैकल्पिक रोशनी के साधनों का इस्तेमाल करना पड़ता था। बिजली पहुंचने से अब बच्चों को रात में पढ़ाई के लिए बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीण परिवारों के लिए भी बिजली रोजमर्रा के कामों को आसान बना सकती है। घरों में रोशनी के अलावा पंखे, मोबाइल फोन चार्ज करने और बिजली से चलने वाले दूसरे जरूरी उपकरणों का इस्तेमाल संभव होगा। हालांकि, इन सुविधाओं का लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने घरों में कनेक्शन चालू हो चुके हैं और परिवारों की आर्थिक स्थिति के अनुसार वे किन उपकरणों का इस्तेमाल कर पाते हैं।
बिजली की उपलब्धता से गांव के विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है। वहीं, परिवारों को सूर्यास्त के बाद भी घरेलू काम करने में सहूलियत होगी। इसके अलावा, मोबाइल फोन चार्ज करने जैसी सामान्य जरूरतों के लिए भी अब पहले की तरह दूसरे विकल्पों पर निर्भरता कम हो सकती है।
पेयजल की सुविधा मिलने का भी दावा
चकदह के आदिवासी पाड़े में बिजली के साथ पेयजल की व्यवस्था भी की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इलाके के लोगों को अब एक के बाद एक सरकारी सुविधाएं मिलनी शुरू हुई हैं।
हालांकि, पेयजल की इस व्यवस्था के स्वरूप, कितने घरों को इसका लाभ मिला है और यह किस योजना के तहत उपलब्ध कराई गई है, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है। इसलिए इसे गांव में शुरू हुई अतिरिक्त सुविधा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
ग्रामीण इलाकों में बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का एक साथ विस्तार लोगों के दैनिक जीवन पर सीधा असर डाल सकता है। लेकिन इन योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी सुनिश्चित होगा, जब सभी पात्र परिवारों तक सेवाएं नियमित रूप से पहुंचें और उनकी देखरेख की व्यवस्था भी बनी रहे।
दिवाली से पहले गांव के लिए खास बदलाव
दिवाली को रोशनी का त्योहार कहा जाता है। ऐसे समय में चकदह के घरों तक पहली बार बिजली पहुंचना ग्रामीणों के लिए खास मायने रखता है। अब तक आसपास के इलाकों में बिजली की रोशनी के बीच इस गांव के लोगों को अंधेरे में रहना पड़ता था। इस बार त्योहार से पहले बिजली की आपूर्ति शुरू होने से उनके घरों में भी बिजली के बल्ब जलने की उम्मीद जगी है।
करीब आठ दशक के इंतजार के बाद बिजली मिलने की यह घटना ग्रामीणों के लिए सिर्फ त्योहार से जुड़ी खुशी नहीं है। यह बुनियादी सुविधा तक पहुंचने और लंबे समय से चली आ रही परेशानी में बदलाव की शुरुआत भी है।
चकदह की कहानी इस बात की याद दिलाती है कि बुनियादी सुविधाओं का विस्तार केवल योजनाओं की घोषणा या बुनियादी ढांचा खड़ा करने से पूरा नहीं होता। उसका वास्तविक लाभ तभी मिलता है, जब बिजली की तारें घरों तक पहुंचें, मीटर लगें और आपूर्ति शुरू हो। फिलहाल, गांव में पहली बार बिजली पहुंचने से ग्रामीणों को एक नई शुरुआत की उम्मीद जरूर मिली है।
