दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने के बीच 7 नवंबर की सुबह 9:05 बजे औसत AQI 364 दर्ज किया गया। इससे पहले 6 नवंबर को शाम 4 बजे यह 382 था। दोनों ही आंकड़े बहुत खराब श्रेणी में आते हैं।
नई दिल्ली: दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। आसमान में धुंध की मोटी परत दिखाई दे रही है और हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ती जा रही है।
इसका असर अब बच्चों की पढ़ाई और स्कूल जाने की व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। छोटे बच्चों को प्रदूषित हवा के संपर्क से बचाने के लिए दिल्ली सरकार ने स्कूलों के संचालन में बदलाव किया है।
शिक्षा निदेशालय ने राजधानी के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को कक्षा 5 तक के विद्यार्थियों के लिए हाइब्रिड मोड में कक्षाएं चलाने का निर्देश दिया है। इस व्यवस्था के तहत बच्चे स्कूल जाकर पढ़ाई कर सकेंगे और जहां ऑनलाइन कक्षाओं की सुविधा उपलब्ध है, वहां घर से पढ़ने का विकल्प भी रहेगा।
हाइब्रिड मोड में चलेंगी कक्षाएं
दिल्ली शिक्षा निदेशालय की ओर से 6 नवंबर को जारी सर्कुलर में राजधानी के स्कूलों को कक्षा 5 तक के विद्यार्थियों के लिए हाइब्रिड मोड में पढ़ाई कराने का निर्देश दिया गया है। यह आदेश शिक्षा निदेशालय के अंतर्गत आने वाले सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर लागू होगा।
इसके दायरे में नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC), दिल्ली नगर निगम (MCD) और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड के स्कूल भी शामिल हैं। यानी यह व्यवस्था केवल दिल्ली सरकार के स्कूलों तक सीमित नहीं है, बल्कि राजधानी के अलग-अलग प्रशासनिक निकायों के अंतर्गत आने वाले संबंधित स्कूलों को भी इसका पालन करना होगा।
हाइब्रिड मोड का अर्थ है कि पढ़ाई ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से संचालित की जा सकती है। विद्यार्थी स्कूल में उपस्थित होकर कक्षाओं में हिस्सा ले सकते हैं। वहीं, जिन स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था उपलब्ध है, वहां विद्यार्थियों को घर से कक्षा में शामिल होने का विकल्प दिया जा सकता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को प्रदूषण के लगातार संपर्क से बचाने के साथ-साथ उनकी पढ़ाई जारी रखना है।
अभिभावकों तक सूचना पहुंचाने के निर्देश
शिक्षा निदेशालय ने केवल हाइब्रिड मोड लागू करने का आदेश ही नहीं दिया है, बल्कि स्कूल प्रमुखों को इस व्यवस्था के बारे में अभिभावकों और संरक्षकों को सूचित करने के लिए भी कहा है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों की उपस्थिति और पढ़ाई को लेकर परिवारों में किसी तरह का भ्रम न रहे।
इसके अलावा, शिक्षा निदेशालय ने जिलों और जोन में तैनात उप शिक्षा निदेशकों (DDEs) को अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों का दौरा करने और आदेश के पालन की निगरानी करने की जिम्मेदारी दी है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्कूलों में नई व्यवस्था सुचारु रूप से लागू हो।
यह निर्देश सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के लिए है। इसलिए अभिभावकों को अपने बच्चे के स्कूल से संपर्क कर यह पता करना चाहिए कि वहां ऑनलाइन कक्षाएं किस माध्यम से संचालित होंगी और घर से पढ़ाई के लिए क्या व्यवस्था की गई है।
दिल्ली में प्रदूषण ने बढ़ाई चिंता
स्कूलों के संचालन में बदलाव का सीधा संबंध दिल्ली में बिगड़ती वायु गुणवत्ता से है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार, 6 नवंबर को शाम 4 बजे दिल्ली का औसत AQI 382 दर्ज किया गया। यह ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है और ‘गंभीर’ स्तर से केवल 19 अंक नीचे था। इससे एक दिन पहले शहर का AQI 369 था।
शनिवार, 7 नवंबर की सुबह भी स्थिति में खास सुधार नहीं दिखा। CPCB के आंकड़ों के अनुसार, सुबह 9:05 बजे दिल्ली का AQI 364 दर्ज किया गया। उस समय शहर के 59 निगरानी केंद्रों में से 53 पर PM2.5 प्रमुख प्रदूषक था। इनमें 18 केंद्रों पर वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई।
CPCB के वर्गीकरण के अनुसार, AQI 0 से 50 के बीच होने पर हवा की गुणवत्ता ‘अच्छी’, 51 से 100 पर ‘संतोषजनक’, 101 से 200 पर ‘मध्यम’, 201 से 300 पर ‘खराब’, 301 से 400 पर ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ मानी जाती है।
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लागू हुआ GRAP-III
दिल्ली में शुक्रवार को औसत AQI 382 था, जो 401 के गंभीर स्तर से कम है। इसके बावजूद CAQM ने 6 नवंबर को पूरे दिल्ली-NCR में GRAP के तीसरे चरण को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया। सामान्य तौर पर GRAP-III गंभीर श्रेणी की वायु गुणवत्ता से जुड़ा है, लेकिन आयोग ने इस बार स्थिति को देखते हुए एहतियाती कदम उठाया।
CAQM ने यह फैसला दिल्ली की वायु गुणवत्ता के मौजूदा स्तर, मौसम संबंधी परिस्थितियों और आने वाले दिनों के पूर्वानुमान की समीक्षा के बाद लिया। आयोग ने भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) से मिले पूर्वानुमानों को भी ध्यान में रखा।
रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली में हवा की गति कम रहने और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण प्रदूषक तत्वों का फैलाव प्रभावित हो रहा है। ऐसे में प्रदूषण हवा में जमा हो सकता है और स्थिति आगे और खराब हो सकती है। दीपावली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं भी पहले से मौजूद प्रदूषण में इजाफा कर सकता है।
दिल्ली-NCR पर GRAP-III का असर
GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण की स्थिति के आधार पर लागू किए जाने वाले आपातकालीन उपायों का ढांचा है। इसे चार चरणों में बांटा गया है। प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ प्रतिबंध भी सख्त होते जाते हैं। तीसरे चरण के लागू होने के बाद पहले और दूसरे चरण के उपाय भी जारी रहते हैं।
GRAP-III के तहत दिल्ली-NCR में कई तरह की गतिविधियों पर अतिरिक्त पाबंदियां लगाई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
1. निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर रोक:
धूल पैदा करने वाली कई निर्माण और विध्वंस गतिविधियों को रोकने का निर्देश दिया गया है। इसमें खुदाई, पाइलिंग, सड़क निर्माण और अन्य गैर-जरूरी निर्माण कार्य शामिल हैं। आवश्यक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़ी कुछ गतिविधियों को निर्धारित शर्तों के तहत छूट मिल सकती है।
2. पुराने वाहनों पर प्रतिबंध:
दिल्ली के साथ गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर और सोनीपत में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल से चलने वाले चार पहिया हल्के मोटर वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध लागू किया गया है। दिव्यांग व्यक्तियों के लिए निर्धारित शर्तों के तहत विशेष रूप से अनुकूलित वाहनों को छूट का प्रावधान है।
3. मालवाहक वाहनों पर पाबंदियां:
दिल्ली में कुछ श्रेणियों के पुराने डीजल मालवाहक वाहनों के संचालन और दिल्ली के बाहर पंजीकृत निर्धारित श्रेणी के डीजल हल्के मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। आवश्यक वस्तुओं और जरूरी सेवाओं से जुड़े वाहनों के लिए संबंधित नियमों में निर्धारित प्रावधान लागू होंगे।
4. स्कूलों में हाइब्रिड पढ़ाई:
छोटे बच्चों को प्रदूषण के संपर्क से बचाने के लिए कक्षा 5 तक के विद्यार्थियों के लिए हाइब्रिड मोड में पढ़ाई की व्यवस्था की गई है। दिल्ली में शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में स्कूलों को अलग से सर्कुलर जारी किया है।
5. घर से काम करने की सलाह:
GRAP-III के तहत NCR राज्यों और केंद्र सरकार को अपने कार्यालयों में कर्मचारियों के एक हिस्से को घर से काम करने की अनुमति देने पर विचार करने के लिए कहा गया है। इसका उद्देश्य सड़कों पर वाहनों की संख्या और उनसे होने वाले उत्सर्जन को कम करना है।
दिल्ली-NCR में प्रदूषण की मुख्य वजह
दिल्ली और आसपास के शहरों में सर्दियों के दौरान प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण एक साथ काम करते हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, कचरा जलाना और पराली का धुआं इनमें शामिल हैं। मौसम की परिस्थितियां भी प्रदूषक तत्वों के फैलाव को प्रभावित करती हैं।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, IITM के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के आंकड़ों में शुक्रवार को दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र का योगदान 17.6 प्रतिशत बताया गया। इसके बाद खेतों में आग लगाने से निकलने वाले धुएं का योगदान 7.9 प्रतिशत और पड़ोसी क्षेत्रों, जिनमें हरियाणा का झज्जर भी शामिल है, जिसका योगदान 6.8 प्रतिशत दर्ज किया गया।
मौसम में बदलाव के कारण भी प्रदूषण जमीन के करीब जमा हो सकता है। जब हवा की गति कम होती है, तो प्रदूषक तत्व तेजी से फैल नहीं पाते। तापमान में गिरावट और तापमान प्रतिलोमन (Temperature Inversion) जैसी परिस्थितियां इस समस्या को और बढ़ा सकती हैं। ऐसी स्थिति में जमीन के पास ठंडी हवा और उसके ऊपर गर्म हवा की परत बन जाती है, जिससे प्रदूषक तत्व वातावरण में ऊपर की ओर नहीं जा पाते।
इसका असर दिल्ली के साथ-साथ नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे NCR के शहरों में भी दिखाई देता है। इसलिए प्रदूषण नियंत्रण के उपाय केवल राजधानी तक सीमित नहीं रखे जाते, बल्कि पूरे क्षेत्र में लागू किए जाते हैं।
अभिभावक और स्कूल किन बातों का रखें ध्यान?
प्रदूषण के मौजूदा स्तर को देखते हुए अभिभावकों के लिए जरूरी है कि वे स्कूल की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें। यदि स्कूल ऑनलाइन कक्षाओं की सुविधा दे रहा है, तो बच्चे की जरूरत और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर उपलब्ध विकल्प का इस्तेमाल किया जा सकता है।
स्कूलों को भी ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन, विद्यार्थियों तक समय पर सूचना पहुंचाने और पढ़ाई की निरंतरता बनाए रखने के लिए जरूरी व्यवस्था करनी होगी। जिन विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई संभव नहीं है, उनके लिए स्कूलों को अपनी उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार व्यवस्था स्पष्ट करनी चाहिए।
अगले आदेश तक लागू रहेगी व्यवस्था
दिल्ली शिक्षा निदेशालय का हाइब्रिड मोड संबंधी निर्देश 6 नवंबर को जारी किया गया है। स्कूलों को कक्षा 5 तक के विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से कक्षाएं संचालित करने के लिए कहा गया है। यह व्यवस्था अगले आदेश तक लागू रहेगी।
वहीं, CAQM ने दिल्ली-NCR में GRAP-III के उपाय तत्काल प्रभाव से लागू किए हैं। वायु गुणवत्ता और मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए आयोग स्थिति की समीक्षा करता रहेगा। प्रदूषण के स्तर में बदलाव के आधार पर आगे प्रतिबंधों में राहत या अतिरिक्त सख्ती को लेकर निर्णय लिया जा सकता है।
